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गंगा में सीवरेज गिरने पर अफसरों का जवाब तलब
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हरकी पैड़ी क्षेत्र में नमामि गंगे योजना से बिना प्रस्ताव के कार्य कराने और बरसात में गंगा में सीवर का पानी गिरने पर मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी समेत कई अफसरों से जवाब तलब किया है। सभी अधिकारियों को नोटिस जारी कर 16 नवंबर तक जवाब भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
नमामि गंगे योजना के तहत हरकी पैड़ी क्षेत्र में लगभग 32 करोड़ से सुभाषघाट और गऊ घाट आदि में क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। राष्ट्रीय सूचना अधिकार जागृति मिशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने दस सितंबर 2021 को मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर बताया था कि सुभाषघाट और गऊ घाट पर बिना प्रस्ताव के ही कार्य करा दिए गए हैं, जो नमामि गंगे योजना में भी शामिल नहीं हैं। यही नहीं ये निर्माण कार्य घटिया स्तर के भी कराए गए हैं। इस दौरान वर्ष 2010 में कुंभ मेला निधि से बनाए गए सीमेंट के पाइप और अन्य निर्माण कार्यों को भी बेवजह तोड़ दिया गया। जिससे पूरी बरसात में जलभराव होने से मंदिरों, तीर्थ-पुरोहितों की गद्दी के नीचे और आवासी कमरों में सीवर का पानी भरा रहा।
इसके अतिरिक्त सुभाषघाट के पास स्थित एक होटल के नीचे बालदेई बरसाती नाले से करीब तीन वर्षों से आंतरिक सफाई न होने के कारण सीवर मिश्रित पानी बरसात में गंगा में गिरता रहा। जिसकी शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिससे कारण लोगों के घरों में गंदगी भरने के साथ ही गंगा प्रदूषित होती रही।
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शिकायत का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार बिष्ट ने जिलाधिकारी, नगर आयुक्त हरिद्वार, महाप्रबंधक उत्तराखंड परियोजना विकास निर्माण निगम यमुना कॉलोनी देहरादून, कार्यदायी संस्था नमामि गंगे योजना, अनुरक्षण इकाई गंगा अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, पेयजल विभाग से मामले में जवाब तलब किया है।
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नमामि गंगे योजना के तहत हरकी पैड़ी क्षेत्र में लगभग 32 करोड़ से सुभाषघाट और गऊ घाट आदि में क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। राष्ट्रीय सूचना अधिकार जागृति मिशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने दस सितंबर 2021 को मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर बताया था कि सुभाषघाट और गऊ घाट पर बिना प्रस्ताव के ही कार्य करा दिए गए हैं, जो नमामि गंगे योजना में भी शामिल नहीं हैं। यही नहीं ये निर्माण कार्य घटिया स्तर के भी कराए गए हैं। इस दौरान वर्ष 2010 में कुंभ मेला निधि से बनाए गए सीमेंट के पाइप और अन्य निर्माण कार्यों को भी बेवजह तोड़ दिया गया। जिससे पूरी बरसात में जलभराव होने से मंदिरों, तीर्थ-पुरोहितों की गद्दी के नीचे और आवासी कमरों में सीवर का पानी भरा रहा।
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इसके अतिरिक्त सुभाषघाट के पास स्थित एक होटल के नीचे बालदेई बरसाती नाले से करीब तीन वर्षों से आंतरिक सफाई न होने के कारण सीवर मिश्रित पानी बरसात में गंगा में गिरता रहा। जिसकी शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिससे कारण लोगों के घरों में गंदगी भरने के साथ ही गंगा प्रदूषित होती रही।
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शिकायत का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार बिष्ट ने जिलाधिकारी, नगर आयुक्त हरिद्वार, महाप्रबंधक उत्तराखंड परियोजना विकास निर्माण निगम यमुना कॉलोनी देहरादून, कार्यदायी संस्था नमामि गंगे योजना, अनुरक्षण इकाई गंगा अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, पेयजल विभाग से मामले में जवाब तलब किया है।