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देसंविवि में भारतीय संस्कृति के संवाहकों का सेमीनार प्रारंभ
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डॉ. प्रणव पंड्या
- फोटो : फाइल फोटो
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देव संस्कृति विश्वविद्यालय में भारतीय संस्कृति संवाहकों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार को शुरू हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि मनुष्य जीवन धरती को सुंदर बनाने के लिए ईश्वर ने भेजा है। लेकिन, वर्तमान में मनुष्य अपनी मूल बातों को भूलकर केवल भौतिक संसाधन इकट्ठा करने में जुटा है।
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देसंविवि के कुुलाधिपति डॉ. पंड्या ने कहा कि यह अभ्युदय का समय है। इस समय विश्व भारत की ओर आशाभरी दृष्टि देख रहा है। भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि अध्यात्म भारत की आत्मा है। भारत देश हजारों सालों से संस्कृति के संवाहक रूप में कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी कार्पोरेट कंपनियों में थिंक टैंक भारतीय ही हैं।
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इससे पूर्व स्वामी चिन्मयानंद मिशन के स्वामी मित्रानंद ने भी उद्बोधन दिया। कुलपति शरद पारधी ने स्वागत उद्बोधन दिया। कुलाधिपति डॉ. पंड्या ने अतिथियों को देसंविवि का प्रतीक चिह्न, युग साहित्य और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। सम्मेलन में देश-विदेश से वाहा से जुड़े प्रतिभागी, देसंविवि और शांतिकुंज परिवार शामिल हुए।
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