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साबित हो चुका है शासनादेश का फर्जीवाड़ा: शिवानंद
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार।
Updated Tue, 18 Apr 2017 09:28 PM IST
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गंगा में खनन को लेकर जारी शासनादेश में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए परिवाद दर्ज कराने के बाद स्वामी शिवानंद ने मामले की सिलसिलेवार जानकारी दी। दस्तावेज दिखाते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि आरटीआई से शासनादेश पहले ही फर्जी साबित हो चुका है। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद के अचानक खनन के विरोध पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
मातृसदन में पत्रकार वार्ता कर स्वामी शिवानंद ने बताया कि दो जून 2015 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा अपनी टीम के साथ मातृसदन आए थे। वार्ता के बाद सहमति बनी थी कि रायवाला से अजीतपुर तक खनन पर रोक के संबंध में जारी नोटिफिकेशन का भोगपुर तक विस्तार किया जाए। जिसके बाद 18 मार्च को जीओ जारी कर रायवाला से भोगपुर तक सभी खनन पट्टे निरस्त कर खनन पर रोक लगा दी गई थी। आरोप लगाया कि इसके बाद तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने अपने चहेते डीएम और एसएसपी को जनपद में भेजकर जमकर खनन कराया।
वहीं 15 नवंबर को रायवाला से भोगपुर तक खनन खोलने का फर्जी शासनादेश भी जारी कर दिया गया। जबकि सूचना के अधिकार में जुटाई गई जानकारी में राजभवन ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें इस शासनादेश की जानकारी नहीं है। हरिद्वार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानंद पर हमला बोलते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि विधायक बताएं कि खनन का उनसे बड़ा पैरोकार कौन है। स्वामी याद करें कि खनन के लिए डामकोठी पर हंगामा कर उन्होंने जलस्तर कम कराया था। साथ ही स्वामी यतीश्वरानंद यह भी बताएं कि कितने खनन पट्टों और क्रशरों में उनकी हिस्सेदारी है।
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खनन माफिया के बीच जाकर मातृसदन के खिलाफ बयानबाजी भी विधायक करते रहे हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा इन सभी आरोपों के उनके पास बाकायदा प्रमाण हैं, चाहे तो विधायक देख सकते हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को खनन की याद इसलिए आई कि उन्होंने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र भेजा है। शिवानंद महाराज ने कहा कि स्वामी यतीश्वरानंद यदि वास्तव में खनन बंदी को लेकर गंभीर हैं तो प्रदेश में उनकी सरकार है, ऐसे में वह गंगा में खनन पूरी तरह बंद कराते हुए क्रशरों को पांच किलोमीटर दूर हटवाएं। साथ ही कुंभ क्षेत्र सीमा विस्तार में भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें।
ग्रामीण ने मजबूत किए विधायक पर आरोप
मातृसदन में पत्रकार वार्ता के दौरान क्षेत्र का एक ग्रामीण भी आ गया। इसी दौरान स्वामी शिवानंद विधायक स्वामी यतीश्वरानंद पर खनन पट्ओं और क्रशरों में हिस्सेदारी के आरोप लगा रहे थे। तब ग्रामीण भी पुरजोर तरीके से आरोपों को सही बताने लगा। इतना ही नहीं कैमरे के सामने उसने भोगपुर के एक क्रशर में स्वामी यतीश्वरानंद के अक्सर आने-जाने पर उनकी हिस्सेदारी के आरोप दोहराए और कहा कि वह इस बात को विधायक के सामने भी कह सकता है। वहीं स्वामी शिवानंद ने कहा कि हरीश रावत खनन के ज्यादा बड़े समर्थक हैं, इसलिए जनता ने उन्हें नकारकर स्वामी यतीश्वरानंद को चुना है। यदि हरीश रावत की जगह कोई और चुनाव लड़ रहा होता तो स्वामी यतीश्वरानंद कभी चुनाव न जीतते।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद का मैं पूरा सम्मान करता हूं। लेकिन अवैध खनन को संरक्षण देने या पैरोकारी करने जैसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। मैंने हमेशा अवैध खनन का विरोध किया है। सड़क से सदन तक अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई है। अभी भी अवैध खनन के पूरी तरह विरोध में हूं और मुख्यमंत्री से मिलकर इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जाएगी। मगर विकास कार्यों के लिए वैध खनन बेहद जरूरी है।
- स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक हरिद्वार ग्रामीण
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मातृसदन में पत्रकार वार्ता कर स्वामी शिवानंद ने बताया कि दो जून 2015 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा अपनी टीम के साथ मातृसदन आए थे। वार्ता के बाद सहमति बनी थी कि रायवाला से अजीतपुर तक खनन पर रोक के संबंध में जारी नोटिफिकेशन का भोगपुर तक विस्तार किया जाए। जिसके बाद 18 मार्च को जीओ जारी कर रायवाला से भोगपुर तक सभी खनन पट्टे निरस्त कर खनन पर रोक लगा दी गई थी। आरोप लगाया कि इसके बाद तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने अपने चहेते डीएम और एसएसपी को जनपद में भेजकर जमकर खनन कराया।
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वहीं 15 नवंबर को रायवाला से भोगपुर तक खनन खोलने का फर्जी शासनादेश भी जारी कर दिया गया। जबकि सूचना के अधिकार में जुटाई गई जानकारी में राजभवन ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें इस शासनादेश की जानकारी नहीं है। हरिद्वार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानंद पर हमला बोलते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि विधायक बताएं कि खनन का उनसे बड़ा पैरोकार कौन है। स्वामी याद करें कि खनन के लिए डामकोठी पर हंगामा कर उन्होंने जलस्तर कम कराया था। साथ ही स्वामी यतीश्वरानंद यह भी बताएं कि कितने खनन पट्टों और क्रशरों में उनकी हिस्सेदारी है।
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खनन माफिया के बीच जाकर मातृसदन के खिलाफ बयानबाजी भी विधायक करते रहे हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा इन सभी आरोपों के उनके पास बाकायदा प्रमाण हैं, चाहे तो विधायक देख सकते हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को खनन की याद इसलिए आई कि उन्होंने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र भेजा है। शिवानंद महाराज ने कहा कि स्वामी यतीश्वरानंद यदि वास्तव में खनन बंदी को लेकर गंभीर हैं तो प्रदेश में उनकी सरकार है, ऐसे में वह गंगा में खनन पूरी तरह बंद कराते हुए क्रशरों को पांच किलोमीटर दूर हटवाएं। साथ ही कुंभ क्षेत्र सीमा विस्तार में भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें।
ग्रामीण ने मजबूत किए विधायक पर आरोप
मातृसदन में पत्रकार वार्ता के दौरान क्षेत्र का एक ग्रामीण भी आ गया। इसी दौरान स्वामी शिवानंद विधायक स्वामी यतीश्वरानंद पर खनन पट्ओं और क्रशरों में हिस्सेदारी के आरोप लगा रहे थे। तब ग्रामीण भी पुरजोर तरीके से आरोपों को सही बताने लगा। इतना ही नहीं कैमरे के सामने उसने भोगपुर के एक क्रशर में स्वामी यतीश्वरानंद के अक्सर आने-जाने पर उनकी हिस्सेदारी के आरोप दोहराए और कहा कि वह इस बात को विधायक के सामने भी कह सकता है। वहीं स्वामी शिवानंद ने कहा कि हरीश रावत खनन के ज्यादा बड़े समर्थक हैं, इसलिए जनता ने उन्हें नकारकर स्वामी यतीश्वरानंद को चुना है। यदि हरीश रावत की जगह कोई और चुनाव लड़ रहा होता तो स्वामी यतीश्वरानंद कभी चुनाव न जीतते।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद का मैं पूरा सम्मान करता हूं। लेकिन अवैध खनन को संरक्षण देने या पैरोकारी करने जैसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। मैंने हमेशा अवैध खनन का विरोध किया है। सड़क से सदन तक अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई है। अभी भी अवैध खनन के पूरी तरह विरोध में हूं और मुख्यमंत्री से मिलकर इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जाएगी। मगर विकास कार्यों के लिए वैध खनन बेहद जरूरी है।
- स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक हरिद्वार ग्रामीण