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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Ganga ghats reflected the culture of unity in diversity

गंगा घाटों पर दिखी विविधता में एकता की संस्कृति

Mon, 08 Feb 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Mon, 08 Feb 2016 11:38 PM IST
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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेला के द्वितीय स्नान पर दो स्नानों मौनी अमावस्या व सोमवती अमावस्या का योग था और मौसम ने श्रद्धालुओं का पूरा साथ दिया। हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड के साथ ही धर्मनगरी के भी गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं में  देश की विविधता में एकता की संस्कृति बखूबी दिखाई दी।

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सप्तऋषि में गोस्वामी गणेशदत्त घाट से उपनगरी कनखल में दक्षेश्वर घाट और मायापुर से सीताघाट ज्वालापुर तक लाखों श्रद्धालुओं ने तड़के से गंगा में डुबकी लगानी की शुरू की और दिनभर सिलसिला चलता रहा। देश के विभिन्न प्रांतों गुजराज, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब,  दिल्ली, बिहार, आसाम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के श्रद्धालु रंग-बिरंगी पोशाकों में एक साथ जब गंगाघाटों पर पवित्र डुबकी लगा रहे थे तो उनके जयकारों के साथ विविधता में एकता की संस्कृति की गंगा भी बह रही थी। हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड घाट पर सभी डुबकी लगा सकें इसलिए मेला प्रशासन की ओर से पुण्य की तीन डुबकी लगाने की इजाजत थी, जिसका बार-बार ध्वनि यंत्रों से एनाउंसमेंट किया जाता रहा। मोतीहारी बिहार से 29  श्रद्धालुओं का एक ऐसा जत्था भी आया। जिसने रोडी बेलवाला घाट पर पवित्र डुबकी लगाई और गंगाजल भरा। इसके बाद परिवार के बुर्जुगों की परिक्रमा की और गंगाजलियों के सामने कान पकड़ कर उठक-बैठक लगाई। जत्थे में शामिल संतोष प्रसाद ने बताया कि परिवार के मुखियाओं से गलती के लिए माफी मांगने की परंपरा है। अपने को दंड देने के लिए कान पकड़ कर उठक-बैठक लगाई जाती है।
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पीपल के पेड़ों की कमी
शहर के मुख्य  मार्ग तथा हाईवे के चौड़ीकरण में बड़े स्तर पर पेड़ों को काटा गया। जगह-जगह खड़े पीपल के पेड़ भी काट दिए गए हैं। मौनी अमावस्या में श्रद्धालु महिलाओं को परिक्रमा के पीपल के पेड़ तलाशने पड़े। महिलाओं को भीमगोड़ा नई बस्ती के अंदर विश्नोई मंदिर, बीएसएनएल के सामने के पार्क तथा भूपतवाला में श्रद्घापुरम मार्ग के पीपल के पेड़ पर जाकर परिक्रमा पड़ी। हरकी पैड़ी के अपस्ट्रीम पंतद्वीप मैदान में एक ही पीपल का पेड़ बचा है जिस पर महिलाओं को परिक्रमा के लिए लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ा।
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