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संत जगजीत सिंह से निर्मल अखाड़े से नहीं वास्ता: जसविंदर
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श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने कहा है कि खालसा पंथ की स्थापना सनातन धर्म की रक्षा के लिए हुई थी। लेकिन वर्तमान में कुछ लोग भगवा धारण कर सनातन धर्म को खंडित करने का कार्य कर रहे हैं।
कनखल स्थित अखाड़े में कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि संतों का कार्य समाज का मार्गदर्शन कर ज्ञान की प्रेरणा देना है। कुछ पारिवारिक लोग संत का चोला धारण कर समाज को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि संत जगजीत सिंह को निर्मल परंपराओं के विरुद्ध कार्य करने और अखाड़े विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते कुछ समय पूर्व निष्कासित कर दिया गया था। वह लगातार भूरी वाले गुट के साथ मिलकर अखाड़े की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि कोई भी आश्रम या अखाड़ा संत जगजीत सिंह से वास्ता रखता है तो उसका निर्मल अखाड़े से कोई संबंध नहीं होगा। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल का कोई भी संत उस कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा, जहां संत जगजीत सिंह अथवा भूरीवाले गुट का कोई भी संत मौजूद रहेगा। इस दौरान महंत हरदेव सिंह, महंत सतनाम सिंह, महंत परमिंदर सिंह, महंत सुखजीत सिंह, महंत अमनदीप सिंह, संत सुखप्रीत सिंह, महंत निर्भय सिंह आदि उपस्थित रहे। वहीं संत जगजीत सिंह का कहना है कि उनका अखाड़े से बहिष्कार कर दिया है, इसकी जानकारी नहीं है। अखाड़े ने ही पूर्व में शामिल किया था और अखाड़े ने ही गुट भी बनाए हैं।
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कनखल स्थित अखाड़े में कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि संतों का कार्य समाज का मार्गदर्शन कर ज्ञान की प्रेरणा देना है। कुछ पारिवारिक लोग संत का चोला धारण कर समाज को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि संत जगजीत सिंह को निर्मल परंपराओं के विरुद्ध कार्य करने और अखाड़े विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते कुछ समय पूर्व निष्कासित कर दिया गया था। वह लगातार भूरी वाले गुट के साथ मिलकर अखाड़े की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि कोई भी आश्रम या अखाड़ा संत जगजीत सिंह से वास्ता रखता है तो उसका निर्मल अखाड़े से कोई संबंध नहीं होगा। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल का कोई भी संत उस कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा, जहां संत जगजीत सिंह अथवा भूरीवाले गुट का कोई भी संत मौजूद रहेगा। इस दौरान महंत हरदेव सिंह, महंत सतनाम सिंह, महंत परमिंदर सिंह, महंत सुखजीत सिंह, महंत अमनदीप सिंह, संत सुखप्रीत सिंह, महंत निर्भय सिंह आदि उपस्थित रहे। वहीं संत जगजीत सिंह का कहना है कि उनका अखाड़े से बहिष्कार कर दिया है, इसकी जानकारी नहीं है। अखाड़े ने ही पूर्व में शामिल किया था और अखाड़े ने ही गुट भी बनाए हैं।
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