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शिल्पियों को विघ्नहर्ता से विघ्न हरने की आस

Wed, 08 Sep 2021 10:23 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 10:23 PM IST
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Craftsmen hope to remove obstacles from Vighnaharta
10 सितंबर को गणेश चतुर्थी है और बाजार में भगवान गणेश की मूर्तियों के स्टाल सज गए हैं। बाजार में एक से आठ हजार रुपये तक की मूर्तियां हैं। पिछले वर्ष कोरोना काल में बिक्री को तरसे शिल्पियों ने विघ्नहर्ता से विघ्न हरने की आस लगा रखी है।
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धर्मनगरी में गणेश चतुर्थी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण का असर गणेश चतुर्थी पर देखने को मिला था। सार्वजनिक समारोहों की अनुमति नहीं होने से पंडाल नहीं सजे थे। मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक थी। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की गई थी। इसका असर गणेश की मूर्तियां बनाने वाले शिल्पियों पर भी पड़ा था। उनकी प्रतिमाएं बिना बिके रह गई थीं।
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इस बार माहौल बदला हुआ है। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण थमा हुआ है। मंदिर भी खुले हुए हैं। धर्मनगरी में रानीपुर मोड़, ज्वालापुर में पीठ बाजार, भगत सिंह चौक के नजदीक, कनखल के झंडा चौक में गणपति की मूर्तियों के स्टाल सज गए हैं। डेढ़ फुट से लेकर आठ फुट तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। इनकी कीमत एक से आठ हजार रुपये तक है।
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पहले की अपेक्षा कम हैं बड़ी मूर्तियों के आर्डर
भगत सिंह चौक के समीप गणेश मूर्तियां बना रहे शिल्पी रामकुमार ने बताया कि पिछले वर्ष बड़ी मूर्तियाें के आर्डर नहीं मिले थे। छोटी मूर्तियां बनाई थीं, वो भी नहीं बिकी थीं। इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा बड़ी मूर्तियां बनाने के कुछ आर्डर मिले हैं। हालांकि, वर्ष 2019 की अपेक्षा कम ही हैं। शिल्पी सहनपाल ने बताया कि पिछले वर्ष बड़ी मूर्तियां नहीं बिकी थीं। इस बार छोटी मूर्तियां ही बनाई हैं। उम्मीद है कि इस बार ग्राहक आएंगे और बिक्री होगी।

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इस वर्ष ब्रह्म योग में मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। मान्यता है कि गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में सोमवार को स्वाति नक्षत्र व सिंह लग्न में हुआ था। इसलिए यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी व विनायक चतुर्थी कहलाती है। नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी ने बताया कि व्रत रखने वाले भक्त स्नान करने के बाद मिट्टी की गणेश जी की मूर्ति का विधिवत पूजन करें और गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से पांच लड्डू गणेश को अर्पित करके शेष लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित करे
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