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सियासी छत्रछाया में गंगातट पर अवैध निर्माण

Fri, 01 Mar 2013 01:54 PM IST
हरिद्वार/ब्यूरो
हरिद्वार/ब्यूरो Updated Fri, 01 Mar 2013 01:54 PM IST
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illegal construction on bank of ganga

गंगा से 200 मीटर के दायरे में राजनीतिक रसूख के चलते अवैध निर्माण होते रहे। इसके लिए कई लोगों ने राजनीतिक निष्ठा तक बदल डाली। जिसकी सरकार आई उसी के साथ हो लिए। एचडीए के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।

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भाजपा सरकार में हरकी पैड़ी क्षेत्र में 200 मीटर की परिधि में अवैध रूप से बन रहे एक होटल का निर्माण रुकवाने के लिए एचडीए की ओर से कार्रवाई शुरू की थी। ऐन वक्त पर होटल बनाने वाले का नजदीकी रिश्तेदार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गया। चोला बदलते ही एचडीए के अधिकारी पीछे हट गए।
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हरकी पैड़ी क्षेत्र में आश्रम का नक्शा पास करवा कर एक रसूखदार ने होटल का निर्माण करा लिया गया। यह काम एचडीए की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। एचडीए के एक पूर्व एई पर कपूरथला हाउस के पास होटल बनवाने का आरोप भी है। यह भी बताया जाता है कि इस होटल को बाद में खुद एई ने खरीद लिया। सप्तऋषि में गंगा किनारे बना विशाल बहुमंजिला अपार्टमेंट एचडीए की मिलीभगत का प्रमाण है।
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पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री ने गंगा किनारे विशाल निर्माण और कई वीआईपी कॉटेज बनवाए हैं। सरकारी विभाग भी गंगातट से 200 मीटर के अंदर अवैध निर्माण कराने में पीछे नहीं रहे। पर्यटन विभाग ने भी रोडी बेलवाला में होटल-रेस्टोरेंट बनाया। सीवरेज की सुविधा न होने पर जल संस्थान ने अपना कंट्रोल रूम और अधीक्षण अभियंता का कार्यालय पंतद्वीप में बनाया है। इन दोनों सरकारी निर्माणों के विरुद्ध एचडीए ने ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया है।

अवैध होटल में बदली धर्मशालाएं होंगी ध्वस्त
गंगातट पर यात्रियों की सुविधा के लिए दानवीरों द्वारा बनाई धर्मशालाओं को होटलों में परिवर्तित करने और आश्रम का नक्शा पास कराकर बहुमजिलें होटल बनाने वाली धर्मनगरी की धनाढ्य पीढ़ी हाईकोर्ट के अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश से परेशान हैं। अवैध कमाई करने वाले एचडीए के कुछ लोगों में भी बेचैनी है।


ध्वस्तीकरण का आदेश कराना पड़ेगा भारी
एचडीए में अवैध निर्माण की फाइल को बंद कराने के लिए अवैध निर्माणकर्ता ध्वस्तीकरण का आदेश पारित करा लेते थे। ध्वस्तीकरण आदेश पारित कराना एक परंपरा बन गया था। यह माना जाता था कि इतने अवैध निर्माण हो चुके हैं कि उन्हें कोई तोड़ ही नहीं सकता। इसलिए ले-देकर ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कराकर केस फाइल हमेशा के लिए बंद करा दो। लेकिन हाईकोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश ने उन लोगों के रात की नींद व दिन का चैन छीन लिया है।

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