फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Russo-Ukraine war looms large on pharma industries

रूस-यूक्रेन युद्ध से फार्मा इंड्रस्टीज पर मंडराया संकट

Tue, 01 Mar 2022 11:50 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:50 PM IST
विज्ञापन
Russo-Ukraine war looms large on pharma industries
रूस और यूक्रेन युद्ध का असर पूरी दुनिया के साथ भारत पर भी पड़ने लगा है। फार्मा इंडस्ट्रीज पर संकट मंडराने लगा है। दवा और कैप्सूल की पैकिंग के लिए यूक्रेन से ही एल्युमीनियम फॉइल आयात होता है। कच्चा माल चीन से आता है। भारत में बनने वाली दवाओं का रूस और यूक्रेन समेत कामनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (सीआईएस) सबसे बड़ा बाजार है। यूक्रेन से एल्युमीनियम फाइल का आयात बंद हो गया। चीन ने कच्चा माल महंगा कर दिया है। ऐसे में भारत से निर्यात होने वाली दवाओं की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। इससे फार्मा कंपनियों के आर्डर होल्ड और पेमेंट फंस गई है।
विज्ञापन

उत्तराखंड में 350 फार्मा कंपनियां हैं। हरिद्वार जिला फार्मा कंपनियों का हब है। हरिद्वार में 180 फार्मा इंड्रस्टीज हैं। ये रुड़की, भगवानपुर और हरिद्वार सिडकुल में स्थापित हैं। दवा उत्पादन की प्रमुख कंपनी एक्मस के जीएम राजकुमार का कहना है कि चीन ने भविष्य की चिंता को देखते हुए कच्चे माल की न केवल कीमत बढ़ा दी है बल्कि सप्लाई होल्ड कर दी है। इससे फार्मा कंपनियों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है। इसका असर आने वाले दिनों में दवाओं की कीमतों पर पड़ेगा।
विज्ञापन

एसोसिएशन आफ फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज सिडकुल अध्यक्ष अनिल शर्मा के मुताबिक युद्ध के बाद फार्मा इंड्रस्टीज पर चौतरफा मार पड़ी है। कच्चा माल 20 फीसदी तक महंगा हो गया है। पुराने आर्डर पर माल बनाकर देना मजबूरी है। अनिल शर्मा का कहना है कि कामनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स के लिए 70 फीसदी दवाएं भारत ही निर्यात करता है। अब वहां के लिए दवाओं का निर्यात बाधित है। आर्डर होल्ड हो गए हैं। रूस और यूक्रेन से पेमेंट फंस गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुंबई और हैदाराबाद में कच्चे माल की जमाखोरी
दवा और कैप्सूल की पैकिंग के लिए एल्युमीनियम फॉइल की कीमतों में 30 फीसदी तक इजाफा हो गया है। दवा बनाने वाले कच्चे माल की कीमतों में 20 फीसदी तक वृद्धि हुई है। एल्युमीनियम फॉइल 100 रुपये प्रति किलो वृद्धि के साथ 470 रुपये किलो पहुंच गई है। कच्चे माल के आयात के अलावा जमाखोरी है। भारत में दवाओं के कच्चे माल का आयात करने वाले सबसे बड़े और अधिक डीलर मुंबई, हैदराबाद में हैं। युद्ध शुरू होने के बाद डीलरों से कच्चा माल की जमाखोरी कर कृत्रिम संकट खड़ा कर दिया है। इससे महंगाई में तेजी आई है।
युद्ध का फार्मा कंपनियों पर प्रत्यक्ष असर पड़ा है। कच्चे माल का आयात और दवाओं का निर्यात बाधित हुआ है। कच्चा माल महंगा होने, आर्डर होल्ड और पेमेंट फंसने से फार्मा कंपनियों पर चौतरफा मार पड़ी है। आने वाले दिनों में मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं। - अनिल शर्मा, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज सिडकुल

हरिद्वार जिला फार्मा कंपनियों का हब है। कच्चा माल महंगा होने से उत्पादन पर असर पड़ेगा। हालांकि अभी दवाओं की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। युद्ध लंबा चला तो असर पड़ना निश्चित है। - अनीता भारत, जिला औषधि निरीक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed