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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   The number of guaraya in cities decreased

शहरों में गौरेया की संख्या में घटी

Mon, 20 Mar 2017 10:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Mon, 20 Mar 2017 10:17 PM IST
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गुरुकुल कांगड़ी विवि के प्रख्यात पक्षीविद् प्रो. दिनेश चंद्र भट्ट ने 10 वर्षों में गौरेया संरक्षण के क्षेत्र में किए गए शोधों का संदर्भ देते हुए कहा कि उत्तराखंड के शहरों में गौरेया की संख्या में करीब 60-70 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। संतोषजनक बात यह है कि ग्रामीण अंचलों में गौरेया अब भी दिखाई दे रही है। बताया कि उनकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित कृत्रिम घोसलों को लगाने से निश्चित ही गौरेया को शहरों की तरफ आकर्षित किया जा सकता है।  
     
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. भट्ट विश्व गौरेया दिवस पर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में आपदा प्रबंधन एवं गौरेया संरक्षण पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने बताया कि औद्योगिकीकरण एवं नगरीयकरण के चलते जीवों के प्राकृतिक आवास सिकुडते जा रहे हैं। ऐसे में शीघ्र ही गौरेया के समान अन्य पशु-पक्षी भी विलुप्त प्राय: हो जाएंगे।
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जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने कहा कि भूकंप जैसी भयानक आपदाएं भी सीधे तौर पर जनहानि नहीं करती अपितु प्रबंधन की बारीकियों के प्रति अज्ञानता, उदासीनता एवं मानव निर्मित भावनाओं को कमजोर व अनियोजित निर्माण जान-माल को क्षति पहुंचाता है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पक्षीविद् डा. विनय सेठी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सरकारी या किसी विशेष विभाग का कार्य न मानकर हमें इसे इमानदारी से निजी कार्य मानते हुए अपना योगदान देना होगा, तभी भावी पीढ़ियां हमें साधुवाद देगी। पर्यावरण विभाग के पर्यावरणविद् प्रो. प्रकाश चंद्र जोशी ने आपदा प्रबंधन विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। भोपाल गैस त्रासदी की याद दिलाते कहा कि तकनीकी की कमजोरी कभी भी आपदा का रुप ले लेती है जिससे बड़े स्तर पर जान-माल की हानि होती है।       
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कार्यशाला का उद्घाटन जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा, विभागाध्यक्ष प्रो. डीएस मलिक ने किया। प्रो. डीएम मलिक ने अतिथियों को आभार प्रकट किया। संचालन डा. नितिन कांबोज ने किया। इस अवसर पर प्रो. विनोद कुमार शर्मा, प्रो. पीपी पाठक, डा. संगीता मदान, डा. संगीता विद्यालंकार, डा. गगन माटा, डा. विनोद कुमार, राकेश भूटियानी, सहायक कुलसचिव डा. पंकज कौशिक, प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र चौहान आदि मौजूद थे।      
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