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डेंजर जोन में निर्मित अवैध भवन होंगे ध्वस्त
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 08 Apr 2017 10:19 PM IST
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मेयर मनोज गर्ग ने हर की पैड़ी-कांगड़ा मंदिर के समीप घोषित डेंजर जोन में भूस्खलन के खतरे वाले पहाड़ पर अवैध रूप से निर्मित भवन को जनहित में ध्वस्त कराने की ठान ली है। उनका दावा है कि शहरी विकास मंत्री की हरी झंडी के बाद उन्होंने सोमवार को एचआरडीए सचिव अरविंद कुमार पांडेय को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए बुलाया है।
मनोज गर्ग हिल बाईपास के नीचे पीडब्ल्यूडी के निरीक्षण भवन के पास ही शिवालिक की पहाड़ी पर अवैध निर्माण रुकवाने का प्रयास वर्ष 2015 से कर रहे थे। तब कांग्रेस नेताओं ने उनकी एक नहीं चलने दी। उन्होंने तत्कालीन वीसी एवं अर्द्धकुंभ मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन से भी जनहित में डेंजर जोन में अवैध निर्माण रुकवाने की मांग कई बार की, परंतु तब वे कुछ करा नहीं पाए। लोगों की शिकायतों पर अपना बचाव करने के लिए विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने दो बार अवैध निर्माण को कागजों में सील किया। भूस्खलन वाले जोन भारी अवैध निर्माण से डरे आसपास रहने वाले कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से कार्रवाई की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचने पर प्राधिकरण ने अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर मामला दफन कर दिया। सील और ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी मंजिल पर मंजिल चढ़ती चली गई। अब सत्ता बदलने के बाद मेयर मनोज गर्ग ने फिर से इस मामले को एजेंड़े में लिया है। उन्होंने कहा कि इस निर्माण से पीडब्ल्यूडी निरीक्षण भवन भी ओझल हो गया है। उन्होंने कहा है कि या तो निरीक्षण भवन हटाएं या अवैध निर्माण। सोमवार को एचआरडीए के सचिव को बुलाया जिसमें उनसे कार्रवाई के बारे में जानकारी ली जाएगी।
मनोज गर्ग हिल बाईपास के नीचे पीडब्ल्यूडी के निरीक्षण भवन के पास ही शिवालिक की पहाड़ी पर अवैध निर्माण रुकवाने का प्रयास वर्ष 2015 से कर रहे थे। तब कांग्रेस नेताओं ने उनकी एक नहीं चलने दी। उन्होंने तत्कालीन वीसी एवं अर्द्धकुंभ मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन से भी जनहित में डेंजर जोन में अवैध निर्माण रुकवाने की मांग कई बार की, परंतु तब वे कुछ करा नहीं पाए। लोगों की शिकायतों पर अपना बचाव करने के लिए विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने दो बार अवैध निर्माण को कागजों में सील किया। भूस्खलन वाले जोन भारी अवैध निर्माण से डरे आसपास रहने वाले कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से कार्रवाई की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचने पर प्राधिकरण ने अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर मामला दफन कर दिया। सील और ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी मंजिल पर मंजिल चढ़ती चली गई। अब सत्ता बदलने के बाद मेयर मनोज गर्ग ने फिर से इस मामले को एजेंड़े में लिया है। उन्होंने कहा कि इस निर्माण से पीडब्ल्यूडी निरीक्षण भवन भी ओझल हो गया है। उन्होंने कहा है कि या तो निरीक्षण भवन हटाएं या अवैध निर्माण। सोमवार को एचआरडीए के सचिव को बुलाया जिसमें उनसे कार्रवाई के बारे में जानकारी ली जाएगी।
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