दाखिल खारिज करने में तहसीलदार रिश्वत लेने का आरोप
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हरिद्वार। महाशक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट के फर्जी वसीयत प्रकरण में तहसीलदार दिनेश मोहन उनियाल पर एक दलाल के माध्यम से दो लाख की रिश्वत लेकर आरोपी पक्ष का नाम खसरा खतौनी में चढ़ा देने का आरोप लगा है। हरिद्वार पुलिस के हत्थे चढ़े एक आरोपी राधेश्याम ने यह खुलासा किया है। पुलिस की जांच के घेरे में अब तहसीलदार भी आ गए हैं। इधर तहसीलदार ने आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वसीयत के आधार पर नाम चढ़ाए गए हैं। आईजी गढ़वाल रेंज ने पुलिस टीम को प्रकरण का खुलासा करने पर दस हजार का इनाम देने की घोषणा की है।
शांतिकुंज के पास महाशक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट है। ट्रस्ट के मैनेजर विजय कुमार ने एसआईटी से शिकायत कर बताया था कि आश्रम की संस्थापक सुदेश बहन पुत्री जंगीमल निवासी कनखल ने वर्ष 2004 में ट्रस्ट की स्थापना की थी। 30 अक्तूबर वर्ष 2013 में उनकी मौत हो गई थी और मौत से पहले उन्होंने पांच रिश्तेदारों को ट्रस्ट में नामित किया था। आरोप था कि मिलानी गेट, झज्जर हरियाणा के रहने वाले राधेश्याम ने अपने समधी जयप्रकाश गर्ग निवासी हिसार के साथ मिलकर एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली थी और अपने नाम दाखिल खारिज भी करा लिया था।
जबकि 27 सितंबर 2013 को जब झज्जर हरियाणा में वसीयत कराई जानी बताई गई तब ट्रस्ट की अध्यक्ष सुमन बहन कनखल के एक अस्पताल में भर्ती थी। झज्जर में जहां का रहना उनका बताया गया था वह पता भी फर्जी निकला। ये सब आरोप एसटीआई की जांच में सही पाए गए। दो अप्रैल को पुलिस ने ट्रस्ट के मैनेजर की ओर से नगर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि मुख्य आरोपी राधेश्याम निवासी मिलानी गेट झज्जर हरियाणा को गिरफ्तार किया गया तो उसने पूछताछ में कबूला कि फर्जी वसीयत के आधार पर तहसीलदार दिनेश मोहन उनियाल ने दो लाख की रकम लेकर खसरा खतौनी में उनका नाम बतौर वारिस चढ़ा दिया था। ये डील एक दलाल रहमान ने कराई थी। तहसीलदार के खिलाफ भी जांच कर रहे है क्योंकि भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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बेच भी दी संपत्ति
हरिद्वार। करीब दस करोड़ की कीमत वाली संपत्ति पर कब्जे की कोशिश करने वाले राधेश्याम ने संपत्ति को झज्जर के ही राकेश पुत्र राजेंद्र को दो करोड़ दस लाख में बेच दी थी। बकायदा तीस लाख की रकम भी एडवांस ले ली थी। अब ये पक्ष आश्रम पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे और पूर्व में पुलिस ने सभी का शांतिभंग करने के आरोप में चालान भी किया था। वहीं जिलाधिकारी एचएस चुघ ने बताया कि अभी तक उनके संज्ञान में अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं लाया गया है।