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एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से एनसीडी क्लीनिक हुआ बंद
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मरीजों की विभिन्न प्रकार की जांच के लिए मेला अस्पताल में बनाए गए एनसीडी क्लीनिक (नॉन कम्युनिकेबल डिसीज) भी बंद हो चुका है। जिसके कारण मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। हालांकि, मेला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों की जांच अन्य डॉक्टरों के माध्यम से कराई जा रही है।
हरियाणा सरकार की तर्ज पर अलग कैडर बनाने और ठेकादारी प्रथा को समाप्त करने की मांग को लेकर एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के कर्मचारी छह दिसंबर से हड़ताल पर चले गए थे। मांगों लेकर कर्मचारी अब सीएमओ ऑफिस पर धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी है। इनमें मेला अस्पताल में बनाए गए एनसीडी क्लीनिक पर भी ताला लटक गया है। क्लीनिक पर हाइपर टेंशन, बीपी, शुुगर, ब्लड प्रेशर, मोटापा आदि बीमारियों की जांच की जाती है।
जांच के बाद मरीजों को बीमारियों के लिए दवाइयां और दैनिक जीवन में बदलाव के लिए विभिन्न कार्य करने की सलाह दी जाती है। पर तीन दिन से क्लीनिक बंद होने से मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। उधर, मेला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता का कहना है कि एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से क्लीनिक पर असर पड़ा है, पर अस्पताल में आने वाले मरीजों को अन्य डॉक्टरों की ओर से जांच और दवाइयां दी जा रही हैं।
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नवजात शिशु इकाई के सात कर्मी हड़ताल में
जिला महिला अस्पताल में विशेष नवजात शिशु परिचर्या इकाई पर भी एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल का असर पड़ा है। इकाई में कुल 12 स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्टाफ है। जिसमें एनएचएम के पांच कर्मचारी हड़ताल में शामिल होने से वह इकाई में ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। पर सात कर्मचारी अन्य एजेंसी से रखे हुए हैं, जो इकाई में अपनी सेवा दे रहे हैं। जिससे बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा सात कर्मचारियों पर इकाई में आने वाले नवजात बच्चों का जिम्मा है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. संदीप निगम ने बताया कि पांच कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से कार्य तो प्रभावित हो रहा है।
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हरियाणा सरकार की तर्ज पर अलग कैडर बनाने और ठेकादारी प्रथा को समाप्त करने की मांग को लेकर एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के कर्मचारी छह दिसंबर से हड़ताल पर चले गए थे। मांगों लेकर कर्मचारी अब सीएमओ ऑफिस पर धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी है। इनमें मेला अस्पताल में बनाए गए एनसीडी क्लीनिक पर भी ताला लटक गया है। क्लीनिक पर हाइपर टेंशन, बीपी, शुुगर, ब्लड प्रेशर, मोटापा आदि बीमारियों की जांच की जाती है।
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जांच के बाद मरीजों को बीमारियों के लिए दवाइयां और दैनिक जीवन में बदलाव के लिए विभिन्न कार्य करने की सलाह दी जाती है। पर तीन दिन से क्लीनिक बंद होने से मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। उधर, मेला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता का कहना है कि एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से क्लीनिक पर असर पड़ा है, पर अस्पताल में आने वाले मरीजों को अन्य डॉक्टरों की ओर से जांच और दवाइयां दी जा रही हैं।
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नवजात शिशु इकाई के सात कर्मी हड़ताल में
जिला महिला अस्पताल में विशेष नवजात शिशु परिचर्या इकाई पर भी एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल का असर पड़ा है। इकाई में कुल 12 स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्टाफ है। जिसमें एनएचएम के पांच कर्मचारी हड़ताल में शामिल होने से वह इकाई में ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। पर सात कर्मचारी अन्य एजेंसी से रखे हुए हैं, जो इकाई में अपनी सेवा दे रहे हैं। जिससे बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा सात कर्मचारियों पर इकाई में आने वाले नवजात बच्चों का जिम्मा है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. संदीप निगम ने बताया कि पांच कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से कार्य तो प्रभावित हो रहा है।