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गंगा दशहरा पर लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी
hridwar uttrakhanda india
Updated Tue, 14 Jun 2016 11:38 PM IST
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लाखों ने लगाई डुबकी
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा दशहरा पर लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी
- गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने किया श्राद्ध तर्पण
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। गंगा दशहरे के दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी सहित गंगा के घाटों पर पवित्र डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पुरोहितों की गद्दियों पर जाकर दान पुण्य किया। गंगा के नियत घाटों पर श्राद्ध तर्पण संपन्न कराए गए। स्नान शांतिपूर्ण संपन्न होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
गंगा दशहरे का स्नान मंगलवार को तड़के प्रारंभ हो गया था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। ग्यारह बजे के बाद सभी घाट श्रद्धालुओं की भीड़ से पैक हो गए थे। गंगा स्नान पूरे दिन चलता रहा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने कुशावर्त और नारायणी शिला जाकर श्राद्ध कर्म संपन्न कराए। दशहरे के दिन पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। अनेक घाटों पर अंजुली में गंगा जल भरकर श्रद्धालु तर्पण करते नजर आए। उगते सूर्य को महिलाओं ने अर्घ्य प्रदान किया।
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राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि प्रांतों से आए श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी। इस बार राजस्थान और गुजरात से सर्वाधिक संख्या में यात्रियों का आगमन गंगा दशहरे के अवसर पर हुआ। गंगा के घाटों पर भक्तों ने पुरोहितों और पंडितों से धरती पर गंगा अवतरण की कथा सुनी। गंगा मैया का पूजन दिनभर चलता रहा।
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गंगातट पर उमड़ा आस्था का सैलाब
- कहीं कीर्तन, कहीं पूजन तो कहीं गंगा वंदन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। गंगा दशहरे के दिन घाटों पर कहीं कीर्तन हो रहा था तो कहीं गंगा पूजन और गंगा वंदन। छोटे छोटे समूहों में घाटों पर बैठे श्रद्धालु गंगा मैया का मंगलगान कर रहे थे। हर एक स्थानों पर गंगा लहरी का पाठ किया गया।
मध्याह्न काल में हरकी पैड़ी पर गंगा सभा के संयोजन में गंगा पूजन का आयोजन किया गया। गंगा मैया के 56 प्रकार के व्यंजनों के भोग लगाए गए। गंगा सभा के सभापति कृष्ण कुमार शर्मा, अध्यक्ष गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा एवं महामंत्री राम कुमार मिश्रा के संयोजन में पुरोहितों ने गंगा पूजन किया। मां गंगा की दोपहर कालीन आरती भी उतारी गई। सांय काल एक बार फिर से युवा पुरोहितों ने मां गंगा की आरती उतारी। छोटे छोटे समूहों में एकत्रित होकर पुरोहितों ने कुशावर्त घाट पर भी पूजन किया। कुशावर्त पर राम चरित मानस से सुंदरकांड का पाठ किया गया। सांयकालीन आरती में आस्था के साक्षात दर्शन हुए। हजारों की संख्या में श्रद्धालु सांय पांच बजे से ही गंगा तट पर पहुंचने शुरू हो गए थे। गंगा सभा के 11 पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा मां गंगा का गुणगान किया। एकत्रित यात्रियों से गंगा को पवित्र बनाए रखने एवं पूरे देश में गंगा मूल्यों की रक्षा का संकल्प कराया गया।
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तीन दिनों में बंट गए दो दिनी पर्व
- आज भी मनेगा दशहरा, एकादशी कल
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। गंगा जन्मोत्सव के ठीक सवा महीने बाद पड़ने वाला गंगा दशहरा इस बार दो दिनों में विभाजित हो गया। दशहरा और निर्जला एकादशी दो दिनी पर्व माने गए हैं। इस बार ये पर्व तीन दिनी हो गए हैं।
तिथियों में उलटफेर के चलते गंगा दशहरे का मुख्य पर्व आज मंगलवार को मनाया गया। मंगलवार को दशहरे के दस लक्षणों में से छह लक्षण विद्यमान थे। बुधवार को भी दशहरा मनाया जाएगा, लेकिन लक्षणों की संख्या घटकर पांच रह जाएगी। याद रहे कि गंगा दशहरा पर्व दस प्रकार के लक्षणों का पर्व है। किसी वर्ष ऐसा होता है कि सभी दस लक्षण मौजूद रहें। मंगलवार को पूरे दिन दशमी तिथि होने के कारण मुख्य स्नान आज हुआ। बुधवार को दोपहर के समय एकादशी तिथि का प्रवेश हो जाएगा। परिणामस्वरूप एकादशी का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। दशमीवेधा एकादशी नहीं मनाई जाती।
बृहस्पतिवार को निर्जला एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। उस दिन भी लाखों की संख्या में आए श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे। इस भांति दो दिनी पर्व इस बार तीन दिनी पर्वों में बदल गए हैं।