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नम आंखों से दी शहीद को अंतिम विदाई
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
Updated Thu, 26 May 2016 12:39 AM IST
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अंिततिम िवविदाइऱ्ई
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार। मणिपुर में आतंकी हमले में शहीद हुए देहरादून के जाबांज महेश गुरुंग का बुधवार को कनखल के शमशान घाट पर सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही सेना के अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किए। सेना के जवानों ने 30 राउंड फायर कर उन्हें सलामी दी।
आसाम रायफल की 29वीं बटालियन के हवलदार बटालियन महेश गुरुंग रविवार को मणिपुर के चंदेल जिले में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। मंगलवार को उनकी पार्थिव देह सेना के विशेष विमान से जौलीग्रांट लाया गया था। बुधवार को सेना के वाहन से पार्थिव देह को कनखल स्थित शमशान लाया गया। यहां उनका सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया । प्रशासन की ओर से नगर मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह, एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर, सीओ सिटी प्रकाश देवली ने शव पर पुष्प चक्र अर्पित किए। उनके बड़े भाई और बेटे आयुष ने चिता को मुखाग्नि दी।
पिता को नहीं देख पाई लक्ष्मी
हरिद्वार। 13 साल बाद महेश घर में कन्या के रूप में लक्ष्मी आई, लेकिन उसके दुनिया में आने से पहले ही पिता चल बसे। महेश का लड़का आयुष 13 साल का है, जो कि सातवीं कक्षा में पढ़ता है। मोथरोवाला के ग्राम प्रधान नवीन क्षेत्री ने बताया कि दौड़वाला गांव के रहने वाले महेश शांत स्वभाव के थे, वे जब भी छुट्टी लेकर अपने घर आते थे, गांव में सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते थे। गांव के जवान लड़के भी उनके स्वाभाव के कायल थे। वे गांव में नौ जवानों को सेना में जाकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे।
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28 दिन पहले ड्यूटी पर गया था महेश
महेश गुरुंग के रिश्तेदार पुनीत थापा और भरत गुरुंग ने बताया कि वे 28 दिन पहले ही ड्यूटी पर गए थे। जून में पत्नी की डिलीवरी के समय घर आने की बात कहकर गए थे। उनके शहीद होने की सूचना के बाद उनकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया।
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आसाम रायफल की 29वीं बटालियन के हवलदार बटालियन महेश गुरुंग रविवार को मणिपुर के चंदेल जिले में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। मंगलवार को उनकी पार्थिव देह सेना के विशेष विमान से जौलीग्रांट लाया गया था। बुधवार को सेना के वाहन से पार्थिव देह को कनखल स्थित शमशान लाया गया। यहां उनका सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया । प्रशासन की ओर से नगर मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह, एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर, सीओ सिटी प्रकाश देवली ने शव पर पुष्प चक्र अर्पित किए। उनके बड़े भाई और बेटे आयुष ने चिता को मुखाग्नि दी।
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पिता को नहीं देख पाई लक्ष्मी
हरिद्वार। 13 साल बाद महेश घर में कन्या के रूप में लक्ष्मी आई, लेकिन उसके दुनिया में आने से पहले ही पिता चल बसे। महेश का लड़का आयुष 13 साल का है, जो कि सातवीं कक्षा में पढ़ता है। मोथरोवाला के ग्राम प्रधान नवीन क्षेत्री ने बताया कि दौड़वाला गांव के रहने वाले महेश शांत स्वभाव के थे, वे जब भी छुट्टी लेकर अपने घर आते थे, गांव में सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते थे। गांव के जवान लड़के भी उनके स्वाभाव के कायल थे। वे गांव में नौ जवानों को सेना में जाकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे।
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28 दिन पहले ड्यूटी पर गया था महेश
महेश गुरुंग के रिश्तेदार पुनीत थापा और भरत गुरुंग ने बताया कि वे 28 दिन पहले ही ड्यूटी पर गए थे। जून में पत्नी की डिलीवरी के समय घर आने की बात कहकर गए थे। उनके शहीद होने की सूचना के बाद उनकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया।