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तिल के तेल का गोरखधंधा पक
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार/बहादराबाद
Updated Wed, 22 Mar 2017 09:17 PM IST
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सिडकुल की तेल बनाने वाली कंपनी के नाम से फर्जीवाड़ा कर तिल के तेल का गोरखधंधा पकड़ में आया है। इस तेल का इस्तेमाल भी सिडकुल की एक दवा कंपनी में किया जा रहा था। पुलिस ने दवा कंपनी को तेल बेचने वाले ज्वालापुर के एक व्यापारी के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट व धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक सिडकुल में माहेश्वरी सेल्स रिटेलर इंडिया के नाम से एक फर्म है। जो गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से खाद्य तेल का व्यापार करती है। कंपनी के सेल्स मैनेजर दीपक ग्रोवर को सूचना मिली कि सिडकुल में ही दवाई बनाने वाली एक कंपनी में उनकी कंपनी के नाम से तिल के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि उनकी कंपनी तिल का तेल का निर्यात नहीं करती है। शक होने पर दीपक ने कंपनी पहुंचकर जानकारी जुटाई तो सूचना सही पाई गई। जिस पर दीपक ग्रोवर और उनकी कंपनी ने सिडकुल पुलिस को शिकायत की। थाना प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने दवा बनाने वाली कंपनी में जाकर पड़ताल की। कंटेनर के ऊपर वाकई तेल कंपनी का नाम लिखा गया था। लेबल से छेड़छाड़ भी की गई थी। पूछताछ में पता चला कि ढाई लाख रुपये में ज्वालापुर से खरीदा गया है। कंपनी ने ज्वालापुर चौक बाजार स्थित मोहित ट्रेडर्स का बिल भी दिखाया। इस पर पुलिस ज्वालापुर पहुंची और व्यापारी मोहित बजाज से पूछताछ की।
मोहित का कहना था कि उसे कोई अनजान व्यक्ति यह तेल बेचकर गया है। व्यापारी की कहानी पुलिस के गले नहीं उतरी। पुलिस ने तेल कंपनी के लेबल से छेड़छाड़ कर उनके नाम का गलत इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी की धाराओं में व्यापारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। थाना प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि मामले की पूरी पड़ताल की जाएगी। तेल कहां बनाया, इस गोरखधंधे में कौन कौन लोग शामिल हैं, जांच में यह सब पता लगाया जाएगा।
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जिंदगी से खिलवाड़ कर रही थी दवा कंपनी
सिडकुल में दवाई बनाने वाली कंपनी ऐसे तेल का इस्तेमाल कर रही थी, जिसकी फर्म का ही पता नहीं है। दवाई बनाने वाली कंपनी ने ज्वालापुर से तेल खरीदा और उसका बिल भी दिखाया। इसी कारण वह फिलहाल पुलिस की कार्रवाई से बच गई, लेकिन सवाल यह है कि कंपनी ने दवाई में तेल इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्रमाणिकता को क्यों नहीं परखा। दवाई बनाने में गलत तेल का इस्तेमाल होने से जिंदगी से खिलवाड़ भी हो सकता है। लेकिन न कंपनी और न ड्रग्स विभाग ने इसकी सुध लेने की जरूरत समझी।
पुलिस के मुताबिक सिडकुल में माहेश्वरी सेल्स रिटेलर इंडिया के नाम से एक फर्म है। जो गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से खाद्य तेल का व्यापार करती है। कंपनी के सेल्स मैनेजर दीपक ग्रोवर को सूचना मिली कि सिडकुल में ही दवाई बनाने वाली एक कंपनी में उनकी कंपनी के नाम से तिल के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि उनकी कंपनी तिल का तेल का निर्यात नहीं करती है। शक होने पर दीपक ने कंपनी पहुंचकर जानकारी जुटाई तो सूचना सही पाई गई। जिस पर दीपक ग्रोवर और उनकी कंपनी ने सिडकुल पुलिस को शिकायत की। थाना प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने दवा बनाने वाली कंपनी में जाकर पड़ताल की। कंटेनर के ऊपर वाकई तेल कंपनी का नाम लिखा गया था। लेबल से छेड़छाड़ भी की गई थी। पूछताछ में पता चला कि ढाई लाख रुपये में ज्वालापुर से खरीदा गया है। कंपनी ने ज्वालापुर चौक बाजार स्थित मोहित ट्रेडर्स का बिल भी दिखाया। इस पर पुलिस ज्वालापुर पहुंची और व्यापारी मोहित बजाज से पूछताछ की।
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मोहित का कहना था कि उसे कोई अनजान व्यक्ति यह तेल बेचकर गया है। व्यापारी की कहानी पुलिस के गले नहीं उतरी। पुलिस ने तेल कंपनी के लेबल से छेड़छाड़ कर उनके नाम का गलत इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी की धाराओं में व्यापारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। थाना प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि मामले की पूरी पड़ताल की जाएगी। तेल कहां बनाया, इस गोरखधंधे में कौन कौन लोग शामिल हैं, जांच में यह सब पता लगाया जाएगा।
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जिंदगी से खिलवाड़ कर रही थी दवा कंपनी
सिडकुल में दवाई बनाने वाली कंपनी ऐसे तेल का इस्तेमाल कर रही थी, जिसकी फर्म का ही पता नहीं है। दवाई बनाने वाली कंपनी ने ज्वालापुर से तेल खरीदा और उसका बिल भी दिखाया। इसी कारण वह फिलहाल पुलिस की कार्रवाई से बच गई, लेकिन सवाल यह है कि कंपनी ने दवाई में तेल इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्रमाणिकता को क्यों नहीं परखा। दवाई बनाने में गलत तेल का इस्तेमाल होने से जिंदगी से खिलवाड़ भी हो सकता है। लेकिन न कंपनी और न ड्रग्स विभाग ने इसकी सुध लेने की जरूरत समझी।