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रूट न परमिट, बिना पंजीकरण दौड़ रहे जुगाड़ ई-रिक्शा
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धर्मनगरी की सड़कों पर स्कूटर-बाइक के इंजन से तैयार जुगाड़ लोडर के अलावा अब जुगाड़ ई-रिक्शा पर दौड़ने लगे हैं। इनका न पंजीकरण है और न ही रूट तय हैं। इनमें सफर जानलेवा हो सकता है। ज्वालापुर में कई मिस्त्री जुगाड़ ई-रिक्शा बनाकर बेच रहे हैं। कंपनियों की तुलना में आधी कीमत होने से इनकी बिक्री भी हो रही है। पुलिस और एआरटीओ इससे बेखबर हैं।
धर्मनगरी की सड़कों पर वर्ष 2016 में ई-रिक्शा चलने की शुरुआत हुई। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि छह साल के अंदर हाईवे से लेकर हर गली में ई-रिक्शा की भीड़ हो जाएगी। धर्मनगरी में जाम का सबसे बड़ा कारण भी ई-रिक्शा बन रहे हैं। कंपनियों के ई-रिक्शों के अलावा ज्वालापुर में जुगाड़ से ई-रिक्शा तैयार हो रहे हैं। बैटरी और फाइबर की बॉडी बनाकर इन्हें 60 से 65 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। इनका सवारी ढोने के अलावा व्यावसायिक इस्तेमाल भी हो रहा है। हालत यह है कि हर दिन नए ई-रिक्शा सड़क पर उतर रहे हैं।
धर्मनगरी में ई-रिक्शा की संख्या करीब 10 हजार बताई जा रही है। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक करीब सात हजार लोगों के पास ई-रिक्शा चलाने के लाइसेंस हैं। बाकी ई-रिक्शा जुगाड़ वाले हैं। जुगाड़ के ई-रिक्शा की बॉडी काफी हल्की रहती है। हल्की सी टक्कर लगने पर ये दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। पंजीकरण नहीं होने से इनका इंश्योरेंस भी नहीं होता है। दुर्घटना होने पर बीमा नहीं मिल सकता है।
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लोडर बने जुगाड़ के ई-रिक्शा
यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए बनाए जुगाड़ ई-रिक्शा का व्यावसायिक इस्तेमाल भी हो रहा है। एक ओर जहां इनके चालक मानकों को ताक पर रखकर सवारियां ढोते हैं, वहीं सब्जी से लेकर भारी सामान तक इन रिक्शाओं पर ढोया जाता है। अपने वजन से ज्यादा भार लेकर चलने के कारण कई बार ये हादसे का शिकार भी हो जाते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों की ओर से इन पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
नाबालिगों के हाथ में है स्टेयरिंग
धर्मनगरी के आउटर एरिया और छोटे मार्गों पर बड़ी संख्या में नाबालिग भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। कई बार इस कारण हादसे भी हो चुके हैं। इसके बाद भी ई-रिक्शा पर नकेल लगाने की दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है।
ई-रिक्शा का पूरा रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। सड़कों पर बिना पंजीकरण और निर्धारित लाइसेंस के ई-रिक्शा के संचालन पर अभियान चलाकर रोक लगाई जा रही है। लाइसेंस और पंजीकरण भी देखे जा रहे हैं। जुगाड़ के ई-रिक्शा सड़कों पर नहीं चलने दिए जाएंगे।
-रश्मि पंत, एआरटीओ, प्रवर्तन
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धर्मनगरी की सड़कों पर वर्ष 2016 में ई-रिक्शा चलने की शुरुआत हुई। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि छह साल के अंदर हाईवे से लेकर हर गली में ई-रिक्शा की भीड़ हो जाएगी। धर्मनगरी में जाम का सबसे बड़ा कारण भी ई-रिक्शा बन रहे हैं। कंपनियों के ई-रिक्शों के अलावा ज्वालापुर में जुगाड़ से ई-रिक्शा तैयार हो रहे हैं। बैटरी और फाइबर की बॉडी बनाकर इन्हें 60 से 65 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। इनका सवारी ढोने के अलावा व्यावसायिक इस्तेमाल भी हो रहा है। हालत यह है कि हर दिन नए ई-रिक्शा सड़क पर उतर रहे हैं।
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धर्मनगरी में ई-रिक्शा की संख्या करीब 10 हजार बताई जा रही है। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक करीब सात हजार लोगों के पास ई-रिक्शा चलाने के लाइसेंस हैं। बाकी ई-रिक्शा जुगाड़ वाले हैं। जुगाड़ के ई-रिक्शा की बॉडी काफी हल्की रहती है। हल्की सी टक्कर लगने पर ये दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। पंजीकरण नहीं होने से इनका इंश्योरेंस भी नहीं होता है। दुर्घटना होने पर बीमा नहीं मिल सकता है।
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लोडर बने जुगाड़ के ई-रिक्शा
यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए बनाए जुगाड़ ई-रिक्शा का व्यावसायिक इस्तेमाल भी हो रहा है। एक ओर जहां इनके चालक मानकों को ताक पर रखकर सवारियां ढोते हैं, वहीं सब्जी से लेकर भारी सामान तक इन रिक्शाओं पर ढोया जाता है। अपने वजन से ज्यादा भार लेकर चलने के कारण कई बार ये हादसे का शिकार भी हो जाते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों की ओर से इन पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
नाबालिगों के हाथ में है स्टेयरिंग
धर्मनगरी के आउटर एरिया और छोटे मार्गों पर बड़ी संख्या में नाबालिग भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। कई बार इस कारण हादसे भी हो चुके हैं। इसके बाद भी ई-रिक्शा पर नकेल लगाने की दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है।
ई-रिक्शा का पूरा रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। सड़कों पर बिना पंजीकरण और निर्धारित लाइसेंस के ई-रिक्शा के संचालन पर अभियान चलाकर रोक लगाई जा रही है। लाइसेंस और पंजीकरण भी देखे जा रहे हैं। जुगाड़ के ई-रिक्शा सड़कों पर नहीं चलने दिए जाएंगे।
-रश्मि पंत, एआरटीओ, प्रवर्तन