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दर्जाधारी के बेटे और नगर आयुक्त में नोकझोंक
hridwar uttrakhanda india
Updated Wed, 21 Sep 2016 12:01 AM IST
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सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष किरणपाल वाल्मीकि के बेटे रवि बहादुर और नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी के बीच गोलकोठी पर नोकझोंक हो गई। आवास पर तैनात कर्मचारियों ने बीच बचाव कर मामला शांत कराया। जिसके बाद कर्मचारियों का एक गुट नगर आयुक्त के समर्थन में आ गया और दफ्तरों पर तालाबंदी कर दर्जाधारी के पुत्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं दर्जाधारी पक्ष के एक युवक की ओर से नगर आयुक्त और उनके पति पर अभद्रता व जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है।
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नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी का हरिद्वार नगर निगम परिसर स्थित गोलकोठी में आवास है। मंगलवार की दोपहर सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष किरणपाल वाल्मीकि के पुत्र रवि बहादुर एक रिटायर्ड महिला सफाई कर्मी के पोते जॉनी को साथ लेकर नगर आयुक्त के आवास पर पहुंचे। इसी बीच रवि बहादुर और नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी के बीच कहासुनी हो गई। हंगामा होने पर कर्मचारियों ने रवि बहादुर आदि को शांत कराकर बाहर भेजा। घटना की जानकारी कर्मचारियों को लगने पर उन्होंने दर्जाधारी के पुत्र पर नगर आयुक्त से अभद्रता का आरोप लगाते हुए दफ्तर बंद कर दिए। हालांकि कुछ देर बाद ही नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी दफ्तरों में पहुंची और यह कहकर सभी कार्यालय खुलवाए कि घटना लंच टाइम में उनके आवास पर हुई है, इसका दफ्तरों से कोई मतलब नहीं है।
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वहीं दूसरी तरफ दर्जाधारी पक्ष के जॉनी की तरफ से एक तहरीर नगर कोतवाली में दी गई। जिसमें बताया कि वह अपनी दादी स्व. बुगली देवी के फंड की जानकारी लेने नगर आयुक्त के पास गए थे। आरोप लगाया कि नगर आयुक्त और उनके पति ने अभद्रता करते हुए जातिसूचक शब्द भी कहे।
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साझा मंच ने की कार्रवाई की मांग
हरिद्वार। म्युनिसपल बोर्ड कर्मचारी यूनियन, राष्ट्रीय सफाई मजदूर कांग्रेस और उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ को मिलकर बने साझा मंच से जुड़े कर्मचारियों ने बैठक की और दर्जाधारी के पुत्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बैठक को संबोधित करते हुए मुरली मनोहर ने कहा कि नगर आयुक्त हमेशा कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। उनके साथ अभद्रता करना निंदनीय है। राजेंद्र चुटैला, नरेश चनयाना ने आरोप लगाया कि कुछ लोग दबाव बनाकर गलत काम करवाना चाहते हैं। बैठक में लक्ष्मीचंद, सुबोध शर्मा, राजेंद्र, अशोक गुप्ता, पवन राणा, अशोक मामा, राजेंद्र घाघट, प्रमोद, सुभाष, नीरज बागड़ी, रविंद्र राठौर, सलेकचंद, नवीन अरोड़ा, पार्षद अमन गर्ग, सचिन बेनीवाल आदि ने घटना की निंदा की।
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मेरे बेटे को दफ्तर से निकाला : किरणपाल
नगर आयुक्त से अभद्रता के आरोप पर सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष किरणपाल वाल्मीकि ने अपने बेटे का बचाव करते हुए उल्टे नगर आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मैं दोपहर के समय घर पर नहीं था। एक कर्मचारी की समस्या लेकर बेटा रवि बहादुर नगर आयुक्त से मिलने गया था। नगर आयुक्त ने उनकी बात सुनने से पहले ही दफ्तर से बाहर निकाल दिया। रवि के साथ गए जॉनी के साथ धक्का मुक्की गई। आरोप लगाया कि नगर आयुक्त कर्मचारियों की समस्या पर गंभीर नहीं है, किसी का फोन भी नहीं उठाती।
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नगर आयुक्त ने पूछा, लंच टाइम में क्यों आए
नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी ने बताया कि दोपहर के समय कुछ लोग लंच टाइम में उनके आवास पर मिलने आए थे। उनके द्वारा अपना कार्ड अंदर भिजवाने पर तीन बजे मिलने को कहा गया था। मगर जब मैं किसी काम से बाहर आई तो वह बरामदे में खड़े हुए थे और मुझे देखकर उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। उन्हें यदि कोई काम था तो आफिस टाइम में दफ्तर में आकर मिल सकते थे। सारे आरोप गलत है, उन्हें यह बताना चाहिए कि किसी महिला अधिकारी के घर में लंच टाइम में बिना अनुमति घुसने और हंगामा करने का क्या औचित्य है।
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फिर कांग्रेसी आमने सामने
हरिद्वार। पिछले दिनों एसएमजेएन पीजी कालेज में छात्र संघ चुनाव के दौरान एनएसयूआई की हार और एसआरजी की जीत पर कांग्रेस के ही दो गुट आमने सामने आ गए थे। नगर निगम में नगर आयुक्त और दर्जाधारी के बेटे के बीच नोकझोंक के मामले में भी ठीक वैसी ही स्थिति बन रही है। किरणपाल वाल्मीकि को चूंकि प्रदेश सरकार में दर्जाधारी मंत्री का दर्जा मिला हुआ है, लिहाजा कांग्रेस के कई नेता व नामित पार्षद उनके पक्ष में खड़े हैं। जबकि म्युनिसपल कर्मचारी यूनियन चलाने वाले मुरली मनोहर पूर्व विधायक अम्बरीष कुमार के संगी साथी है। मुरली के नेतृत्व में नगर आयुक्त का समर्थन कर मंत्री पुत्र के खिलाफ आवाज उठाने वाला पक्ष भी कांग्रेसी हैं। घटना में कर्मचारियों के साथ साथ कांग्रेसी नेता भी दो अलग अलग धड़ों में बंट गए हैं।