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Haridwar News: शस्त्र लाइसेंस बनवाने के नाम पर 30 हजार की धोखाधड़ी में रिपोर्ट दर्ज
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- सिडकुल थाना का मामला, पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दर्ज की प्राथमिकी
- 30 हजार की ठगी करने के साथ ही फर्जी लाइसेंस थमाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण और उस पर बंदूक दर्ज कराने के नाम पर 30 हजार की धोखाधड़ी और फर्जी लाइसेंस थमाने का मामला सामने आया है। सिडकुल पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, नवाब अहमद निवासी सुभाषनगर ज्वालापुर ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके पास जिलाधिकारी की ओर से जारी 12 बोर डबल बैरल बंदूक का शस्त्र लाइसेंस है। उन्होंने रुड़की स्थित विनायक गन हाउस से बंदूक खरीदी थी, लेकिन बीमारी और कोरोना से पीड़ित रहने के कारण वह समय पर बंदूक का लाइसेंस पर अंकन नहीं करा सके। बाद में रोशनाबाद स्थित शस्त्र लाइसेंस कार्यालय में उनकी मुलाकात शमीम से हुई। आरोप है कि शमीम ने खुद को कार्यालय में कार्यरत बताते हुए लाइसेंस पर बंदूक दर्ज कराने और नवीनीकरण कराने का भरोसा दिया।
आरोप है कि इस काम के लिए शमीम ने 30 हजार रुपये मांगे। नवाब अहमद ने 16 हजार रुपये नकद और 14 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से दे दिए। इसके साथ ही उन्होंने बंदूक का मूल लाइसेंस और खरीद का बिल भी शमीम को सौंप दिया। काफी समय तक आरोपी टालमटोल करता रहा। बाद में पीड़ित को जानकारी मिली कि शमीम नाम का कोई व्यक्ति शस्त्र लाइसेंस कार्यालय में कार्यरत नहीं है।
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पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के बाद 24 अगस्त को शमीम ने रोशनाबाद स्थित चैंबर में पहुंचकर उन्हें लाइसेंस की एक प्रति दी। शुरुआत में वह इसकी जांच नहीं कर सके। 16 सितंबर को दस्तावेज को ध्यान से देखने पर उन्हें उसके फर्जी होने का संदेह हुआ।
इसके बाद शस्त्र लाइसेंस अनुभाग में जानकारी करने पर पता चला कि यह प्रति कार्यालय से जारी नहीं की गई थी। आरोप है कि शमीम ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें सौंपा और 30 हजार भी हड़प लिए। सीओ सुरेंद्र प्रसाद बलूनी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जांच की जा रही है।
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- 30 हजार की ठगी करने के साथ ही फर्जी लाइसेंस थमाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण और उस पर बंदूक दर्ज कराने के नाम पर 30 हजार की धोखाधड़ी और फर्जी लाइसेंस थमाने का मामला सामने आया है। सिडकुल पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, नवाब अहमद निवासी सुभाषनगर ज्वालापुर ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके पास जिलाधिकारी की ओर से जारी 12 बोर डबल बैरल बंदूक का शस्त्र लाइसेंस है। उन्होंने रुड़की स्थित विनायक गन हाउस से बंदूक खरीदी थी, लेकिन बीमारी और कोरोना से पीड़ित रहने के कारण वह समय पर बंदूक का लाइसेंस पर अंकन नहीं करा सके। बाद में रोशनाबाद स्थित शस्त्र लाइसेंस कार्यालय में उनकी मुलाकात शमीम से हुई। आरोप है कि शमीम ने खुद को कार्यालय में कार्यरत बताते हुए लाइसेंस पर बंदूक दर्ज कराने और नवीनीकरण कराने का भरोसा दिया।
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आरोप है कि इस काम के लिए शमीम ने 30 हजार रुपये मांगे। नवाब अहमद ने 16 हजार रुपये नकद और 14 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से दे दिए। इसके साथ ही उन्होंने बंदूक का मूल लाइसेंस और खरीद का बिल भी शमीम को सौंप दिया। काफी समय तक आरोपी टालमटोल करता रहा। बाद में पीड़ित को जानकारी मिली कि शमीम नाम का कोई व्यक्ति शस्त्र लाइसेंस कार्यालय में कार्यरत नहीं है।
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पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के बाद 24 अगस्त को शमीम ने रोशनाबाद स्थित चैंबर में पहुंचकर उन्हें लाइसेंस की एक प्रति दी। शुरुआत में वह इसकी जांच नहीं कर सके। 16 सितंबर को दस्तावेज को ध्यान से देखने पर उन्हें उसके फर्जी होने का संदेह हुआ।
इसके बाद शस्त्र लाइसेंस अनुभाग में जानकारी करने पर पता चला कि यह प्रति कार्यालय से जारी नहीं की गई थी। आरोप है कि शमीम ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें सौंपा और 30 हजार भी हड़प लिए। सीओ सुरेंद्र प्रसाद बलूनी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जांच की जा रही है।