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अवैध खनन की हो सीबीआई जांच : शिवानंद
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sun, 04 Dec 2016 10:39 PM IST
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गंगा में खनन अनुमति देने के विरोध में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आमरण अनशन और जल त्याग आंदोलन दूसरी दिन भी जारी रहा। रविवार को उन्होंने कहा कि हरिद्वार में चल रहे अवैध खनन के धंधे की सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खनन माफिया की ओर से प्रतिमाह दी जाने वाली भारी भरकम रकम ने सिस्टम का मुंह बंद कर रखा है।
रायवाला से भोगपुर तक गंगा में खनन की अनुमति दिए जाने के विरोध सहित अपनी कई अन्य मांगों को लेकर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने 27 नवंबर से अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति समेत पांच माननीयों को पत्र भेजकर गंगा की दुर्दशा से अवगत कराया था और इच्छा मृत्यु की मांग की थी। कोई जवाब नहीं आने के कारण शनिवार से स्वामी शिवानंद ने जल भी त्याग दिया।
आश्रम में अपने आप को कमरे में बंद किए बैठे स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अमर उजाला से कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब हरिद्वार में कागजों में खनन बंद है। धरातल पर बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की जानकारी मिली है कि प्रतिमाह भारी भरकम धनराशि खनन माफिया की ओर से सरकारी सिस्टम को दी जा रही है। इसलिए शासन ओर प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने गंगा के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराते हुए कहा कि मातृसदन का संघर्ष जारी रखेगा और अब वे प्राण त्यागने तक अनशन करते रहेंगे। दूसरी और मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब प्रशासन ने संवाद पूरी तरह बंद कर दिया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी स्थिति होना अराजकता का प्रतीक है।
रायवाला से भोगपुर तक गंगा में खनन की अनुमति दिए जाने के विरोध सहित अपनी कई अन्य मांगों को लेकर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने 27 नवंबर से अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति समेत पांच माननीयों को पत्र भेजकर गंगा की दुर्दशा से अवगत कराया था और इच्छा मृत्यु की मांग की थी। कोई जवाब नहीं आने के कारण शनिवार से स्वामी शिवानंद ने जल भी त्याग दिया।
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आश्रम में अपने आप को कमरे में बंद किए बैठे स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अमर उजाला से कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब हरिद्वार में कागजों में खनन बंद है। धरातल पर बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की जानकारी मिली है कि प्रतिमाह भारी भरकम धनराशि खनन माफिया की ओर से सरकारी सिस्टम को दी जा रही है। इसलिए शासन ओर प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने गंगा के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराते हुए कहा कि मातृसदन का संघर्ष जारी रखेगा और अब वे प्राण त्यागने तक अनशन करते रहेंगे। दूसरी और मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब प्रशासन ने संवाद पूरी तरह बंद कर दिया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी स्थिति होना अराजकता का प्रतीक है।
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