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Haridwar News: परिवहन विभाग में टेंडर दिलाने का लालच देकर 7.15 लाख की ठगी
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- न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्सर ने दिए रिपोर्ट दर्ज कर जांच के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। उत्तराखंड परिवहन विभाग में सरकारी वाहनों में पेट्रोल-डीजल भरवाने का दस साल का टेंडर दिलाने के नाम पर पेट्रोल पंप संचालक और उसके बेटे से 7.15 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने परिवहन विभाग के नाम से फर्जी दस्तावेज दिखाकर सरकारी फीस के नाम पर रकम वसूली। न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्सर ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
महाराजपुर कलां निवासी सुखबीर सिंह गांव के प्रधान हैं। उनका निरंजनपुर में पारसनाथ फिलिंग स्टेशन नाम से पेट्रोल पंप है। न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र के अनुसार, नवंबर 2025 में कुछ लोग काले रंग की महिंद्रा बोलेरो से उनके पेट्रोल पंप पर पहुंचे थे। वाहन पर उत्तराखंड परिवहन विभाग की प्लेट लगी थी।
इन लोगों ने उनके बेटे अक्षय कुमार से डीजल भरवाया। इसके बाद अलग-अलग समय पर विभाग के नाम का इस्तेमाल कर पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने आते रहे। इससे पिता-पुत्र को उन पर विश्वास हो गया। आरोप है कि 15 जून 2026 को इन लोगों ने परिवहन विभाग में सरकारी वाहनों के लिए दस साल का टेंडर निकलने की बात कही और पांच अगस्त तक टेंडर दिलाने का भरोसा दिया।
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इसके लिए उन्होंने विभाग का दस्तावेज भी दिखाया। अपने लैपटॉप से ऑनलाइन आवेदन भरवाया और सरकारी फीस के नाम पर 25 जून को 6.67 लाख रुपये नकद तथा 29 जून को 48 हजार रुपये यूपीआई से जमा कराए। पांच अगस्त तक टेंडर नहीं मिलने पर पीड़ित ने जानकारी मांगी तो उन लोगों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
आरोप है कि उन्होंने दोबारा फोन करने पर जान से मारकर बिजनौर के जंगलों में गाड़ने की धमकी दी। बाद में जांच कराने पर टेंडर के दस्तावेज फर्जी निकले। पुलिस में कार्रवाई न होने के बाद नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत से मिले। इसके बाद उन्होंने पीड़ित के साथ अदालत में पहुंचकर प्रार्थना पत्र दायर कराया। न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्सर लव कुमार वर्मा की कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। उत्तराखंड परिवहन विभाग में सरकारी वाहनों में पेट्रोल-डीजल भरवाने का दस साल का टेंडर दिलाने के नाम पर पेट्रोल पंप संचालक और उसके बेटे से 7.15 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने परिवहन विभाग के नाम से फर्जी दस्तावेज दिखाकर सरकारी फीस के नाम पर रकम वसूली। न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्सर ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
महाराजपुर कलां निवासी सुखबीर सिंह गांव के प्रधान हैं। उनका निरंजनपुर में पारसनाथ फिलिंग स्टेशन नाम से पेट्रोल पंप है। न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र के अनुसार, नवंबर 2025 में कुछ लोग काले रंग की महिंद्रा बोलेरो से उनके पेट्रोल पंप पर पहुंचे थे। वाहन पर उत्तराखंड परिवहन विभाग की प्लेट लगी थी।
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इन लोगों ने उनके बेटे अक्षय कुमार से डीजल भरवाया। इसके बाद अलग-अलग समय पर विभाग के नाम का इस्तेमाल कर पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने आते रहे। इससे पिता-पुत्र को उन पर विश्वास हो गया। आरोप है कि 15 जून 2026 को इन लोगों ने परिवहन विभाग में सरकारी वाहनों के लिए दस साल का टेंडर निकलने की बात कही और पांच अगस्त तक टेंडर दिलाने का भरोसा दिया।
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इसके लिए उन्होंने विभाग का दस्तावेज भी दिखाया। अपने लैपटॉप से ऑनलाइन आवेदन भरवाया और सरकारी फीस के नाम पर 25 जून को 6.67 लाख रुपये नकद तथा 29 जून को 48 हजार रुपये यूपीआई से जमा कराए। पांच अगस्त तक टेंडर नहीं मिलने पर पीड़ित ने जानकारी मांगी तो उन लोगों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
आरोप है कि उन्होंने दोबारा फोन करने पर जान से मारकर बिजनौर के जंगलों में गाड़ने की धमकी दी। बाद में जांच कराने पर टेंडर के दस्तावेज फर्जी निकले। पुलिस में कार्रवाई न होने के बाद नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णकांत से मिले। इसके बाद उन्होंने पीड़ित के साथ अदालत में पहुंचकर प्रार्थना पत्र दायर कराया। न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्सर लव कुमार वर्मा की कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए।