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भूमाफिया बेच रहे सरकारी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 01 Mar 2017 09:54 PM IST
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बैरागी कैंप कनखल की आरक्षित सरकारी कुंभ मेला भूमि भू-माफिया बेचने में लगे हैं। सिंचाई खंड हरिद्वार के स्वामित्व की यह भूमि 1500 रुपये प्रति वर्गफीट के रेट से बेची जा रही है। सरकारी मेला भूमि की खरीद-फरोख्त के गोरखधंधे का खुलासा मंगलवार को तब हुआ जब सिंचाई विभाग के अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ अवैध कब्जा हटाने गए।
सरकारी भूमि पर निर्माण कराने वालों ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने 1500 रुपये वर्ग फीट के रेट से जमीन खरीदी है। भूमि खरीदने वालों में गुजरात व जयपुर की संस्थाएं भी शामिल हैं। सिंचाई खंड के उपराजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले अनिल कुमार से पता चला कि पार्षद पति ने गुजरात की संस्था को 1500 रुपये वर्ग फीट के रेट से सौदा किया है। जमीन खरीदने वाली संस्था ने पेड़ काटकर टीन शेड व शौचालय बनाने के साथ की मंदिर की बुनियाद शुरू कर दी थी। सिंचाई विभाग के रिकार्ड में अनिल कुमार, निर्मल, मेवालाल व सेवाराम का नाम कुंभ मेले के लिए आरक्षित बाग-बागवानी की भूमि पर अवैध कब्जा कराने वालों में शामिल है।
भूमि की सुरक्षा को तारबाड कराई जाएगी
आरक्षित कुंभ मेला भूमि को बचाकर सुरक्षित रखना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। बैरागी कैंप में सैकड़ों बीघा भूमि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त भू-माफियाओं को बेचकर ठिकाने लगा दिया है। उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि मंगलवार को करीब 22 बीघा मेला भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करा दिया है। अवैध कब्जा रोकने के लिए तारबाड कराई जाएगी।
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बागवानी को ठेका दिया जाएगा
बैरागी कैंप की मेला भूमि के बड़े हिस्से में फलदार पेड़ तथा फूलों की खेती होती थी। सिंचाई विभाग बागवानी का ठेका नीलाम करता था। वर्ष 2014-15 में बागवानी का ठेका 11 लाख में दिया था। ठेकेदार ने 5 लाख की किश्त जमा कराने के बाद बाग के अंदर से अतिक्रमण हटाकर पूरा कब्जा देने की मांग की, परंतु अधिकारियों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं किया। आरोप है कि इसके बाद सिंचाई विभाग को ठेकेदार ने कुछ लोगों के साथ मिलकर जमीन बेचकर कब्जा कराना शुरू कर दिया था। उपराजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि ठेकेदार के साथ वाद न्यायालय में विचाराधीन है।
सरकारी भूमि पर निर्माण कराने वालों ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने 1500 रुपये वर्ग फीट के रेट से जमीन खरीदी है। भूमि खरीदने वालों में गुजरात व जयपुर की संस्थाएं भी शामिल हैं। सिंचाई खंड के उपराजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले अनिल कुमार से पता चला कि पार्षद पति ने गुजरात की संस्था को 1500 रुपये वर्ग फीट के रेट से सौदा किया है। जमीन खरीदने वाली संस्था ने पेड़ काटकर टीन शेड व शौचालय बनाने के साथ की मंदिर की बुनियाद शुरू कर दी थी। सिंचाई विभाग के रिकार्ड में अनिल कुमार, निर्मल, मेवालाल व सेवाराम का नाम कुंभ मेले के लिए आरक्षित बाग-बागवानी की भूमि पर अवैध कब्जा कराने वालों में शामिल है।
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भूमि की सुरक्षा को तारबाड कराई जाएगी
आरक्षित कुंभ मेला भूमि को बचाकर सुरक्षित रखना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। बैरागी कैंप में सैकड़ों बीघा भूमि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त भू-माफियाओं को बेचकर ठिकाने लगा दिया है। उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि मंगलवार को करीब 22 बीघा मेला भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करा दिया है। अवैध कब्जा रोकने के लिए तारबाड कराई जाएगी।
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बागवानी को ठेका दिया जाएगा
बैरागी कैंप की मेला भूमि के बड़े हिस्से में फलदार पेड़ तथा फूलों की खेती होती थी। सिंचाई विभाग बागवानी का ठेका नीलाम करता था। वर्ष 2014-15 में बागवानी का ठेका 11 लाख में दिया था। ठेकेदार ने 5 लाख की किश्त जमा कराने के बाद बाग के अंदर से अतिक्रमण हटाकर पूरा कब्जा देने की मांग की, परंतु अधिकारियों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं किया। आरोप है कि इसके बाद सिंचाई विभाग को ठेकेदार ने कुछ लोगों के साथ मिलकर जमीन बेचकर कब्जा कराना शुरू कर दिया था। उपराजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि ठेकेदार के साथ वाद न्यायालय में विचाराधीन है।