{"_id":"5798f7b04f1c1b1a4f21e042","slug":"the-number-of-gravel-in-haridwar-shankar","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरिद्वार में जितने कंकर उतने शंकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरिद्वार में जितने कंकर उतने शंकर
hridwar uttrakhanda india
Updated Wed, 27 Jul 2016 11:34 PM IST
विज्ञापन
हरिद्वार में कांवड़ियों का सैलाब
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार। एक कहावत है कि हरिद्वार में जितने कंकर हैं, श्रावण के महीने में उतने शंकर बन जाते हैं। श्रावण में महीने में इन दिनों ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। धर्मनगरी में हर जगह भगवान रंगधारी कांवड़िये ही नजर आ रहे हैं और चारों तरफ बम-बम बोल ही सुनाई दे रहा है। हर तरफ शिव की महिमा गाई जा रही है।
विज्ञापन
धर्मनगरी अब पूरी तरह से शिवभक्ति में गोते लगा रही है। हाईवे से लेकर शहर की हर गलि शिवभक्तों से भर गई है। हरिद्वार में हर तरफ शिव का जयघोष और कांवड़ नजर आ रही हैं। लगता है मानों भोलेनाथ कण-कण में बस गए हों। एक कहावत है कि पर्व आने पर यहां के पत्थर और कंकर भी शिव भक्तों का स्थान ले लेते हैं। जिस दिन से पंचक हटे हैं भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही। आने वाले और लौटने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बुधवार को हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगातार कांवड़िए पहुंचते रहे। हरकी पैैड़ी जाने वालों की कतारें टूटने का नाम नहीं ले रही। लाखों कावंड़ियों ने गंगाजल भरकर वापसी की। गंगा के सभी घाट पूरी तरह से शिवभक्तों से भर गए हैं, कहीं भी तिल रखने की जगह नहीं बची है। मालवीय द्वीप से जल भरने वाले कांवड़ियों को सीधे गंगापार के रास्ते भेजा जा रहा है। सुभाष घाट से जहां कांवडियों को हरकी पैड़ी की ओर भेजा जा रहा है, आलम यह है कि सामान्य स्नान और कर्मकांड करने वालों को हरकी पैड़ी पर स्थान नहीं मिल रहा है। मायादेवी प्रांगण सहित नगर के सभी मैदान भर जाने पर अब कांवड़ बाजार प्रशासनिक भवन सीसीआर के क्षेत्र में भी फैल गया है।
विज्ञापन