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बच्चे कक्षाओं में हुए प्रमोट, पर भूले लिखाई-पढ़ाई
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कोरोना काल के बाद खुले स्कूलों में बच्चों की गृह परीक्षाएं लेकर उन्हें प्रमोट तो कर दिया गया है लेकिन बच्चे पढ़ना-लिखना भूल गए हैं। हालत यह है कि बेसिक शिक्षण स्तर से बच्चों को पढ़ाई की तरफ लाने के लिए अध्यापकों को फिर से पसीना बहाना पड़ रहा है।
करीब दो साल बाद 31 जनवरी को कक्षा दस और 12 के स्कूल खोलकर ऑफलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई थीं। 16 फरवरी से कक्षा एक से नौ तक के स्कूलों को भी शुरू दिया गया था। ऐसे में बच्चे स्कूल कम आ रहे हैं और जो आ भी रहे हैं वो सारी पढ़ाई-लिखाई भूल गए हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय भगतनपुर के सहायक अध्यापक जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए सारी मेहनत अध्यापक ही करते हैं। घर पर अभिभावक बच्चों को कुछ नहीं बताते हैं इसलिए स्कूल बंद रहने से बच्चे सबकुछ भूल गए हैं। लगातार बच्चे घर पर रहकर थोड़ी भी प्रेक्टिस करते रहते तो उनकी पढ़ाई अच्छी चलती रहती। यह सब घरों पर नहीं होने से दोबारा जीरो से शुरू करना पड़ रहा है।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय टिबड़ी की प्राधानाध्यापक रागिनी गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में शिक्षा से दूर रहने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो चुकी है। बच्चों को पढ़ने की तरफ मोड़ने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ रह रही है। उन्हें फिर से बेसिक शिक्षा के बारे में बताया जा रहा है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद की सहायक अध्यापिका नीलम ने बताया कि कोरोना काल में बच्चों के स्कूलों से दूर रहने पर अभिभावकों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसके कारण उनका शिक्षा का स्तर काफी गिर गया है। उन्हें फिर से शिक्षा की तरफ मोड़ने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ रही है।
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करीब दो साल बाद 31 जनवरी को कक्षा दस और 12 के स्कूल खोलकर ऑफलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई थीं। 16 फरवरी से कक्षा एक से नौ तक के स्कूलों को भी शुरू दिया गया था। ऐसे में बच्चे स्कूल कम आ रहे हैं और जो आ भी रहे हैं वो सारी पढ़ाई-लिखाई भूल गए हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय भगतनपुर के सहायक अध्यापक जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए सारी मेहनत अध्यापक ही करते हैं। घर पर अभिभावक बच्चों को कुछ नहीं बताते हैं इसलिए स्कूल बंद रहने से बच्चे सबकुछ भूल गए हैं। लगातार बच्चे घर पर रहकर थोड़ी भी प्रेक्टिस करते रहते तो उनकी पढ़ाई अच्छी चलती रहती। यह सब घरों पर नहीं होने से दोबारा जीरो से शुरू करना पड़ रहा है।
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राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय टिबड़ी की प्राधानाध्यापक रागिनी गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में शिक्षा से दूर रहने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो चुकी है। बच्चों को पढ़ने की तरफ मोड़ने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ रह रही है। उन्हें फिर से बेसिक शिक्षा के बारे में बताया जा रहा है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद की सहायक अध्यापिका नीलम ने बताया कि कोरोना काल में बच्चों के स्कूलों से दूर रहने पर अभिभावकों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसके कारण उनका शिक्षा का स्तर काफी गिर गया है। उन्हें फिर से शिक्षा की तरफ मोड़ने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ रही है।
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