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एक तिथि लुप्त, फिर भी पांच दिन दीपावली महापर्व
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दीपावली का पंचदिनी महापर्व इस बार संयोगों से भरा हुआ है। वर्ष का यह अकेला महापर्व जुड़ा तो पांच पर्वों से ही है, पर्व के दिन भी पांच हैं, लेकिन कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया के पांच दिनों के बीच से चतुर्दशी तिथि किसी भी दिन सूर्योदय काल में उपलब्ध न होने के कारण क्षय तिथि बन गई है। पांच पर्व और पांच दिन पूरे, किंतु एक तिथि लोप होने का यह संयोग बहुत अनूठा है।
वर्ष का यह अकेला पर्व जो लगातार पूरे पांच दिन चलता है। धनतेरस से भाई दूज के पांचों दिन त्योहार हैं। मंगलवार दो नवंबर को प्रदोष के दिन पूर्वाह्न 11.30 बजे त्रयोदशी का आगमन हो जाएगा। इस दिन धनतेरस मनाते हुए यम के निमित्त एक दीपक रात के समय घर के बाहर जलाया जाएगा। यह दीपक यमराज को समर्पित है ताकि वे परिवार पर कृपा बनाए रखें। धनतेरस पर बर्तन, सोने और चांदी की खरीदारी होती है। अगले दिन तीन नवंबर को नरक चतुर्दशी है। इस दिन पूरे घर की धुलाई सफाई की जाती है। रात में छोटी दीपावली मनाते हैं। देवों के लिए 10 दीपक जलाए जाते हैं।
धन्वंतरि जयंती और हनुमान जयंती भी इसी दिन है। यहीं चतुर्दशी को लेकर क्षय तिथि हो जाने का पेंच भी है।
पांच दिनी पर्व का मुख्य दिन दीपमालिका महालक्ष्मी पूजन, कार्तिक अमावस्या के दिन बृहस्पतिवार को है। इस रात्रि में लक्ष्मी पूजन के बाद देवताओं और पितरों के लिए 50-50 दीपक जलाने चाहिए। खील, बताशे और मिष्ठान का दान लक्ष्मी के सामने कर, बहन बेटियों को दिया जाता है। इसी दिन जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। जैन धर्मावलंबी दीपावली के दिन श्रद्धापूर्वक निर्वाण दिवस मनाते हैं। राम के वनवास से लौटने की खुशी में अयोध्या सहित पूरे देश में दीपोत्सव बृहस्पतिवार को ही मनाया जाएगा।
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श्रृंखला का चौथा पर्व अन्नकूट और गोवर्धन पूजा है। मथुरा वृंदावन से गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा यात्रा निकलती है। इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण अनुकृति बनाकर गोवर्धन और गोधन पूजा परिवार सहित की जाती है। भगवान कृष्ण को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर अन्नकूट श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। शनिवार छह नवंबर को पांच दिनी पर्व का अंतिम दिन भैयादूज या यमद्वितीया के रूप में मनाया जाता है। मृत्यु के देवता यमराज के मस्तक पर इसी दिन उनकी बहन यमी अथवा यमुना ने तिलककर मंगलकामना की थी। तभी से देशभर में बहनें अपने भाइयों के माथे तिलककर उनके लंबे सुखी जीवन की कामना करती हैं। इस प्रकार यह पंचदिनी पर्व लंबे महोत्सव के रूप में संपन्न हो जाते हैं।
चतुर्दशी का क्षय पर छोटी दीपावली तीन को ही
हरिद्वार। गंगा सभा पंचांग विद्वत परिषद के सदस्य पंडित अमित शास्त्री ने बताया कि पंचदिनी पर्व पांच दिन ही चलेंगे। बुधवार को चतुर्दशी सूर्योदय के बहुत बाद प्रात: 9.01 बजे लगेगी और बृहस्पतिवार को सवेरे 6.02 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी को दोनों दिन सूर्योदय न मिलने से तिथि क्षय हो गया है। अत: छोटी दीपावली, हनुमान जयंती, धन्वंतरि जयंती तिथि क्षय के बावजूद बुधवार को ही मनाई जाएंगी।
धन त्रयोदशी या धनतेरस दो नवंबर को
हरिद्वार। मंगलवार दो नवंबर को धन त्रयोदशी है। ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार इसी दिन शाम को यम के लिए अपने दरवाजे के बाहर मिट्टी या आटे का दीया जलाते हैं और मृत्यु के देवता यम को अर्पण करते हैं। दीपक जलाने से वर्ष भर घर में अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस बार भौम प्रदोष के दिन सूर्य के नक्षत्र में धन तेरस होगी। इस दिन स्त्री संज्ञा से युक्त धातु खरीदने का शुभ मुहूर्त होता है। चांदी, पीतल के बर्तन और मूर्ति आदि खरीदने से घर में लक्ष्मी आती हैं। सायंकाल यमदीपक जलाने का समय 6.31 से 7.20 के बीच उपयुक्त है।
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वर्ष का यह अकेला पर्व जो लगातार पूरे पांच दिन चलता है। धनतेरस से भाई दूज के पांचों दिन त्योहार हैं। मंगलवार दो नवंबर को प्रदोष के दिन पूर्वाह्न 11.30 बजे त्रयोदशी का आगमन हो जाएगा। इस दिन धनतेरस मनाते हुए यम के निमित्त एक दीपक रात के समय घर के बाहर जलाया जाएगा। यह दीपक यमराज को समर्पित है ताकि वे परिवार पर कृपा बनाए रखें। धनतेरस पर बर्तन, सोने और चांदी की खरीदारी होती है। अगले दिन तीन नवंबर को नरक चतुर्दशी है। इस दिन पूरे घर की धुलाई सफाई की जाती है। रात में छोटी दीपावली मनाते हैं। देवों के लिए 10 दीपक जलाए जाते हैं।
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धन्वंतरि जयंती और हनुमान जयंती भी इसी दिन है। यहीं चतुर्दशी को लेकर क्षय तिथि हो जाने का पेंच भी है।
पांच दिनी पर्व का मुख्य दिन दीपमालिका महालक्ष्मी पूजन, कार्तिक अमावस्या के दिन बृहस्पतिवार को है। इस रात्रि में लक्ष्मी पूजन के बाद देवताओं और पितरों के लिए 50-50 दीपक जलाने चाहिए। खील, बताशे और मिष्ठान का दान लक्ष्मी के सामने कर, बहन बेटियों को दिया जाता है। इसी दिन जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। जैन धर्मावलंबी दीपावली के दिन श्रद्धापूर्वक निर्वाण दिवस मनाते हैं। राम के वनवास से लौटने की खुशी में अयोध्या सहित पूरे देश में दीपोत्सव बृहस्पतिवार को ही मनाया जाएगा।
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श्रृंखला का चौथा पर्व अन्नकूट और गोवर्धन पूजा है। मथुरा वृंदावन से गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा यात्रा निकलती है। इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण अनुकृति बनाकर गोवर्धन और गोधन पूजा परिवार सहित की जाती है। भगवान कृष्ण को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर अन्नकूट श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। शनिवार छह नवंबर को पांच दिनी पर्व का अंतिम दिन भैयादूज या यमद्वितीया के रूप में मनाया जाता है। मृत्यु के देवता यमराज के मस्तक पर इसी दिन उनकी बहन यमी अथवा यमुना ने तिलककर मंगलकामना की थी। तभी से देशभर में बहनें अपने भाइयों के माथे तिलककर उनके लंबे सुखी जीवन की कामना करती हैं। इस प्रकार यह पंचदिनी पर्व लंबे महोत्सव के रूप में संपन्न हो जाते हैं।
चतुर्दशी का क्षय पर छोटी दीपावली तीन को ही
हरिद्वार। गंगा सभा पंचांग विद्वत परिषद के सदस्य पंडित अमित शास्त्री ने बताया कि पंचदिनी पर्व पांच दिन ही चलेंगे। बुधवार को चतुर्दशी सूर्योदय के बहुत बाद प्रात: 9.01 बजे लगेगी और बृहस्पतिवार को सवेरे 6.02 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी को दोनों दिन सूर्योदय न मिलने से तिथि क्षय हो गया है। अत: छोटी दीपावली, हनुमान जयंती, धन्वंतरि जयंती तिथि क्षय के बावजूद बुधवार को ही मनाई जाएंगी।
धन त्रयोदशी या धनतेरस दो नवंबर को
हरिद्वार। मंगलवार दो नवंबर को धन त्रयोदशी है। ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार इसी दिन शाम को यम के लिए अपने दरवाजे के बाहर मिट्टी या आटे का दीया जलाते हैं और मृत्यु के देवता यम को अर्पण करते हैं। दीपक जलाने से वर्ष भर घर में अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस बार भौम प्रदोष के दिन सूर्य के नक्षत्र में धन तेरस होगी। इस दिन स्त्री संज्ञा से युक्त धातु खरीदने का शुभ मुहूर्त होता है। चांदी, पीतल के बर्तन और मूर्ति आदि खरीदने से घर में लक्ष्मी आती हैं। सायंकाल यमदीपक जलाने का समय 6.31 से 7.20 के बीच उपयुक्त है।