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आज से देवभूमि भ्रमण पर निकलेगी पवित्र छड़ी यात्रा
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श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की ओर से निकाली जाने वाली प्राचीन पवित्र छड़ी यात्रा बुधवार वाल्मीकि जयंती पर चारधाम एवं उत्तराखंड के पौराणिक तीर्थ स्थलों के लिए रवाना हो जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अधिष्ठात्री मायादेवी मंदिर से शुभ मुहूर्त में यात्रा को रवाना करेंगे।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि के मुताबिक यात्रा शुरू होने से पहले वाल्मीकि चौक स्थित भगवान वाल्मीकि की पूजा अर्चना के लिए छड़ी को लाया जाएगा। इसके बाद पवित्र छड़ी को बिल्व पर्वत स्थित पौराणिक मां मनसा देवी मंदिर ले जाया जाएगा। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंदुपरी की ओर से पवित्र छड़ी की पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद पवित्र छड़ी को रवाना किया जाएगा। यात्रा 10 नवंबर को वापस मायादेवी मंदिर हरिद्वार पहुंचेगी।
श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि सनातन धर्म परंपरा में तीर्थाटन का विशेष महत्व है। पवित्र छड़ी यात्रा का उद्देश्य तीर्थाटन को बढ़ावा देने के साथ राष्ट्र को सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक एकता के सूत्र में बांधना भी है। उन्होंने कहा कि श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े ने 70 साल पहले छड़ी यात्रा की शुरुआत की थी। कुछ सालों तक यात्रा नहीं हो सकी। 2019 से दोबारा यात्रा की शुरुआत की गई है।
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देवभूमि के इन मंदिरों में पहुंचेगी यात्रा
21 दिन की यात्रा में पवित्र छड़ी चारधाम के अलावा त्रिजुगी नारायण, तुंगनाथ, भविष्य बदरी, आदि बदरी, नृसिंह मंदिर, आदि जगद्गुरु शंकराचार्य गुफा, सीतामढ़ी, नौटी गांव में श्रीयंत्र होते हुए कुमाऊं मंडल मे प्रवेश करेगी। कुमाऊं में बैजनाथ धाम, जागेश्वर धाम, सोमेश्वर महादेव, एड़ादेव, खडकेश्वर मंदिर, गरुड़ चट्टी, ज्योर्तिलिंग बागनाथ मंदिर, पूर्णागिरि मंदिर, गंगानाथ मंदिर, प्रन्ना देवी नैनीताल, नारायण आश्रम ओम पर्वत, पाताल भुवनेश्वर, हाट काली गंगोलीहाट, दूना गिरि, कालिका मंदिर, रानीखेत, बिनसर महादेव, बूढ़ाकेदार, भूमियाथान मासी, गर्जिया माता के दर्शनों के पश्चात हरिद्वार पहुंचेगी।
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जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि के मुताबिक यात्रा शुरू होने से पहले वाल्मीकि चौक स्थित भगवान वाल्मीकि की पूजा अर्चना के लिए छड़ी को लाया जाएगा। इसके बाद पवित्र छड़ी को बिल्व पर्वत स्थित पौराणिक मां मनसा देवी मंदिर ले जाया जाएगा। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंदुपरी की ओर से पवित्र छड़ी की पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद पवित्र छड़ी को रवाना किया जाएगा। यात्रा 10 नवंबर को वापस मायादेवी मंदिर हरिद्वार पहुंचेगी।
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श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि सनातन धर्म परंपरा में तीर्थाटन का विशेष महत्व है। पवित्र छड़ी यात्रा का उद्देश्य तीर्थाटन को बढ़ावा देने के साथ राष्ट्र को सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक एकता के सूत्र में बांधना भी है। उन्होंने कहा कि श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े ने 70 साल पहले छड़ी यात्रा की शुरुआत की थी। कुछ सालों तक यात्रा नहीं हो सकी। 2019 से दोबारा यात्रा की शुरुआत की गई है।
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देवभूमि के इन मंदिरों में पहुंचेगी यात्रा
21 दिन की यात्रा में पवित्र छड़ी चारधाम के अलावा त्रिजुगी नारायण, तुंगनाथ, भविष्य बदरी, आदि बदरी, नृसिंह मंदिर, आदि जगद्गुरु शंकराचार्य गुफा, सीतामढ़ी, नौटी गांव में श्रीयंत्र होते हुए कुमाऊं मंडल मे प्रवेश करेगी। कुमाऊं में बैजनाथ धाम, जागेश्वर धाम, सोमेश्वर महादेव, एड़ादेव, खडकेश्वर मंदिर, गरुड़ चट्टी, ज्योर्तिलिंग बागनाथ मंदिर, पूर्णागिरि मंदिर, गंगानाथ मंदिर, प्रन्ना देवी नैनीताल, नारायण आश्रम ओम पर्वत, पाताल भुवनेश्वर, हाट काली गंगोलीहाट, दूना गिरि, कालिका मंदिर, रानीखेत, बिनसर महादेव, बूढ़ाकेदार, भूमियाथान मासी, गर्जिया माता के दर्शनों के पश्चात हरिद्वार पहुंचेगी।