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हत्यारोपी कैदी ने तराशी अहिंसा के पुजारी बापू की प्रतिमा
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हरिद्वार जेल में कैदी बिनोद साहनी द्वारा बनाई गई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा।
- फोटो : HARIDWAR
आवेश में आकर अपराध करने के बाद जेल की सलाखें कई लोगों की सोच बदल देती है। ऐसा ही कुछ हरिद्वार जेल में बंद अपनी पत्नी के हत्या के दोष सिद्ध एक बंदी के साथ हुआ है। अभियुक्त विनोद साहनी ने अपने भाइयों को प्रतिमा बनाते देखा था। जेल में पुरानी यादें उसके मन में उमड़ने घुमड़ने लगी। उसने यहां प्रतिमा बनाने की ठानी। खास बात यह है कि उसने सबसे पहले अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया। उसने प्रतिमा बनाकर मानो उसमें जान फूंक दी है। वह अब अन्य महापुरुषों की प्रतिमा बनाएगा।
पत्नी की हत्या के आरोप में बंद बिहार के जनकपुर निवासी विनोद साहनी को एक साल पहले गैर जनपद की जेल से रोशनाबाद स्थित जिला कारागार में लाया गया। बताया जाता है कि विनोद पेशे से निर्माण कार्यों का ठेकेदार था। उसके भाई प्रतिमा बनाने का काम करते थे। वह अपने भाइयों का काम देखता रहता था। कैदी ने जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य से जेल को सुंदर बनाने के लिए महापुरुषों की प्रतिमाएं बनाने की इच्छा जताई।
जेल अधीक्षक ने बंदी विनोद साहनी को जरूरी सामान उपलब्ध कराया। विनोद ने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा तैयार की। प्रतिमा को दो महीने में तैयार किया। गांधी की प्रतिमा बनाने और उसको स्थापित करने के लिए लोहा, स्टील, मिट्टी से लेकर सीमेंट का इस्तेमाल किया गया। विनोद साहनी अब संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर, शहीद भगत सिंह समेत अन्य महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा भी बनाएगा। संवाद
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इलेक्ट्रिक वाइंडिंग और कंप्यूटर का भी कर रहे कोर्स
जिला कारागार में 30 बंदी इलेक्ट्रिक बाइंडिंग और 15 बंदी कंप्यूटर का भी कोर्स भी कर रहे हैं। रविशंकर की संस्था ग्रामीण विकास विकास ट्रस्ट प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत बंदियों को प्रशिक्षण दे रही है।
परीक्षाओं की भी कर रहे तैयारी
जेल में बंद बंदी हाईस्कूल, इंटर, बीए व एमए की भी पढ़ाई भी कर रहे है। वर्तमान में जेल में बंद बंदियों में हाईस्कूल की 21, इंटरमीडिएट की 10, बीए की 6 और एमए की सात बंदी पढ़ाई कर रहे हैं। हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई एनआईओएस के माध्यम से कराई जा रही हैं। जबकि एमए व बीए की परीक्षा इग्नू के माध्यम से कराई जाती है। जेल में बंद बंदी रमन भारद्वाज इन बंदियों को पढ़ाई करवाते हैं।
जेल प्रशासन का प्रयास हर बंदी और कैदी के जीवन में सुधार का है। विनोद साहनी को यह मुकाम हासिल हुआ। उसकी लग्न व मेहनत अन्य बंदियों केे भी प्रेरणा देती है। जेल में लगातार कार्यक्रमों का आयोजन कर बंदियों के जीवन में नए रंग भरने का प्रयास किया जाता है।
- मनोज कुमार आर्य, वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिद्वार
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पत्नी की हत्या के आरोप में बंद बिहार के जनकपुर निवासी विनोद साहनी को एक साल पहले गैर जनपद की जेल से रोशनाबाद स्थित जिला कारागार में लाया गया। बताया जाता है कि विनोद पेशे से निर्माण कार्यों का ठेकेदार था। उसके भाई प्रतिमा बनाने का काम करते थे। वह अपने भाइयों का काम देखता रहता था। कैदी ने जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य से जेल को सुंदर बनाने के लिए महापुरुषों की प्रतिमाएं बनाने की इच्छा जताई।
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जेल अधीक्षक ने बंदी विनोद साहनी को जरूरी सामान उपलब्ध कराया। विनोद ने सबसे पहले महात्मा गांधी की प्रतिमा तैयार की। प्रतिमा को दो महीने में तैयार किया। गांधी की प्रतिमा बनाने और उसको स्थापित करने के लिए लोहा, स्टील, मिट्टी से लेकर सीमेंट का इस्तेमाल किया गया। विनोद साहनी अब संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर, शहीद भगत सिंह समेत अन्य महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमा भी बनाएगा। संवाद
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इलेक्ट्रिक वाइंडिंग और कंप्यूटर का भी कर रहे कोर्स
जिला कारागार में 30 बंदी इलेक्ट्रिक बाइंडिंग और 15 बंदी कंप्यूटर का भी कोर्स भी कर रहे हैं। रविशंकर की संस्था ग्रामीण विकास विकास ट्रस्ट प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत बंदियों को प्रशिक्षण दे रही है।
परीक्षाओं की भी कर रहे तैयारी
जेल में बंद बंदी हाईस्कूल, इंटर, बीए व एमए की भी पढ़ाई भी कर रहे है। वर्तमान में जेल में बंद बंदियों में हाईस्कूल की 21, इंटरमीडिएट की 10, बीए की 6 और एमए की सात बंदी पढ़ाई कर रहे हैं। हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई एनआईओएस के माध्यम से कराई जा रही हैं। जबकि एमए व बीए की परीक्षा इग्नू के माध्यम से कराई जाती है। जेल में बंद बंदी रमन भारद्वाज इन बंदियों को पढ़ाई करवाते हैं।
जेल प्रशासन का प्रयास हर बंदी और कैदी के जीवन में सुधार का है। विनोद साहनी को यह मुकाम हासिल हुआ। उसकी लग्न व मेहनत अन्य बंदियों केे भी प्रेरणा देती है। जेल में लगातार कार्यक्रमों का आयोजन कर बंदियों के जीवन में नए रंग भरने का प्रयास किया जाता है।
- मनोज कुमार आर्य, वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिद्वार