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धर्मनगरी ने ओढ़ा कोहरा
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 28 Jan 2017 11:10 PM IST
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धर्मनगरी में कोहरे की धुंध से शनिवार को पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। धूप न निकलने और पहाड़ों में उठ रही बर्फीली हवाओं के कारण लोग घरों के कैद होकर रह गए। शहर के अधिकतम तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
दो दिनों से हो रही बूंदाबांदी से मौसम में फिर से उल्टफेर हो गया। पिछले सप्ताह दिन में अच्छी धूप खिल रही थी। शनिवार सुबह हरिद्वार में कोहरा छाया रहा। ठंड बढ़ने से नगर निगम ने अलाव जलाए जबकि दुकानों के सामने लोगों ने कागज एवं अन्य सामान जलाकर ठंड से बचने का प्रयास किया। शहर में शनिवार को दिन का अधिकतम तापपान 18.0 डिग्री, न्यूनतम 5.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कोहरे से फसलों में भी कीट व बीमारियां लगने का खतरा मंडराने लगा है। इससे सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान होने का खतरा ज्यादा है।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के कृषि वैज्ञानिक डा. वाईपी सैनी ने बताया कि कोहरे में हवा में ज्यादा नमी तथा धूप न निकलने से सरसों आदि फसलों में चेंपा कीट व सफेद रतुआ रोग, मटर में सफेद चूर्णी व आलू में झुलसा रोग बढ़ने की संभावना रहती है। मधुमक्खी आदि कीटों के फसलों पर न पहुंचने से परागित सरसों, मटर, सेंगरी आदि फसलों में फलियां कम बनती हैं। पौधे की भोजन निर्माण की यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया बाधित होने लगती है। फसल कमजोर हल्का पीलापन तथा कीट बढ़ने से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में बचाव करने को आवश्यक इंतजाम करने जरूरी है।
दो दिनों से हो रही बूंदाबांदी से मौसम में फिर से उल्टफेर हो गया। पिछले सप्ताह दिन में अच्छी धूप खिल रही थी। शनिवार सुबह हरिद्वार में कोहरा छाया रहा। ठंड बढ़ने से नगर निगम ने अलाव जलाए जबकि दुकानों के सामने लोगों ने कागज एवं अन्य सामान जलाकर ठंड से बचने का प्रयास किया। शहर में शनिवार को दिन का अधिकतम तापपान 18.0 डिग्री, न्यूनतम 5.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कोहरे से फसलों में भी कीट व बीमारियां लगने का खतरा मंडराने लगा है। इससे सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान होने का खतरा ज्यादा है।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के कृषि वैज्ञानिक डा. वाईपी सैनी ने बताया कि कोहरे में हवा में ज्यादा नमी तथा धूप न निकलने से सरसों आदि फसलों में चेंपा कीट व सफेद रतुआ रोग, मटर में सफेद चूर्णी व आलू में झुलसा रोग बढ़ने की संभावना रहती है। मधुमक्खी आदि कीटों के फसलों पर न पहुंचने से परागित सरसों, मटर, सेंगरी आदि फसलों में फलियां कम बनती हैं। पौधे की भोजन निर्माण की यह प्रकाश संश्लेषण क्रिया बाधित होने लगती है। फसल कमजोर हल्का पीलापन तथा कीट बढ़ने से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में बचाव करने को आवश्यक इंतजाम करने जरूरी है।
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