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भगवान भरोसे ऑक्सीजन प्लांट, मरीजों की सांसों पर संकट
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ऑक्सीजन प्लांट।
- फोटो : HARIDWAR
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कोरोनाकाल में सरकारी अस्पतालों में लगाए गए ऑक्सीजन प्लांटों को बचाए रखने का संकट खड़ा हो गया है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद करोड़ों रुपये के इन प्लांटों की सांसों पर संकट खड़ा हो गया है। पिछले पांच दिन से इन प्लांटों को चलाया नहीं जा रहा है। ऐसे में इनके खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मरीजों को ऑक्सीजन का संकट झेलना पड़ा था। ऑक्सीजन नहीं मिलने से कई मरीजों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग और सरकार को भी ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए सोचने को मजबूर कर दिया था। जिससे नए-नए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाने के लिए सामाजिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि आगे आए थे। मेला अस्पताल में मई 2021 में सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए 48 लाख 50 हजार रुपये सांसद निधि से जारी किए।
एक ऑक्सीजन प्लांट एक सामाजिक संस्था ने भी लगवाया था। जनवरी में मेला अस्पताल एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट शुरू कर दिया गया था। लालढांग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद की 65 लाख की निधि से 200 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) का जनरेशन प्लांट लगवाया था। रुड़की के संयुक्त चिकित्सालय और भगवानपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। ऑक्सीजन प्लांटों में अस्पतालों में भर्ती मरीजों के बेडों पर सीधे ऑक्सीजन सप्लाई किए जाने सुविधा दी गई है। इनमें सिलिंडर रिफिलिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। अब कोविड-19 के तहत रखे गए आउटसोर्स कर्मचारियों को एक अप्रैल से हटाए जाने से ऑक्सीजन प्लांटों को चलाने वाले टेक्नीशियन भी हटा दिए गए हैं। संवाद
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तीन दिन में चलाना जरूरी
ऑक्सीजन प्लांटों से टेक्नीशियन हटने से ये रख-रखाव के अभाव में दम तोड़ सकते हैं। टेक्नीशियन नितिन कुमार और रवि ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट को समय-समय पर नहीं चलाने से ऑक्सीजन की शुद्घता और प्रेशर की क्षमता डाउन पड़ जाती है। इसलिए तीन दिन में कुछ देर के लिए ऑक्सीजन प्लांट को चलाना जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर प्लांट से शुद्घ ऑक्सीन और प्रेशर बनाने के लिए लगभग तीन से चार घंटे शुरू में अधिक चलाना पड़ेेगा। ऐसे में यदि टेक्नीशियन जल्द नहीं रखे गए तो ऑक्सीन प्लांट दम तोड़ सकते हैं।
पहले दी ट्रेनिंग अब बैठा दिया खाली
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से युवाओं को रोजगार देने के लिए पहले ट्रेनिंग दी गई थी। इसमें ऑनलाइन 15 दिन और ऑफलाइन ऑक्सीजन प्लांटों में जाकर 18 दिन तक प्लांट चलाकर ऑक्सीजन तैयार करने की जानकारी दी गई। इसके बाद पेपर कराकर युवाओं को ऑक्सीजन प्लांटों में तैनाती दी गई थी। इतना सबकुछ करने के बाद युवाओं को अब घर बैठा दिया गया है। इनमें से कुछ टेक्नीशियन को सैलरी भी नहीं दी गई है।
शासन के आदेश पर टेक्नीशियनों को हटाया गया है। ऑक्सीजन प्लांट चलाने वाले टेक्नीशियन अब नहीं हैं। शासन से अब जो भी आदेेश आएंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. कुमार खगेंद्र सिंह, सीएमओ, हरिद्वार
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पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मरीजों को ऑक्सीजन का संकट झेलना पड़ा था। ऑक्सीजन नहीं मिलने से कई मरीजों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग और सरकार को भी ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए सोचने को मजबूर कर दिया था। जिससे नए-नए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाने के लिए सामाजिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि आगे आए थे। मेला अस्पताल में मई 2021 में सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए 48 लाख 50 हजार रुपये सांसद निधि से जारी किए।
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एक ऑक्सीजन प्लांट एक सामाजिक संस्था ने भी लगवाया था। जनवरी में मेला अस्पताल एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट शुरू कर दिया गया था। लालढांग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद की 65 लाख की निधि से 200 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) का जनरेशन प्लांट लगवाया था। रुड़की के संयुक्त चिकित्सालय और भगवानपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। ऑक्सीजन प्लांटों में अस्पतालों में भर्ती मरीजों के बेडों पर सीधे ऑक्सीजन सप्लाई किए जाने सुविधा दी गई है। इनमें सिलिंडर रिफिलिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। अब कोविड-19 के तहत रखे गए आउटसोर्स कर्मचारियों को एक अप्रैल से हटाए जाने से ऑक्सीजन प्लांटों को चलाने वाले टेक्नीशियन भी हटा दिए गए हैं। संवाद
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तीन दिन में चलाना जरूरी
ऑक्सीजन प्लांटों से टेक्नीशियन हटने से ये रख-रखाव के अभाव में दम तोड़ सकते हैं। टेक्नीशियन नितिन कुमार और रवि ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट को समय-समय पर नहीं चलाने से ऑक्सीजन की शुद्घता और प्रेशर की क्षमता डाउन पड़ जाती है। इसलिए तीन दिन में कुछ देर के लिए ऑक्सीजन प्लांट को चलाना जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर प्लांट से शुद्घ ऑक्सीन और प्रेशर बनाने के लिए लगभग तीन से चार घंटे शुरू में अधिक चलाना पड़ेेगा। ऐसे में यदि टेक्नीशियन जल्द नहीं रखे गए तो ऑक्सीन प्लांट दम तोड़ सकते हैं।
पहले दी ट्रेनिंग अब बैठा दिया खाली
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से युवाओं को रोजगार देने के लिए पहले ट्रेनिंग दी गई थी। इसमें ऑनलाइन 15 दिन और ऑफलाइन ऑक्सीजन प्लांटों में जाकर 18 दिन तक प्लांट चलाकर ऑक्सीजन तैयार करने की जानकारी दी गई। इसके बाद पेपर कराकर युवाओं को ऑक्सीजन प्लांटों में तैनाती दी गई थी। इतना सबकुछ करने के बाद युवाओं को अब घर बैठा दिया गया है। इनमें से कुछ टेक्नीशियन को सैलरी भी नहीं दी गई है।
शासन के आदेश पर टेक्नीशियनों को हटाया गया है। ऑक्सीजन प्लांट चलाने वाले टेक्नीशियन अब नहीं हैं। शासन से अब जो भी आदेेश आएंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. कुमार खगेंद्र सिंह, सीएमओ, हरिद्वार