{"_id":"5f29a0208ebc3e3cdb4e0109","slug":"those-giving-land-will-not-get-job-in-railway-haridwar-news-drn352173767","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमीन देने वालों को नहीं मिलेगी रेलवे में नौकरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमीन देने वालों को नहीं मिलेगी रेलवे में नौकरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने रुड़की-देवबंद रेलवे परियोजना में जमीन देने वाले किसानों के परिवार को रेलवे में नौकरी से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने रेलवे अधिकारियों के हवाले से दावा किया तो ना तो ऐसा कोई प्रावधान है और ना ही ऐसा कोई आश्वासन दिया गया था। डीएम ने नौकरी की बात छोड़कर दूसरी मांगों पर रेलवे अफसरों से बात कराने का भरोसा दिया है।
रुड़की-देवबंद रेल लाइन बिछाने के लिए 2011 में बहस्तीपुर, पनियाला, रहीमपुर व शाहलापुर चार गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। किसानों का कहना है कि जब रेलवे ने जमीन का अधिग्रहण किया था, उस समय परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी दिये जाने की बात कहीं गई थी। इसी बात को लेकर किसानों और रेलवे में विवाद चल रहा है और काम अधर में लटका है।
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक कर विवाद सुलझाने की पहल शुरू की है। जिलाधिकारी ने रेलवे अधिकारियों के हवाले से बताया कि भूमि अधिग्रहण एक्ट के अनुसार नौकरी दिए जाने का प्रावधान वर्तमान में प्रभावी नहीं है। रेलवे अधिकारियों ने नौकरी देने में पूर्ण असमर्थता जताई है। किसानों ने नौकरी न दिये जाने के एवज में वर्तमान सर्किल रेट और उन्हें आसपास के गांवों को मिले मुआवजे के बराबर मुआवजा दिये जाने की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि एक्ट संशोधन और जीओ परिवर्तन के कारण उनकी मुआवजा राशि भी प्रभावित हो गई है। जिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को लंबित चले आ रहे मामले को शीघ्रता से निपटाने को कहा। नौकरी देने पर रेलवे की नामंजूरी के बाद भूमि देने वाले किसानों के प्रति परिवार को दी गई मुआवजा राशि के अतिरिक्त पांच लाख रुपये एक मुश्त दिये जाने केे विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
विज्ञापन
जिलाधिकारी ने संबंधित किसानों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अपनी मांगों का ज्ञापन बनाकर देने को कहा, ताकि नौकरी के अतिरिक्त मुआवजे पर सहमति बनाई जा सके। उन्होंने किसानों से जनहित में रेल परियोजना में सहयोग का अनुरोध किया है।
विज्ञापन
रुड़की-देवबंद रेल लाइन बिछाने के लिए 2011 में बहस्तीपुर, पनियाला, रहीमपुर व शाहलापुर चार गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। किसानों का कहना है कि जब रेलवे ने जमीन का अधिग्रहण किया था, उस समय परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी दिये जाने की बात कहीं गई थी। इसी बात को लेकर किसानों और रेलवे में विवाद चल रहा है और काम अधर में लटका है।
विज्ञापन
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक कर विवाद सुलझाने की पहल शुरू की है। जिलाधिकारी ने रेलवे अधिकारियों के हवाले से बताया कि भूमि अधिग्रहण एक्ट के अनुसार नौकरी दिए जाने का प्रावधान वर्तमान में प्रभावी नहीं है। रेलवे अधिकारियों ने नौकरी देने में पूर्ण असमर्थता जताई है। किसानों ने नौकरी न दिये जाने के एवज में वर्तमान सर्किल रेट और उन्हें आसपास के गांवों को मिले मुआवजे के बराबर मुआवजा दिये जाने की मांग उठाई। किसानों ने कहा कि एक्ट संशोधन और जीओ परिवर्तन के कारण उनकी मुआवजा राशि भी प्रभावित हो गई है। जिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को लंबित चले आ रहे मामले को शीघ्रता से निपटाने को कहा। नौकरी देने पर रेलवे की नामंजूरी के बाद भूमि देने वाले किसानों के प्रति परिवार को दी गई मुआवजा राशि के अतिरिक्त पांच लाख रुपये एक मुश्त दिये जाने केे विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
विज्ञापन
जिलाधिकारी ने संबंधित किसानों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अपनी मांगों का ज्ञापन बनाकर देने को कहा, ताकि नौकरी के अतिरिक्त मुआवजे पर सहमति बनाई जा सके। उन्होंने किसानों से जनहित में रेल परियोजना में सहयोग का अनुरोध किया है।