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देवव्रत पहुंचे पतंजलि योगपीठ
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Mon, 10 Apr 2017 10:56 PM IST
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पतंजलि योगपीठ पहुंचकर योग गुरु स्वामी रामदेव तथा योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण से मुलाकात की। उन्होंने पतंजलि योगपीठ की ओर से संचालित किए जा रहे योग, आयुर्वेद, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वदेशी और गो अनुसंधान आदि कार्यों का भी अवलोकन किया। राज्यपाल ने कहा पतंजलि के अहर्निश पुरुषार्थ से भारत के योग और आयुर्वेद एवं प्राचीन ऋषियों की मौलिक विरासत के प्रति वैश्विक स्तर पर जन-जन तक पहुंच संभव हुई है।
राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि पतंजलि अभियान से न केवल देश के धर्म-आध्यात्म के प्रति समर्पित संतगण, अपितु देश के करोड़ों चिकित्सकों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, बच्चों तथा गरीबों, महंगी चिकित्सा के कारण उपचार से वंचित असंख्य लोगों तक को आशाएं बंधी है। उन्होंने पतंजलि के स्वदेशी मंत्र को समृद्ध भारत का महान मंत्र बताते हुए कहा इससे देश के लोगों में निज संसाध्नों के प्रति विश्वास बढ़ाने में मददगार सबित हो रहा है।
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उन्होंने उम्मीद जताई कि पतंजलि योगपीठ हिमाचल के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक गौरव को पुन:स्थापित कर इसे आर्थिक समृद्धि से जोड़ेगा। इस पर दोनों संतों ने वहां अनुसंधनात्मक कार्ययोजना तैयार कर हर संभव सहयोग का आश्वाशन दिया।
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स्वामी अच्युतानंद तीथ्र से भी लिया आशीर्वाद
हिमालच प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को भूमा निकेतन पहुंचकर शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज से आशीर्वाद लिया।
इस दौरान राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन में धर्मगुरुओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवभूमि हरिद्वार से बह रही योग आयुर्वेद एवं अध्यात्म की त्रिवेणी विश्व का कल्याण करेगी और सरकारी योजनाओं के संचालन में भी संतों के आशीर्वाद की आवश्यकता होती है तथा राज्य एवं केंद्र की सरकारों ने कई योजनाएं बनाई हैं जिनमें समाज के सभी वर्गों का सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने सभी संतों तथा उनके द्वारा संचालित सेवा प्रकल्पों की सराहना करते हुए कहा कि योग, आयुर्वेद एवं अध्यात्मक की त्रिवेणी निश्चित ही विश्व में भारत का नाम ऊंचा करेगी।
शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि मां गंगा भारत की भाग्यरेखा हैं जो 42 करोड़ जनता को अपना सानिध्य प्रदान कर कल्याण करती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गंगा सहित सभी नदियों का साठ प्रतिशत जल गंगा में ही रहे केवल चालीस प्रतिशत जल ही नहरों को दिया जाए। गंगाजल को बचाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि हरिद्वार में भी गंगा जल बिकने लगा है और नहरों के माध्यम से भी गंगा जल बेचा जा रहा है जिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए।