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छह वर्ष बाद हरिद्वार में हो रही अखाड़ा परिषद की बैठक
अमर उजाला ब्यूरे हरिद्वार
Updated Fri, 04 Nov 2016 10:07 PM IST
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हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक करीब छह वर्ष बाद सात नवंबर को होने जा रही है। इस बैठक में विचार के लिए अनेक ज्वलंत प्रश्न अखाड़ा परिषद के सामने हैं। दो वर्ष बाद प्रयाग में होने वाले अर्द्धकुंभ के बारे में अभी से ही योजना बनाई जाएगी।
अखाड़ा परिषद की बैठकें अनेक तीर्थों पर होती रही हैं, लेकिन वर्ष 2010 के बाद परिषद की बैठक हरिद्वार में नहीं हुई। बैठक में भाग लेने के लिए अखिल भारतीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि हरिद्वार पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि वृंदावन से हरिद्वार पहुंच गए। परिषद के अन्य सदस्य भी विभिन्न तीर्थों से आ रहे हैं। अखाड़ा परिषद के एजेंडे में यूं तो मुख्य रूप से वर्ष 2019 में होने वाला प्रयाग अर्द्धकुंभ है, किंतु कई विचारणीय प्रश्न परिषद के सामने हैं। इन प्रश्नों में देशभर में फैले उन फर्जी संतों का मुद्दा भी प्रमुख हो सकता है जो संत जगत को बदनाम कर रहे हैं। नासिक और उज्जैन के कुंभ मेलों में अखाड़ा परिषद ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अलबत्ता कोई सूची अभी तक जारी नहीं हो पाई है। अखाड़ा परिषद उन संतों को लेकर खासी नाराज है जो शंकराचार्य के पदों पर मनमानी कर रहे हैं। परिषद अध्यक्ष स्वयं कह चुके है कि शंकराचार्य पद केवल चार हैं। अन्य पदों के बारे में कोई शास्त्रीय विधान नहीं है।
संत जगत में अखाड़ा परिषद के निर्णयों का अहम स्थान है। यह प्रश्न कई बार भी उठाया गया है कि अखाड़े कुंभ मेलों के अवसर पर अनेक ऐसे संतों को महामंडलेश्वर बना देते हैं जो इस पद के योग्य नहीं हैं। कई चर्चित संतों को पद देने के बाद पद को वापस भी लेना पड़ा है। अखाड़ा परिषद का पूर्ण एजेंडा यद्यपि महामंत्री के आगमन के बाद ही पता चल पाएगा, किंतु इस बात के पूरे आसार है यह बैठक काफी गर्मागरम होने वाली है।
अखाड़ा परिषद की बैठकें अनेक तीर्थों पर होती रही हैं, लेकिन वर्ष 2010 के बाद परिषद की बैठक हरिद्वार में नहीं हुई। बैठक में भाग लेने के लिए अखिल भारतीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि हरिद्वार पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि वृंदावन से हरिद्वार पहुंच गए। परिषद के अन्य सदस्य भी विभिन्न तीर्थों से आ रहे हैं। अखाड़ा परिषद के एजेंडे में यूं तो मुख्य रूप से वर्ष 2019 में होने वाला प्रयाग अर्द्धकुंभ है, किंतु कई विचारणीय प्रश्न परिषद के सामने हैं। इन प्रश्नों में देशभर में फैले उन फर्जी संतों का मुद्दा भी प्रमुख हो सकता है जो संत जगत को बदनाम कर रहे हैं। नासिक और उज्जैन के कुंभ मेलों में अखाड़ा परिषद ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अलबत्ता कोई सूची अभी तक जारी नहीं हो पाई है। अखाड़ा परिषद उन संतों को लेकर खासी नाराज है जो शंकराचार्य के पदों पर मनमानी कर रहे हैं। परिषद अध्यक्ष स्वयं कह चुके है कि शंकराचार्य पद केवल चार हैं। अन्य पदों के बारे में कोई शास्त्रीय विधान नहीं है।
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संत जगत में अखाड़ा परिषद के निर्णयों का अहम स्थान है। यह प्रश्न कई बार भी उठाया गया है कि अखाड़े कुंभ मेलों के अवसर पर अनेक ऐसे संतों को महामंडलेश्वर बना देते हैं जो इस पद के योग्य नहीं हैं। कई चर्चित संतों को पद देने के बाद पद को वापस भी लेना पड़ा है। अखाड़ा परिषद का पूर्ण एजेंडा यद्यपि महामंत्री के आगमन के बाद ही पता चल पाएगा, किंतु इस बात के पूरे आसार है यह बैठक काफी गर्मागरम होने वाली है।
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