{"_id":"57c1c3314f1c1ba435d4f463","slug":"the-tax-would-have-to-misstatements-expensive","type":"story","status":"publish","title_hn":"टैक्स का गलत विवरण देना पड़ेगा महंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टैक्स का गलत विवरण देना पड़ेगा महंगा
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 27 Aug 2016 10:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शासन ने नगर निगम को समय पर टैक्स नहीं देने एवं प्रदत्त स्वकर फार्म में गलत सूचना देने वाले भवन स्वामियों (करदाताओं) पर नकेल कस दी है। शासन ने दो अगस्त को उत्तराखंड में प्रचलित उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 में संशोधन कर पूर्व में निर्धारित अलग-अलग जुर्माना राशि को बढ़ा दिया है।
अब कोई भवन स्वामी नगर निगम की ओर से प्रदत्त हाउस टैक्स तय करने के स्वकर फार्म में कारपेट एरिया का गलत विवरण प्रस्तुत करता है या कोई तथ्य छिपता है तो उसको एक हजार रुपये के स्थान पर 5000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। नगर निगम की ओर से प्रदत्त स्वकर फार्म को निर्धारित अवधि में भरकर जमा नहीं करने पर विलंब शुल्क 500से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है।
आय बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर शासन ने बायलॉज की अवहेलना करने वालों पर भी नकेल कसी है। अब तक नियमों की अवहेलना करने पर नगर निगम को 20 रुपये प्रतिदिन जुर्माना वसूली का अधिकार था। अब इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। अब नियमों की अवहेलना कर अतिक्रमण करने, ठेली, फड लगाने या अन्य नियम विरुद्ध गतिविधि करने पर नगर निगम उनसे 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगा सकेगा। इस संशोधन से नगर निगम के अधिकारियों को लोगों को दंडित करने की शक्ति मिल गई है।
विज्ञापन
नए संशोधित शासनादेश को लागू करने को टैक्स विभाग को निर्देशित कर दिया गया है। जिन भवन स्वामियों ने नगर निगम की ओर से घर-घर दिए गए स्वकर फार्म को भरकर जमा नहीं किया है, उन्हें जुर्माने से बचने के लिए तुरंत फार्म भरकर सही विवरण के साथ जमा कर देना चाहिए। इसके साथ ही जिन भवन स्वामियों ने गलत विवरण प्रस्तुत किया है वे भी उसे ठीक करा सकते हैं। - विप्रा त्रिवेदी, नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार
नगर प्रमुख कहलाएंगे अब महापौर
हरिद्वार। शासन ने नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर पदनामों में परिवर्तन किया है।
प्रमुख सचिव आरसी खुल्बे की ओर से जारी संशोधित शासनादेश में पूर्व प्रचलित नगर प्रमुख शब्द के स्थान पर महापौर, उप नगर प्रमुख के स्थान पर उप महापौर, सभासद व सभासदों के स्थान पर पार्षद व पार्षदों कर दिया गया है। हालांकि बहुत पहले से नगरपालिका सदस्यों को सभासद और नगर निगमों के सदस्यों को पार्षद के नाम से ही जाना जाता है। शासनादेश में नगर निगमों के अधिकारियों का भी नया नामकरण किया गया है। मुख्य नगर अधिकारी को अब नगर आयुक्त, अपर मुख्य नगर अधिकारी को अपर नगर आयुक्त, उप नगर अधिकारी को उप नगर आयुक्त और सहायक नगर अधिकारी को सहायक नगर आयुक्त को पदनाम दिया गया है। शासनादेश के अनुरूप नगर निगम के अधिकारियों व नगर प्रमुख ने अपनी गाड़ियों, कार्यालयों पर नए पदनाम की नेम प्लेट लगानी शुरू कर दी है। मेयर मनोज गर्ग ने दो साल पहले की अपने आवास को जाने वाली रोड पर महापौर का बोर्ड लगवा दिया था। ब्यूरो
विज्ञापन
अब कोई भवन स्वामी नगर निगम की ओर से प्रदत्त हाउस टैक्स तय करने के स्वकर फार्म में कारपेट एरिया का गलत विवरण प्रस्तुत करता है या कोई तथ्य छिपता है तो उसको एक हजार रुपये के स्थान पर 5000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। नगर निगम की ओर से प्रदत्त स्वकर फार्म को निर्धारित अवधि में भरकर जमा नहीं करने पर विलंब शुल्क 500से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है।
विज्ञापन
आय बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर शासन ने बायलॉज की अवहेलना करने वालों पर भी नकेल कसी है। अब तक नियमों की अवहेलना करने पर नगर निगम को 20 रुपये प्रतिदिन जुर्माना वसूली का अधिकार था। अब इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। अब नियमों की अवहेलना कर अतिक्रमण करने, ठेली, फड लगाने या अन्य नियम विरुद्ध गतिविधि करने पर नगर निगम उनसे 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगा सकेगा। इस संशोधन से नगर निगम के अधिकारियों को लोगों को दंडित करने की शक्ति मिल गई है।
विज्ञापन
नए संशोधित शासनादेश को लागू करने को टैक्स विभाग को निर्देशित कर दिया गया है। जिन भवन स्वामियों ने नगर निगम की ओर से घर-घर दिए गए स्वकर फार्म को भरकर जमा नहीं किया है, उन्हें जुर्माने से बचने के लिए तुरंत फार्म भरकर सही विवरण के साथ जमा कर देना चाहिए। इसके साथ ही जिन भवन स्वामियों ने गलत विवरण प्रस्तुत किया है वे भी उसे ठीक करा सकते हैं। - विप्रा त्रिवेदी, नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार
नगर प्रमुख कहलाएंगे अब महापौर
हरिद्वार। शासन ने नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर पदनामों में परिवर्तन किया है।
प्रमुख सचिव आरसी खुल्बे की ओर से जारी संशोधित शासनादेश में पूर्व प्रचलित नगर प्रमुख शब्द के स्थान पर महापौर, उप नगर प्रमुख के स्थान पर उप महापौर, सभासद व सभासदों के स्थान पर पार्षद व पार्षदों कर दिया गया है। हालांकि बहुत पहले से नगरपालिका सदस्यों को सभासद और नगर निगमों के सदस्यों को पार्षद के नाम से ही जाना जाता है। शासनादेश में नगर निगमों के अधिकारियों का भी नया नामकरण किया गया है। मुख्य नगर अधिकारी को अब नगर आयुक्त, अपर मुख्य नगर अधिकारी को अपर नगर आयुक्त, उप नगर अधिकारी को उप नगर आयुक्त और सहायक नगर अधिकारी को सहायक नगर आयुक्त को पदनाम दिया गया है। शासनादेश के अनुरूप नगर निगम के अधिकारियों व नगर प्रमुख ने अपनी गाड़ियों, कार्यालयों पर नए पदनाम की नेम प्लेट लगानी शुरू कर दी है। मेयर मनोज गर्ग ने दो साल पहले की अपने आवास को जाने वाली रोड पर महापौर का बोर्ड लगवा दिया था। ब्यूरो