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राजाजी में पक्के निर्माण पर तीन साल की सजा
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राजाजी टाइगर रिजर्व के अंदर पक्का निर्माण करने के आरोपियों को तीन साल की सजा और दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अरुण वोहरा की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
शासकीय अधिवक्ता राजेश त्रिवेद्वी ने बताया कि पहले राजाजी टाइगर रिजर्व की धौलखंड की रेंज के रसूलपुर टोंगिया आरक्षित वन क्षेत्र में आता था, बाद में इसे राजाजी राष्ट्रीय पार्क बना दिया गया, तब 13 अगस्त 2009 में रसूलपुर टोंगिया में प्रेम सिंह ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर लिया था। जबकि टोंगिया काश्तकार में के रूप में शामिल प्रेम सिंह को केवल वहां पर कच्चे आवास झोपड़ी आदि बनाकर रहने का अधिकार दिया गया था। अवैध रूप से पक्का निर्माण कर आवास बनाने पर रेंज के तत्कालीन वन दारोगा मोतीलाल ने प्रेम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद कोर्ट में भी वाद दायर किया गया था। मामले की सुनवाई कर रहे अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अरुण वोहरा ने प्रेम सिंह को अवैध रूप से पक्का निर्माण करने का दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने उन्हें फिलहाल अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया है।
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शासकीय अधिवक्ता राजेश त्रिवेद्वी ने बताया कि पहले राजाजी टाइगर रिजर्व की धौलखंड की रेंज के रसूलपुर टोंगिया आरक्षित वन क्षेत्र में आता था, बाद में इसे राजाजी राष्ट्रीय पार्क बना दिया गया, तब 13 अगस्त 2009 में रसूलपुर टोंगिया में प्रेम सिंह ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर लिया था। जबकि टोंगिया काश्तकार में के रूप में शामिल प्रेम सिंह को केवल वहां पर कच्चे आवास झोपड़ी आदि बनाकर रहने का अधिकार दिया गया था। अवैध रूप से पक्का निर्माण कर आवास बनाने पर रेंज के तत्कालीन वन दारोगा मोतीलाल ने प्रेम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद कोर्ट में भी वाद दायर किया गया था। मामले की सुनवाई कर रहे अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अरुण वोहरा ने प्रेम सिंह को अवैध रूप से पक्का निर्माण करने का दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने उन्हें फिलहाल अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया है।
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