फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   If the mining is done in the Ganges, then the martyrdom sacrifice is ready.

गंगा में खनन हुआ तो मातृसदन बलिदान को तैयार

Wed, 12 Apr 2017 09:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Wed, 12 Apr 2017 09:42 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
प्रदेश में खनन को लेकर हाईकोर्ट की रोक पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे हासिल करने के बाद सरकार ने गंगा में खनन के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस पर मातृसदन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए चीफ जस्टिस को पत्र भेजा है। साथ ही यह भी साफ किया है कि गंगा के लिए मातृसदन एक और बलिदान देने के लिए तैयार है।      

मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा में विधिवत रूप से खनन बंद होने के दौरान ही नैनीताल हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अलग-अलग आदेशों में पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। सरकार हाईकोर्ट के चार महीने तक खनन बंद करने के फैसले पर स्टे ले आई है और अब गंगा में खनन की तैयारी कर रही है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि मातृसदन ऐसा कभी नहीं होने देगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर बरसते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि रमेश पोखरियाल निशंक के मुख्यमंत्री रहते ब्रह्मचारी निगमानंद की हत्या हुई। अब त्रिवेंद्र सिंह रावत भी खनन और शराब माफिया को खुली छूट देकर ऐसा ही माहौल तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन


स्वामी शिवानंद ने सवाल उठाया कि निशंक की तरह त्रिवेंद्र भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं, क्या वे आरएसएस में शराब और खनन खोलने की ट्रेनिंग लेकर आए हैं।  उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएस खेहर को पत्र लिखकर कहा गया है कि गंगा में खनन को लेकर सुनवाई के दौरान मातृसदन का पक्ष भी जरूर सुना जाए। स्वामी शिवानंद ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार आते ही जिस तरह से खनन और शराब माफिया के पक्ष में वातावरण बना है, वह देवभूमि का दुर्भाग्य है। मातृसदन गंगा रक्षा के लिए फिर से बलिदान देने के लिए तत्पर है।      
विज्ञापन
विज्ञापन


आरटीआई से साबित हुआ शासनादेश फर्जी      
 रायवाला से भोगपुर तक खनन खोलने को लेकर 15 नवंबर को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक शासनादेश जारी किया था। जिसके विरोध में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने करीब महीने भर अनशन और खुद स्वामी शिवानंद ने जल त्यागते हुए इच्छा मृत्यु की तैयारी कर ली थी। मातृसदन का आरोप है कि सूचना के अधिकार के तहत पता चला है कि इस शासनादेश की राजभवन को जानकारी नहीं है, ऐसे में यह पूरी तरह फर्जी है। वहीं उसी दौरान मातृसदन ने हरिद्वार जिलाधिकारी से आरटीआई में पूछा था कि शासनादेश उन्हें कब मिला। इसका जवाब अब आया है कि यह शासनादेश डीएम कार्यालय को खनिकर्म विभाग हरिद्वार से पांच दिसंबर को मिला। स्वामी शिवानंद ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि शासनादेश में प्रतिलिपि जिलाधिकारी को प्रेषित लिखा गया है, तब डीएम कार्यालय को शासनादेश खनिकर्म विभाग से कैसे मिला। आरोप दोहराते हुए कहा कि इससे बैक डेट में फर्जी शासनादेश की बात साबित हो गई है। यही वजह है कि मांग के बावजूद इस प्रकरण पर जांच तक नहीं बैठाई गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed