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गंगा में डुबकी लगाकर दी पितरों को विदाई
अमर उजाला,हरिद्वार
Updated Sat, 05 Oct 2013 01:17 AM IST
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पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन देश के विभिन्न भागों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा मैया में डुबकी लगाकर पितरों को विदाई दी। इसी के साथ महालय श्राद्ध संपन्न हो गए हैं। हरिद्वार में शुक्रवार को दिनभर गंगा घाटों पर भारी भीड़ लगी रही।
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हरकी पैड़ी पर स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु कुशावर्त घाट और नारायणी शिला पहुंचे, जहां देर शाम तक पितृ श्राद्ध, तर्पण और पितृ शांति के कर्मकांड चलते रहे। दोपहर के समय हजारों लोगों ने अपने घरों में ब्राह्मण भोजन कराकर पितरों को विदाई दी। गंगा के घाटों पर श्राद्ध करने वालों का तांता लगा रहा। नारायणी शिला पर भीड़ इतनी अधिक थी कि श्रद्धालु सामने के मैदानों, पालिका प्रांगण, सड़कों और गणेश घाट तक पर श्राद्ध कर्म कर रहे थे।
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श्राद्ध कर्म करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी बंगाल और उड़ीसा के यात्रियाें की काफी भीड़ थी। उत्तराखंड के दोनों मंडलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितृ श्राद्ध करने के लिए हरिद्वार पहुंचे। कुशावर्त पर कर्मकांड करने वालों की भीड़ देर शाम तक चलती रही। इसी तरह नारायणी शिला पर भी श्रद्धालुओं को बड़ी मुश्किल से पितृ विसर्जन का स्थान उपलब्ध हो पाया।
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सूर्य रश्मियों पर विदा हुए पितर
हरिद्वार और कनखल के गंगा तटों पर शाम को श्रद्धालुओं ने नन्हें-नन्हें दीपक जलाकर पितरों की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन पितृगण ढलते सूरज की रश्मियों पर सवार होकर धरती पर आते हैं और अमावस्या के दिन उन्हीं रश्मियों के सहारे वापस लौटते हैं। दक्षिण दिशा स्थित पितृ लोक की ओर मुख कर श्रद्धालुओं ने गंगा के तटों पर दीपक जलाए। पीपल के वृक्षों के नीचे भी दीपदान किया गया।
नारायणी मंदिर में पूजा-अर्चना
नारायणी शिला के प्रांगण में जहां श्रद्धालु कर्मकांड करने के लिए जटे थे, वहीं नारायणी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अर्द्ध शिला पर जल चढ़ाया। शिला पर प्रसाद भी चढ़ाया गया। मान्यता है कि इस शिला का आधा भाग गया में है और आधा हिस्सा मायापुर में। नारायणी मंदिर में देर रात तक पूजा-अर्चना चलती रही।
हरकी पैड़ी पर लगाए रहे गोते
श्रद्धालु कर्मकांड करने से पहले हरकी पैड़ी पहुंचे और कर्मकांड के बाद भी हरकी पैड़ी जाकर स्नान किया। पितरों को विदाई देने के बाद शुद्ध स्नान करने वालों की भीड़ सायंकालीन आरती के समय भी लगी रही।