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संतों पर दाव लगाते रहे दल
कौशल सिखौला हरिद्वार
Updated Sun, 22 Jan 2017 09:34 PM IST
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हरिद्वार के संतों पर राजनीतिक दल चुनावों में दांव लगाते रहे हैं। संतों को राजनीति के क्षेत्र में आजमाना काफी काम भी आया है। हरिद्वार के संतों का रिश्ता समाज के साथ-साथ राजनीतिक लोगों से भी रहा है। संतों को टिकट देना पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है।
कांग्रेस ने राधा कृष्ण धाम के संत सतपाल ब्रह्मचारी को नकारकर जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी को प्रत्याशी बनाया है। इस पहले घीसापंथी संत आचार्य जगदीश मुनि को प्रत्याशी बनाकर विधानसभा में भेजा गया। हरिद्वार से निर्दलीय मैदान में उतरे महंत घनश्याम गिरि अकेले ऐसे विधायक रहे जो बिना किसी दल के सहारे विधानसभा पहुंच गए। उन्होंने एक-दूसरे संत तत्कालीन कैबिनेट मंत्री महंत शांति प्रपन्न शर्मा को पराजित किया था। हरिद्वार की संतों की तूती संसद में भी बोलती रही है। परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती चुनाव लड़कर न केवल संसद में पहुंचे बल्कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री भी बने। भगवान आश्रम के महामंडलेश्वर साक्षी महाराज भी संसद में पहुंचे। इसी तरह हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम के अधिष्ठाता सतपाल महाराज न केवल संसद गए बल्कि केंद्रीय रेल राज्यमंत्री पद की शोभा भी उन्होंने बढ़ाई। भाजपा ने एक बार जूना अखाड़े के स्वामी यतींद्रानंद सरस्वती को संसदीय चुनाव में उतारा था, लेकिन वे पराजित हो गए थे। स्वामी यतीश्वरानंद विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे।
हरिद्वार के संतों का दबदबा नगर पालिका परिषद में भी रहा। स्वामी वागीश्वरानंद और सतपाल ब्रह्मचारी पालिकाध्यक्ष रहे। महंत रामटहल दास और स्वामी शिव चैतन्य पुरी ने सदस्य के रुप में नगर पालिका के पद संभाले। शिव चैतन्य पुरी तो कई बार पालिका पहुंचे।
कांग्रेस ने राधा कृष्ण धाम के संत सतपाल ब्रह्मचारी को नकारकर जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी को प्रत्याशी बनाया है। इस पहले घीसापंथी संत आचार्य जगदीश मुनि को प्रत्याशी बनाकर विधानसभा में भेजा गया। हरिद्वार से निर्दलीय मैदान में उतरे महंत घनश्याम गिरि अकेले ऐसे विधायक रहे जो बिना किसी दल के सहारे विधानसभा पहुंच गए। उन्होंने एक-दूसरे संत तत्कालीन कैबिनेट मंत्री महंत शांति प्रपन्न शर्मा को पराजित किया था। हरिद्वार की संतों की तूती संसद में भी बोलती रही है। परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती चुनाव लड़कर न केवल संसद में पहुंचे बल्कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री भी बने। भगवान आश्रम के महामंडलेश्वर साक्षी महाराज भी संसद में पहुंचे। इसी तरह हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम के अधिष्ठाता सतपाल महाराज न केवल संसद गए बल्कि केंद्रीय रेल राज्यमंत्री पद की शोभा भी उन्होंने बढ़ाई। भाजपा ने एक बार जूना अखाड़े के स्वामी यतींद्रानंद सरस्वती को संसदीय चुनाव में उतारा था, लेकिन वे पराजित हो गए थे। स्वामी यतीश्वरानंद विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे।
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हरिद्वार के संतों का दबदबा नगर पालिका परिषद में भी रहा। स्वामी वागीश्वरानंद और सतपाल ब्रह्मचारी पालिकाध्यक्ष रहे। महंत रामटहल दास और स्वामी शिव चैतन्य पुरी ने सदस्य के रुप में नगर पालिका के पद संभाले। शिव चैतन्य पुरी तो कई बार पालिका पहुंचे।
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