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पारा चढ़ने से समय से पहले पकने लगी गेहूं की फसल

Tue, 22 Mar 2022 11:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 22 Mar 2022 11:27 PM IST
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Mercury rises, wheat crop starts ripening before time
मौसम में बदलाव के चलते चैत्र के महीने में ही बैसाख जैसी गर्मी पड़ने लगी है। तापमान बढ़ने और गर्म हवा चलने से गेहूं की फसल जल्दी पक रही है। इससे गुणवत्ता कम होगी और उत्पादन भी प्रभावित होगा। जिले में 45 हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं की फसल होती है इस कारण किसानों को चिंता सताने लगी है।
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मार्च माह में ही इस बार जिले में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। आमतौर पर इतना तापमान अप्रैल के पहले व दूसरे सप्ताह में होता है। मौसम की इस मार से गेहूं की वह फसल समय से पहले पक रही है जिसकी बुआई 20 नवंबर या उसके बाद हुई है। तापमान सामान्य रहने पर यह फसल 15 अप्रैल तक पककर तैयार होती जो अभी से पकने लगी है और मार्च महीने के अंत तक इस फसल को काटना ही पड़ेगा नहीं तो बालियों से दाने झड़ने लगेंगे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मार्च महीने का यह सीजन गेहूं के दानों के विकसित होने का होता है, समय से पहले फसल पकने से दाना छोटा रह जाएगा, जिस कारण अनाज की पैदावार 10 से 15 फीसदी तक कम हो जाएगी।
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यहां एक बीघा में गेहूं की पैदावार जहां 10 क्विंटल होना आम बात है। उन्हीं खेतों में अब साढ़े आठ क्विंटल तक गेहूं की पैदावार होगी। इतना ही नहीं गेहूं के दाने की चमक भी फीकी रहेगी जिससे समर्थन मूल्य पर इस गेहूं का बिकना मुश्किल हो जाएगा एवं बाजार में भी अच्छे भाव मिलना आसान नहीं होगा। जिले में इस साल 45 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल हुई है। इसमें से 20 हजार हेक्टेयर से ज्यादा गेहूं की बुआई 20 नवंबर के बाद हुई है। ऐसे में ये गर्मी नुकसान पहुंचाएगी।
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सिंचाई से भी हो रहा नुकसान
इन दिनों गेहूं की फसल को अंतिम पानी देने का सीजन चल रहा है जो पैदावार के लिए बेहद फायदेमंद होता है लेकिन मौसम की मार से यह अंतिम सिंचाई फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। गढ़मीपुर गांव के किसान राजेंद्र सिंह का कहना है कि दिन में तेज धूप, गर्म हवा और तापमान के कारण जमीन गर्म हो रही है। इस कारण सिंचाई के बाद जमीन से उठने वाली गर्मी फसल को और जल्दी पकाने का काम कर रही है।

इस साल गर्मी अधिक है। आमतौर पर मार्च में इतनी गर्मी नहीं पड़ती। गर्मी से गेहूं की फसल समय से पहले पक रही है। समय से पहले फसल पकने से पैदावार में 10 से 15 फीसदी तक कमी आना स्वाभाविक है। वहीं गर्मी अधिक होने से गेहूं का दाना भी छोटा हो जाएगा। - डॉ. पुरुषोत्तम कुमार, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी
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