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गुरुकुल को बनाया जाएगा भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र
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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय की ओर से अकादमिक संस्थानों और उत्तराखंड की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के बीच परस्पर सामंजस्य बनाने व सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए के लिए योजना बनाई है। विभिन्न संस्थानों और औद्योगिक क्षेत्र के लोगों के बीच हुई बैठक में इसपर मंथन किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद नई दिल्ली के प्रोफेसर चेयरमैन अनिल डी सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि आधुनिक समय में जितने कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता है। उतनी सभी अकादमी संस्थान मिलकर भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जिसका मुख्य कारण तकनीकी शिक्षा के दौरान औद्योगिक प्रशिक्षण न मिल पाना।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक व प्रौद्योगिकी संबंधित संस्थानों को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के साथ मिलजुल कर नई तकनीक के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शुरू करने की प्रेरणा दी। उन्होंने घोषणा की कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को पूरे देश का भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र बनाया जाएगा।
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कुलपति प्रोफेसर रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय पुरातन काल से ही भारतीय संस्कृति का मूल केंद्र रहा है। यह संस्थान अन्य संस्थानों से अपनी दिव्यता और भव्यता से जाना पहचाना जाता रहा है। यहां पर छात्र को एक अच्छे इंजीनियर बनाने के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनाया जाता है। इसीलिए यहां के इंजीनियरिंग विषयों में वैदिक परंपरा जैसी विषयों को पढ़ाया जाता है। हरिद्वार के सिडकुल के अलावा देश के अन्य सिडकुलों में भी गुरुकुल के छात्र अपनी सेवाए दे रहे हैं।
सिडकुल मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. हरेंद्र कुमार गर्ग ने कहा कि सिडकुल पूरे हरिद्वार ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड का औद्योगिक केंद्र है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी राज अरोड़ा ने कहा इस तरह का कार्यक्रम उत्तराखंड राज्य में पहली बार हुआ है। जिसमें विभिन्न तकनीकी संस्थानों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग एक पटल पर सामूहिक रूप से मिलकर कार्य करने के लिए अग्रसर होंगे।
संकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर पंकज मदान ने कहा कि विश्वविद्यालय के बीच में हो रहे एमओयू के माध्यम से छात्रों को तकनीकी शिक्षा के असीमित अवसर मिलेंगे। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार, डॉ. विपुल शर्मा, डॉ. तनुज गर्ग, डॉ. सुनील पंवार, डॉ. मुरली मनोहर तिवारी, डॉ. विवेक गोयल, डॉ. सुयश भारद्वाज, डॉ. मयंक अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद नई दिल्ली के प्रोफेसर चेयरमैन अनिल डी सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि आधुनिक समय में जितने कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता है। उतनी सभी अकादमी संस्थान मिलकर भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जिसका मुख्य कारण तकनीकी शिक्षा के दौरान औद्योगिक प्रशिक्षण न मिल पाना।
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उन्होंने कहा कि औद्योगिक व प्रौद्योगिकी संबंधित संस्थानों को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के साथ मिलजुल कर नई तकनीक के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शुरू करने की प्रेरणा दी। उन्होंने घोषणा की कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को पूरे देश का भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र बनाया जाएगा।
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कुलपति प्रोफेसर रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय पुरातन काल से ही भारतीय संस्कृति का मूल केंद्र रहा है। यह संस्थान अन्य संस्थानों से अपनी दिव्यता और भव्यता से जाना पहचाना जाता रहा है। यहां पर छात्र को एक अच्छे इंजीनियर बनाने के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनाया जाता है। इसीलिए यहां के इंजीनियरिंग विषयों में वैदिक परंपरा जैसी विषयों को पढ़ाया जाता है। हरिद्वार के सिडकुल के अलावा देश के अन्य सिडकुलों में भी गुरुकुल के छात्र अपनी सेवाए दे रहे हैं।
सिडकुल मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. हरेंद्र कुमार गर्ग ने कहा कि सिडकुल पूरे हरिद्वार ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड का औद्योगिक केंद्र है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी राज अरोड़ा ने कहा इस तरह का कार्यक्रम उत्तराखंड राज्य में पहली बार हुआ है। जिसमें विभिन्न तकनीकी संस्थानों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग एक पटल पर सामूहिक रूप से मिलकर कार्य करने के लिए अग्रसर होंगे।
संकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर पंकज मदान ने कहा कि विश्वविद्यालय के बीच में हो रहे एमओयू के माध्यम से छात्रों को तकनीकी शिक्षा के असीमित अवसर मिलेंगे। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार, डॉ. विपुल शर्मा, डॉ. तनुज गर्ग, डॉ. सुनील पंवार, डॉ. मुरली मनोहर तिवारी, डॉ. विवेक गोयल, डॉ. सुयश भारद्वाज, डॉ. मयंक अग्रवाल आदि मौजूद रहे।