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हत्यारे को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

Tue, 28 Jan 2020 11:40 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2020 11:40 PM IST
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The killer sentenced to life imprisonment
फसल बुवाई को लेकर कहासुनी के बाद रंजिशन हत्या करने और एससी एसटी एक्ट के मामले में सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश विवेक भारती शर्मा ने दोषी को आजीवन कारावास और 65 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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विशेष शासकीय अधिवक्ता धर्मेश कुमार ने बताया कि वादी जसवंत सिंह थाना खानपुर 4 अक्तूबर 2012 में अपने दामाद जयद्रथ की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उनका दामाद गांव हस्तमौली में रहकर खेती कर रहा था। चार दिन पहले उसकी बेटी उषा ने बताया था कि उसके पति जयद्रथ को बोबिंदर उर्फ बोबी का भाई संजय घर से बुलाकर ले गया। काफी तलाश करने के बाद भी वह घर नहीं लौटे। एक अक्तूबर 2012 की शाम को खानपुर में खेत से जयद्रथ की लाश मिली थी। पुलिस ने जांच में पाया कि हत्या से कुछ दिन पहले गन्ने की बुवाई को लेकर मृतक जयद्रथ वह बोबिन्दर उर्फ बोबी में कहासुनी हुई थी। इसी रंजिश को लेकर बोबिन्दर उर्फ बोबी ने अपने साले व एक अन्य के साथ मिल कर जयद्रथ की हत्या कर दी। पुलिस ने जांच के बाद बोबिन्दर उर्फ बोबी पुत्र पवन निवासी ग्राम आलमपुरा थाना खानपुर बोबी के साले पाल्ला और आकिल उर्फ वकील पुत्र बाबूराम निवासी डूबर थाना तीतरों जिला सहारनपुर उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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पुलिस जांच पाया गया कि हत्या की घटना के अगले दिन बोबिन्दर उर्फ बोबी ने अपने चाचा प्रीतम के साथ झगड़ा करते हुए जयद्रथ की हत्या करने की बात कबूली थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या करने, एससी एसटी एक्ट व साक्ष्य छिपाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए थे। मामले के विचाराधीन रहते पाल्ला की मौत हो गई थी जिस पर न्यायालय में उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों के साक्ष्यों पर गौर करने व बहस को सुनने के बाद हुए जिला सत्र न्यायाधीश विवेक भारती शर्मा ने बोबिन्दर उर्फ बॉर्बी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 65 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही दूसरे आरोपी अकील उर्फ वकील को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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