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कोविड पाबंदियां हटी, शुरू नहीं हुआ मिड-डे मील
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कोरोना संक्रमण से राहत मिलने के बाद नाइट कर्फ्यू से लेकर कई पाबंदियां हटा ली गई हैं। इसके बाद भी अभी तक स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था शुरू नहीं की गई है। माना जा रहा है कि बच्चों की कम उपस्थित का कारण भी मिड-डे-मील की व्यवस्था नहीं होना है।
सरकार की ओर से सरकारी, गैर सरकारी, अशासकीय समेत मान्य प्राप्त विद्यालयों विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन कराया जाता है। कोरोना संक्रमण के कारण ढाई साल से मिड-डे-मील बनाने का काम बंद पड़ा हुआ था। बच्चों को चावल मुहैया कराने के साथ ही कुकिंग कास्ट के लिए नकद भुगतान किया जा रहा था। लेकिन पिछले साल कोरोना संक्रमण के केस कम होने पर नवंबर से मिड-डे मील स्कूलों में बनाना शुरू कर दिया गया था।
दिसंबर तक खुले स्कूलों में मिड-डे मील बन रहा था। एक जनवरी से 16 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश और बाद में फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर स्कूलों को बंद कर दिया गया था। कोरोना केस घटने से पहले 31 जनवरी से दस और 12 के स्कूलों को ऑफलाइन शिक्षण के लिए खोला गया था। उसके बाद सात जनवरी से कक्षा एक तक के स्कूलों को भी शिक्षण कार्य के लिए शुरू कर दिया गया था। मगर स्कूलों में मिड-डे मील के साथ ही स्कूलों में लंच लाने पर पाबंदी लगा दी गई थीं। जिससे स्कूलों में न तो मिड-डे मील बन पा रहा है और न ही बच्चे लंच ला पा रहे हैं।
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शासन की ओर से अभी तक स्कूलों में मिड-डे मील शुरू करने के लिए आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके कारण बच्चों को भोजन नहीं दिया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही अन्य पाबंदियों में दी गई ढील के साथ ही मिड-डे मील बनाने में भी छूट दे दी जाएगी।
- एसपी सेमवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार
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सरकार की ओर से सरकारी, गैर सरकारी, अशासकीय समेत मान्य प्राप्त विद्यालयों विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन कराया जाता है। कोरोना संक्रमण के कारण ढाई साल से मिड-डे-मील बनाने का काम बंद पड़ा हुआ था। बच्चों को चावल मुहैया कराने के साथ ही कुकिंग कास्ट के लिए नकद भुगतान किया जा रहा था। लेकिन पिछले साल कोरोना संक्रमण के केस कम होने पर नवंबर से मिड-डे मील स्कूलों में बनाना शुरू कर दिया गया था।
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दिसंबर तक खुले स्कूलों में मिड-डे मील बन रहा था। एक जनवरी से 16 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश और बाद में फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर स्कूलों को बंद कर दिया गया था। कोरोना केस घटने से पहले 31 जनवरी से दस और 12 के स्कूलों को ऑफलाइन शिक्षण के लिए खोला गया था। उसके बाद सात जनवरी से कक्षा एक तक के स्कूलों को भी शिक्षण कार्य के लिए शुरू कर दिया गया था। मगर स्कूलों में मिड-डे मील के साथ ही स्कूलों में लंच लाने पर पाबंदी लगा दी गई थीं। जिससे स्कूलों में न तो मिड-डे मील बन पा रहा है और न ही बच्चे लंच ला पा रहे हैं।
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शासन की ओर से अभी तक स्कूलों में मिड-डे मील शुरू करने के लिए आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके कारण बच्चों को भोजन नहीं दिया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही अन्य पाबंदियों में दी गई ढील के साथ ही मिड-डे मील बनाने में भी छूट दे दी जाएगी।
- एसपी सेमवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार