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झिलमिल झील में पहली बार नजर आया आईबिस्बिल्ल

Fri, 25 Feb 2022 11:23 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 11:23 PM IST
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Eyebisbill seen for the first time in Jhilmil Lake
आईबिस्बिल्ल । - फोटो : HARIDWAR
झिलमिल झील में पहली बार आईबिस्बिल पक्षी कैमरे में कैद हुई है। इस पक्षी को झील और राजाजी टाइगर रिजर्व में इससे पहले कभी नहीं देखा गया। नेचर गाइड तौकीर आलम की ओर से खोजा गया यह पक्षी झिलमिल झील के लिए जैवविविधता को दर्शा रहा है। इस पक्षी का भारत में असल ठिकाना लद्दाख में पाया जाता है। इससे वन्यजीव प्रेमी आईबिस्बिल्ल को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
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18 से 21 फरवरी तक पूरे विश्व में मनाए गए अंतरराष्ट्रीय ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट के दौरान पूरी दुनिया से पक्षियों का अवलोकन करके ई-बर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। यह नागरिक विज्ञान का एक हिस्सा माना जाता है। नेचर गाइड तौकीर आलम ने बताया की इस बार ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट के दौरान पक्षियों का अवलोकन करते हुए उन्हें कई दुर्लभ प्रजातियां दिखीं। जिनमें सबसे मुख्य आईबिस्बिल्ल रहा है। आईबिस्बिल्ल पक्षी शीत काल में चीन, कजाकिस्तान, जम्मू कश्मीर और हिमालय की उच्च चोटियों से हिमालय की तलहटियों में प्रवास करने के लिए आती है। यह पक्षी नेपाल, भूटान, बंगलादेश और म्यांमार के उत्तरी उच्च भागों में भी दिखाई देता है। इस से पूर्व आईबिस्बिल्ल जिम कार्बेट पार्क की कोसी नदी के गर्जिया मंदिर जोन में ही दिखाई देती थी। पहली बार यह पक्षी झिलमिल झील संरक्षण क्षेत्र के पास दिखाई दिया है। उनका कहना है कि अक्सर दो ग्रुप में रहना वाला यह पक्षी एकांकी जीवन जी रहा है। सर्दी खत्म होने के बाद इसके लौट जाने की उम्मीद है।
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ये पक्षी भी आए नजर
भ्रमण के दौरान तौकीर आलम ने अन्य कई पक्षी भी अपने उस श्रेेणी के देखे हैं। जो यहां बेहद कम दिखाई देते हैं। जिसमें ब्रिस्लेट ग्रास बर्ड, 3 प्रजातियों के गिद्ध, वारब्लर्स, फ्लाईकेचर और साइबेरिया, मंगोलिया से माउंट एवरेस्ट के ऊपर से उड़ कर आने वाली बार हेडेड और ग्रे लेग गीस जैसी 300 प्रजातियां देखी गईं। उनका कहना है कि इन पक्षियों के यहां पाए जाने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से रोजगार के साधन भी सृजित होंगे।
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तौकीर के साथ टीम में ये रहे शामिल
राजाजी टाइगर रिजर्व और झिलमिल झील संरक्षण क्षेत्र में इस बार अंतरराष्ट्रीय ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट के लिए माई एन इनिशिएटिव एजुकेशन फॉर दा वन गुर्जर की टीम ने वन विभाग के साथ मिल कर पक्षी अवलोकन की योजना बनाई थी। काउंट में टीम माई की तरफ से तौकीर आलम, बसीर बानिया, इरशाद कसाना, अरुण कुमार, सद्दाम खटाना, सद्दाम हुसैन, तौफीक उमर, आरिफ अली, जावेद चौहान रहे।

झिलमील झील में बाहर के पक्षी सर्दी के मौसम में आते हैं। इसलिए यह पक्षी भी देखने की बात सामने आ रही है। हालांकि, मैने नहीं देखा। लेकिन तौकीर आलम बर्ड पर लंबे समय से काफी अध्ययन कर रहे हैं। इसी वजह से नेचर गाइड अपने अध्ययन में इस तरह के पक्षी को देखने का दावा कर रहे हैं। उनके दावे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
- कुलदीप पंवार, यूनिट प्रभारी, रसियाबड़
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