राष्ट्रपति शासन लगाने को बताया अलोकतांत्रिक
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हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उत्तराखंड में केंद्र सरकार की तरफ राष्ट्रपति शासन लगाने के कदम को अलोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए समय दिया था तो उस अवधि के बाद ही केंद्र को कोई निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन इस तरह से लिया गया निर्णय अलोकतांत्रिक व्यवस्था को दर्शाता है। उन्होंने देश में भारत माता की जय बोलने पर मचे विवाद पर कहा कि जितने भी धर्म संप्रदाय के लोग यहां की मातृभूमि में रहते है इसमें भारत माता की जय शामिल है, बोलने या न बोलने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
बुधवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कनखल स्थित मठ पहुंचे। इसके बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने प्रदेश में लगे राष्ट्रपति शासन की प्रक्रिया को गलत बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश में ध्रुवीकरण करना चाहते हैं। राजनीति कर मुस्लिमों से नफरत फैलाना चाहते हैं। इसके लिए तरह-तरह के विवादों पर तूल दे रहे हैं। उन्होंने कहा भारत माता की जय बोलने के खिलाफ फतवा जारी करना गलत है। उन्होंने कहा कि भारत माता की जय कहना हमारा जन्मसिद्घ अधिकार है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने अपने वादे के मुताबिक जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटानेे का वादा पूरा नहीं किया। कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। उन्होंने पठानकोट हमले को नरेंद्र मोदी की असफलता बताया। कहा कि प्रधानमंत्री को क्या जरूरत थी कि वह पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ की मां के पैर छूएं और वहां पर दावते उड़ाएं। इससे देश की कमजोरी साबित हुई है।
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शिक्षा में शामिल हों गीता, पुराण
हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम में गीता, महाभारत, वेद, पुराण शामिल होने चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान शिक्षा मिलेगी साथ ही अपने इतिहास की भी जानकारी होगी। उन्होंने कहा कि जब मदरसे में कुरान, मिश्नरी स्कूलों में बाइबिल पढ़ाई जाती है तो हिंदुओं के स्कूल में भेदभाव क्यों किया जा रहा है। कहा कि आज स्कूलों में रामचंद्र का चित्र नहीं लगाया जा सकता। कहा कि भारत सरकार के मंत्रालय को पाठ्यक्रमों में अपने ग्रंथों को शामिल करना चाहिए।
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अर्द्घकुंभ के स्नानों में शामिल होंगे
हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अर्द्धकुंभ के स्नानों में स्नान करेंगे, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और कौनसे स्नान पर्व पर स्नान करेंगे। कहा कि यह जानकारी समय-समय पर देते रहेंगे। वह नवरात्रों में पूजन यहीं पर पूरे करेंगे। बताया कि फिलहाल वह 23 अप्रैल तक यहीं पर रहेंगे।