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मोदी, माया और राहुल का ‘मैजिक’ भी दांव पर
मेहताब आलम हरिद्वार।
Updated Wed, 15 Feb 2017 10:09 PM IST
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जनपद की 11 सीटों के चुनाव में प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य ही नहीं, बल्कि मोदी, माया और राहुल का मैजिक भी दांव पर है। प्रचार के अंतिम दिनों में तीनों ही दिग्गजों ने जिले में जनसभाएं और रोड शो कर मतदाताओं की भारी भीड़ जुटाई। मतदाताओं पर किस दिग्गज का कितना जादू चला यह तो 11 मार्च को पता चल पाएगा। अलबत्ता अधिकांश सीटों पर कांग्रेस, भाजपा और बसपा के बीच कांटे का मुकाबला दिग्गजों की रैलियों का ही परिणाम माना जा रहा है।
प्रदेश में 10 कांग्रेस विधायकों की बगावत और सियासी उठापटक के बाद बैकफुट पर आई भाजपा चुनाव को लेकर शुरूआत से ही आक्रामक रही। रणनीति के तहत चुनाव से कई महीने पहले से ही जिले में केंद्रीय मंत्रियों की आवाजाही बनी रही। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ताबड़तोड़ दौरों से जिले का सियासी माहौल गर्म किए रखा। बहरहाल चुनाव प्रचार पर नजर डाली जाए तो भाजपा ने पहले हफ्ते में ही दिग्गजों को जिले में जुटाकर प्रचार में बढ़त बनाने का प्रयास किया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान की जनसभाओं के बाद 10 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिद्वार में जनसभा की। बाद में हेमा मालिनी व स्मृति ईरानी को बुलाकर स्टार का तड़का भी लगाया गया। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने नौ फरवरी को लक्सर में जनसभा को संबोधित किया। कांग्रेस की तरफ से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, सलमान खुर्शीद, असलम खान जैसे चेहरों के बाद प्रचार बंद होने से एक दिन पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का रोड शो कराया गया।
भीड़ के नजरिये से देखा जाए तो तीनों ही नेताओं के कार्यक्रम हिट रहे। मगर लोगों की यह भीड़ वोटों में कितनी तब्दील हो पाई, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा। इसके साथ ही यह भी तभी पता चलेगा कि किस दिग्गज का कितना जादू वोटरों पर मतदान तक बरकरार रह पाया है। इस लिहाज से मोदी, माया और राहुल का मैजिक दांव पर लगा है।
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सीएम और निशंक की प्रतिष्ठा का सवाल
जिले का चुनाव मुख्यमंत्री हरीश रावत और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। वहीं कांग्रेस से दल बदल कर भाजपा से चुनाव लड़ने वाले प्रदीप बत्रा और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का सियासी भविष्य भी दांव पर लगा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके साथ ही बाकी सीटों पर भी चुनाव हरीश रावत के चेहरे पर लड़ा गया। चिर परिचित प्रतिद्वंदी के तौर पर सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने हरिद्वार ग्रामीण सीट पर स्वामी यतीश्वरानंद के चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाया। निशंक ने स्वामी के चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने के साथ ही मतदान के दिन भी पोलिंग बूथों पर पहुंचकर इसे साबित किया।
भाजपा का नेतृत्व और पीके का मैनेजमेंट
भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व में दिग्गजों को मैदान में उतारकर अपने प्रत्याशियों का चुनाव मजबूत किया। वहीं जबकि कांग्रेस में चुनाव मुख्यमंत्री हरीश रावत और पीके का मैनेजमेंट पर आधारित रहा। शुरूआत में पीके का मैनेजमेंट नजर नहीं आया पर बाद में हाइटेक तरीकों से चुनाव प्रचार को गति दी गई। राहुल गांधी की जनसभा ऐनवक्त पर रद्द कर पीएम मोदी की जनसभा के बाद रोड शो कराना भी पीके की रणनीति का हिस्सा रहा।
प्रदेश में 10 कांग्रेस विधायकों की बगावत और सियासी उठापटक के बाद बैकफुट पर आई भाजपा चुनाव को लेकर शुरूआत से ही आक्रामक रही। रणनीति के तहत चुनाव से कई महीने पहले से ही जिले में केंद्रीय मंत्रियों की आवाजाही बनी रही। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ताबड़तोड़ दौरों से जिले का सियासी माहौल गर्म किए रखा। बहरहाल चुनाव प्रचार पर नजर डाली जाए तो भाजपा ने पहले हफ्ते में ही दिग्गजों को जिले में जुटाकर प्रचार में बढ़त बनाने का प्रयास किया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान की जनसभाओं के बाद 10 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिद्वार में जनसभा की। बाद में हेमा मालिनी व स्मृति ईरानी को बुलाकर स्टार का तड़का भी लगाया गया। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने नौ फरवरी को लक्सर में जनसभा को संबोधित किया। कांग्रेस की तरफ से हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, सलमान खुर्शीद, असलम खान जैसे चेहरों के बाद प्रचार बंद होने से एक दिन पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का रोड शो कराया गया।
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भीड़ के नजरिये से देखा जाए तो तीनों ही नेताओं के कार्यक्रम हिट रहे। मगर लोगों की यह भीड़ वोटों में कितनी तब्दील हो पाई, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा। इसके साथ ही यह भी तभी पता चलेगा कि किस दिग्गज का कितना जादू वोटरों पर मतदान तक बरकरार रह पाया है। इस लिहाज से मोदी, माया और राहुल का मैजिक दांव पर लगा है।
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सीएम और निशंक की प्रतिष्ठा का सवाल
जिले का चुनाव मुख्यमंत्री हरीश रावत और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। वहीं कांग्रेस से दल बदल कर भाजपा से चुनाव लड़ने वाले प्रदीप बत्रा और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का सियासी भविष्य भी दांव पर लगा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके साथ ही बाकी सीटों पर भी चुनाव हरीश रावत के चेहरे पर लड़ा गया। चिर परिचित प्रतिद्वंदी के तौर पर सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने हरिद्वार ग्रामीण सीट पर स्वामी यतीश्वरानंद के चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाया। निशंक ने स्वामी के चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने के साथ ही मतदान के दिन भी पोलिंग बूथों पर पहुंचकर इसे साबित किया।
भाजपा का नेतृत्व और पीके का मैनेजमेंट
भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व में दिग्गजों को मैदान में उतारकर अपने प्रत्याशियों का चुनाव मजबूत किया। वहीं जबकि कांग्रेस में चुनाव मुख्यमंत्री हरीश रावत और पीके का मैनेजमेंट पर आधारित रहा। शुरूआत में पीके का मैनेजमेंट नजर नहीं आया पर बाद में हाइटेक तरीकों से चुनाव प्रचार को गति दी गई। राहुल गांधी की जनसभा ऐनवक्त पर रद्द कर पीएम मोदी की जनसभा के बाद रोड शो कराना भी पीके की रणनीति का हिस्सा रहा।