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ठंडी हवाओं से थर्र-थर्र कांप रही देह
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:18 PM IST
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शहर और देहात क्षेत्र में पिछले दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड से बृहस्पतिवार को भी लोगों को राहत नहीं मिली। रात के समय हाड़कांप कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। दिन के समय धूप से राहत मिल रही लेकिन सुबह और शाम को ठंडी हवाएं परेशान कर रही है। ठंड का असर गंगा के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम को घाटों पर सन्नाटा पसरा रहता है।
बुधवार को जहां न्यूनतम तापमान 3.25 डिग्री दर्ज किया गया था वहीं बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 19.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 4.1 एवं दर्ज किया गया। ठंड से शहर और देहात में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। देहात क्षेत्र में सुबह के समय कोहरा छा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को अपने पशुओं को चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। देहात में 11 बजे के बाद ही कोहरा छंटता है। शहर के लोगोें को फिलहाल कोहरे का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है, लेकिन सुबह के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगता है। ठंड ने सुबह और शाम की सैर पर निकलने वालों का समय भी बदल दिया है। सुबह के समय साढ़े सात बजे के बाद ही लोग घूमने निकलते हैं। शाम के समय लोग तीन बजे ही निकल पड़ते हैं और पांच बजे तक घर लौट आते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार ठंड का प्रकोप अभी दो हफ्ते जारी रहेगा। प्राचीनकाल गणना के अनुसार इन दिनों चालीस दिनों चिल्ला चल रहा है। चिल्ले के अभी 13 दिन ही बीते है। मान्यता है कि चिल्ले का समापन आठ फरवरी को होगा। इस समय चिल्ला अपने यौवन पर आने वाला है। लोहड़ी और मकर संक्रांति के अग्निपर्व ताप को बढ़ाने के भले ही कितने प्रयास करें, किंतु ठंड का प्रकोप जनवरी के महीने में यथावत बने रहने के आसार है।
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अब अलाव का ही सहारा
गंगा घाटों से लेकर रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के आसपास यात्रियों व स्थानीय मजदूर वर्ग के लिए अब अलाव ही ठंड से बचने का सहारा है। शहर में कहीं नगर निगम ने तो कहीं लोगों को खुद ही अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम करना पड़ रहा है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार की देर शाम को सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाली जगहों का जायजा लिया तो ठंड से ठिठुरती धर्मनगरी की एक अलग ही तस्वीर सामने आई।
रेलवे स्टेशन के सामने रिक्शा स्टैंड पर नगर निगम की ओर अलाव के लिए लकड़ी डाली गई हैं। यहां यात्री और रिक्शा चालक अलाव सेकते नजर आए। ललतारौ पुल के पास अलाव के लिए लकड़ी तो डाली गई थी, लेकिन जलाई नहीं थी। वहीं हिल बाईपास मार्ग पर गुरुद्वारा के सामने कुछ लोग प्लास्टिक और कपड़े जलाकर अलाव तापते हुए दिखे। उनका कहना था कि नगर निगम की ओर से यहां पर कोई अलाव का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। रोडवेज बस अड्डे के सामने भी नगर निगम का अलाव रहा था।
कहां है गर्म कपड़े बांटने वाली संस्थाएं
शहर में सैकड़ों की संख्या में संस्थाएं कागजों में दर्ज है। उनकी तरफ से दावा किया जाता है कि समाज सेवा का कार्य बढ़चढ़कर किया जा रहा है, लेकिन ठिठुरती ठंड में शहर का निचला तबका सिर्फ सरकारी अलाव के भरोसे है। कई जगह ऐसा भी नजारा सामने आया, जहां फुटपाथ पर भिखारी ठंड में ठिठुरते नजर आए।
ठंड को देखते हुए पहले सभी पुराने चयनित स्थलों पर अलाव जलाने का निर्देश दिया गया है। इन सभी स्थानों पर अलावा जल रहा है। यदि जरूरत पड़ी तो अन्य स्थानों पर भी अलाव जलाने की व्यवस्था कराई जा सकती है।
- रवींद्र कुमार दयाल, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम
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बुधवार को जहां न्यूनतम तापमान 3.25 डिग्री दर्ज किया गया था वहीं बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 19.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 4.1 एवं दर्ज किया गया। ठंड से शहर और देहात में जनजीवन प्रभावित हो रहा है। देहात क्षेत्र में सुबह के समय कोहरा छा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को अपने पशुओं को चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। देहात में 11 बजे के बाद ही कोहरा छंटता है। शहर के लोगोें को फिलहाल कोहरे का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है, लेकिन सुबह के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगता है। ठंड ने सुबह और शाम की सैर पर निकलने वालों का समय भी बदल दिया है। सुबह के समय साढ़े सात बजे के बाद ही लोग घूमने निकलते हैं। शाम के समय लोग तीन बजे ही निकल पड़ते हैं और पांच बजे तक घर लौट आते हैं।
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मौसम विभाग के अनुसार ठंड का प्रकोप अभी दो हफ्ते जारी रहेगा। प्राचीनकाल गणना के अनुसार इन दिनों चालीस दिनों चिल्ला चल रहा है। चिल्ले के अभी 13 दिन ही बीते है। मान्यता है कि चिल्ले का समापन आठ फरवरी को होगा। इस समय चिल्ला अपने यौवन पर आने वाला है। लोहड़ी और मकर संक्रांति के अग्निपर्व ताप को बढ़ाने के भले ही कितने प्रयास करें, किंतु ठंड का प्रकोप जनवरी के महीने में यथावत बने रहने के आसार है।
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अब अलाव का ही सहारा
गंगा घाटों से लेकर रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के आसपास यात्रियों व स्थानीय मजदूर वर्ग के लिए अब अलाव ही ठंड से बचने का सहारा है। शहर में कहीं नगर निगम ने तो कहीं लोगों को खुद ही अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम करना पड़ रहा है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार की देर शाम को सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाली जगहों का जायजा लिया तो ठंड से ठिठुरती धर्मनगरी की एक अलग ही तस्वीर सामने आई।
रेलवे स्टेशन के सामने रिक्शा स्टैंड पर नगर निगम की ओर अलाव के लिए लकड़ी डाली गई हैं। यहां यात्री और रिक्शा चालक अलाव सेकते नजर आए। ललतारौ पुल के पास अलाव के लिए लकड़ी तो डाली गई थी, लेकिन जलाई नहीं थी। वहीं हिल बाईपास मार्ग पर गुरुद्वारा के सामने कुछ लोग प्लास्टिक और कपड़े जलाकर अलाव तापते हुए दिखे। उनका कहना था कि नगर निगम की ओर से यहां पर कोई अलाव का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। रोडवेज बस अड्डे के सामने भी नगर निगम का अलाव रहा था।
कहां है गर्म कपड़े बांटने वाली संस्थाएं
शहर में सैकड़ों की संख्या में संस्थाएं कागजों में दर्ज है। उनकी तरफ से दावा किया जाता है कि समाज सेवा का कार्य बढ़चढ़कर किया जा रहा है, लेकिन ठिठुरती ठंड में शहर का निचला तबका सिर्फ सरकारी अलाव के भरोसे है। कई जगह ऐसा भी नजारा सामने आया, जहां फुटपाथ पर भिखारी ठंड में ठिठुरते नजर आए।
ठंड को देखते हुए पहले सभी पुराने चयनित स्थलों पर अलाव जलाने का निर्देश दिया गया है। इन सभी स्थानों पर अलावा जल रहा है। यदि जरूरत पड़ी तो अन्य स्थानों पर भी अलाव जलाने की व्यवस्था कराई जा सकती है।
- रवींद्र कुमार दयाल, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम