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पीएम भाजपा छोड़ विकास के नाम चुनाव लड़ें
ब्यूरो अमर उजाला हरिद्वार
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:08 AM IST
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द्वारिका एवं ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा से इस्तीफा देकर विकास के नाम पर चुनाव जीतकर आने की चुनौती दी। उन्होंने चुनाव पूर्व किए गए वादों पर घेरते हुए प्रधानमंत्री से जनता के बीच में जाकर जवाब देने को कहा।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री को वादे याद दिलाए। कहा कि नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि भारत गोमांस का विश्व में सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है। इससे मेरा हृदय जल रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि गोमांस का निर्यात बंद होगा, लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे है उससे पता चलता है कि भाजपानीत सरकार राज्यों से गोमांस निर्यात सबसे अधिक हो रहा है और सब्सिडी भी दी जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी हतोत्साहित करने वाला बताया जिसमें कहा गया कि जो लोग गोरक्षा के नाम पर गोरखधंधा कर रहे है उनकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिन प्रदेशों में गोरक्षा संबंधी कानून लागू है, वहां से गायों को अन्य प्रदेशों में ले जाकर काटा जाता है। जो लोग उन्हें पकड़कर पुलिस को सौंपते हैं क्या ये गोरखधंधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा राम मंदिर, गंगा शुद्धिकरण, समान सिविल कोड, कश्मीर से धारा 370 हटाने जैसे मुद्दों पर सत्ता में आई। लोगों ने जो उम्मीद जताई थी वह दो साल में काफूर हो गई। शंकराचार्य ने मांग उठाई कि यदि मोदी ने विकास के नाम पर प्रधानमंत्री पद प्राप्त किया तो वे भाजपा से त्यागपत्र देकर फिर से विकास के नाम पर प्रधानमंत्री बनकर दिखाएं।
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कहा कि नरेंद्र मोदी कहते थे कि गाय कभी भी सीधे पॉलिथीन नहीं खाती, भूखे होने के कारण जूठन के साथ पाॅिलथीन भी खा लेती है। उन्होंने सवाल उठाया कि गोवंश के खाने के लिए क्या प्रबंध किए गए। कहा कि यदि कोई माता बच्चे को जन्म देने के बाद दूध नहीं पिला सकती तो गाय के दूध से बच्चे को पाला जा सकता है, चाहे बच्चा किसी भी समुदाय का हो। गाय मां के साथ पालक भी है। उन्होंने देश में दलितों के साथ हो रही घटना पर केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने दलितों के शोषण, आवाज उठाने पर हत्या करने पर प्रधानमंत्री को बयानबाजी के बजाय मामलों को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने दलितों को वोटबैंक न मानने की सलाह दी।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री को वादे याद दिलाए। कहा कि नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि भारत गोमांस का विश्व में सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है। इससे मेरा हृदय जल रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि गोमांस का निर्यात बंद होगा, लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे है उससे पता चलता है कि भाजपानीत सरकार राज्यों से गोमांस निर्यात सबसे अधिक हो रहा है और सब्सिडी भी दी जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी हतोत्साहित करने वाला बताया जिसमें कहा गया कि जो लोग गोरक्षा के नाम पर गोरखधंधा कर रहे है उनकी जांच होनी चाहिए।
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उन्होंने सवाल उठाया कि जिन प्रदेशों में गोरक्षा संबंधी कानून लागू है, वहां से गायों को अन्य प्रदेशों में ले जाकर काटा जाता है। जो लोग उन्हें पकड़कर पुलिस को सौंपते हैं क्या ये गोरखधंधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा राम मंदिर, गंगा शुद्धिकरण, समान सिविल कोड, कश्मीर से धारा 370 हटाने जैसे मुद्दों पर सत्ता में आई। लोगों ने जो उम्मीद जताई थी वह दो साल में काफूर हो गई। शंकराचार्य ने मांग उठाई कि यदि मोदी ने विकास के नाम पर प्रधानमंत्री पद प्राप्त किया तो वे भाजपा से त्यागपत्र देकर फिर से विकास के नाम पर प्रधानमंत्री बनकर दिखाएं।
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कहा कि नरेंद्र मोदी कहते थे कि गाय कभी भी सीधे पॉलिथीन नहीं खाती, भूखे होने के कारण जूठन के साथ पाॅिलथीन भी खा लेती है। उन्होंने सवाल उठाया कि गोवंश के खाने के लिए क्या प्रबंध किए गए। कहा कि यदि कोई माता बच्चे को जन्म देने के बाद दूध नहीं पिला सकती तो गाय के दूध से बच्चे को पाला जा सकता है, चाहे बच्चा किसी भी समुदाय का हो। गाय मां के साथ पालक भी है। उन्होंने देश में दलितों के साथ हो रही घटना पर केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने दलितों के शोषण, आवाज उठाने पर हत्या करने पर प्रधानमंत्री को बयानबाजी के बजाय मामलों को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने दलितों को वोटबैंक न मानने की सलाह दी।