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गंगा जल बेचने पर भड़के संत
hridwar uttrakhanda india
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:10 AM IST
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हरिद्वार। गंगा के प्रति लोगों की श्रद्धा और आस्था को भुनाने के लिए अब केंद्र सरकार गंगा जल की बाकायदा बिक्री करने जा रही है। इससे पहले गंगा में स्टीमर और जहाज चलाने की घोषणा की गई थी। अब डाकघरों के माध्यम से देशभर में गंगा जल बेचने की तैयारी है। इसके बाद पतित पावनी गंगा पूरी तरह बाजारू बन जाएगी। केंद्र के इस फैसले पर धर्मनगरी के संतों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
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देश-विदेश के करोड़ों लोग हरिद्वार से गंगा जलभरकर अपने घरों में ले जाते हैं। करोड़ों कांवड़िए वर्ष में दो बार गंगा जल लेने आते हैं तो प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालु भी लौटते हुए अपने साथ गंगाजल ले जाना नहीं भूलते। इसके बावजूद केंद्र सरकार के संचार सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डाक विभाग के माध्यम से गंगाजल बेचने की योजना घोषित की है। संयोग यह कि यह गंगा जल हरिद्वार और ऋषिकेश में भरा जाएगा। डाक विभाग अब ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के माध्यम से ग्राहकों और कंपनियों के ऑर्डर पर गांव-गांव, शहर-शहर गंगा जल बेचेगा। योजना शुरू होते ही दर्जनों निजी कंपनियां व कोरियर कंपनियां गंगा जल बेचने के इस व्यावसायिक काम में उतर आएंगी।
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कोट
गंगा जन जन के विश्वास से जुड़ी हैं। गंगा को मातृ नदी का दर्जा प्राप्त है। यह धरती पर मानव-मात्र के उद्दार के लिए आई हैं। केंद्रीय मंत्री ने गंगा जल बेचने के नाम पर गंगा को बर्बाद करने की तैयारी कर ली है। दु:ख का विषय है कि प्रधानमंत्री खुद ऐसी घोषणाएं कर चुके हैं। विश्वास नहीं होता कि ये वही मोदी जी हैं, जो चुनाव लड़ते हुए गंगा के बुलावे पर बनारस आने की बात कर रहे थे। देश भर का तीर्थ-पुरोहित समाज इस नीति का विरोध करेगा।
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- गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा, अध्यक्ष गंगा सभा
कोट
गंगा जल कोई वस्तु नहीं कि सरकार उसे बाजार में बेचे। केंद्रीय मंत्री की घोषणा निरर्थक और बेेकार है। संत समाज गंगा को कभी बाजारू बनाने की इजाजत नहीं देगा। गंगा के तटों पर दो जगह कुंभ मेले भरते हैं और दर्जनों स्थानों पर धार्मिक कर्मकांड संपन्न होते हैं। गंगा के साथ देश-विदेश के लोग मां का संबंध रखते हैं। मां को बाजार में बोतलों में भर कर नहीं बेचा जा सकता।
श्रीमहंत हरि गिरी, राष्ट्रीय महामंत्री अखाड़ा परिषद।