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हाजिरी स्कूल में, ड्यूटी दफ्तर में
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 12 Apr 2017 09:36 PM IST
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शिक्षकों के अटैचमेंट के खेल पर लेकर शिक्षामंत्री की सख्ती की हरिद्वार में अधिकारी ही खुद हवा निकालने में लगे हैं। बीईओ और डिप्टी बीईओ लेवल के अधिकारियों ने शिक्षकों से बाबूगिरी कराने का नया फार्मूला ढूंढ निकाला है। अब शिक्षकों की हाजिरी स्कूलों में लगवाकर काम दफ्तरों में लिया जा रहा है। इतना ही नहीं कई शिक्षक तो स्कूल में मेडिकल लगाकर दफ्तरों में बाबूगिरी बजा रहे हैं। शिक्षा मंत्री और शासन के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं।
जनपद में शहर से लेकर देहात तक के तमाम स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। श्यामपुर क्षेत्र में ग्रामीण एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शिक्षक मनमाफिक नौकरी के लिए सारे नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। कोई अपने घर के नजदीक स्कूल में अटैच चला आ रहा है तो कोई दफ्तर में बाबूगिरी करने में मगन है। अमर उजाला ने बीते तीन मार्च के अंक में शिक्षकों के बाबूगिरी के शौक का खुलासा किया था। जिस पर संज्ञान लेते हुए शासन ने सात दिन के भीतर शिक्षकों को स्कूल वापस लौटने के निर्देश विभाग को दिए थे। प्रदेश के नए शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय ने भी संज्ञान लिया और पूरे प्रदेश में अटैचमेंट के खेल पर नकेल कसने के निर्देश दिए। जिसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों और दफ्तरों से अपने मूल स्कूलों में लौट आए, पर अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षक दफ्तरों व अन्य स्कूलों में चिपके हुए हैं।
कोई दफ्तरों से स्कूल में चिट्ठी पहुंचाने तो कोई मिड-डे-मील का चावल बांटने की आड़ में दफ्तर व मर्जी के स्कूल छोड़ने को तैयार नहीं है। वहीं जनपद में कुछ उप शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों ने बाबूगिरी को बढ़ावा देने के लिए चोर तरीका ढूंढा है। योजना के तहत शिक्षकों से स्कूलों में हाजिरी लगवाकर उन्हें दफ्तरों में बुलवा लिया जाता है।
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अधिकारियों के इर्दगिर्द भी अटैचमेंट का खेल
शिक्षा विभाग और अधिकारियों के इर्द गिर्द के स्कूलों में ही अटैचमेंट का खेल खेला जा रहा है। जबकि हरिद्वार व रुड़की नगर क्षेत्र के तमाम स्कूल एक-एक शिक्षकों के भरोसे हैं। देहात में मिस्सरपुर, श्यामपुर, लालढांग जैसे प्राइमरी स्कूलों में 100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं अकेले शिक्षकों के भरोसे हैं। बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए यहां ग्रामीण दाखिला कराने से भी हिचकिचा रहे हैं।
शासन के निर्देशों पर सभी शिक्षकों को उनके मूल स्कूल भेज दिया गया है। सिर्फ ऐसे शिक्षकों को छोड़ा गया है, जो एकल स्कूल में अटैच हैं। उनको हटाने से स्कूल बंद हो जाएगा। यदि शिक्षकों को हाजिरी लगवाकर दफ्तरों में बुलाया जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। इस पर निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
- जगमोहन सोनी, डीईओ बेसिक हरिद्वार
सभी जनपदों में अटैचमेंट खत्म कर शिक्षकों को मूल स्कूलों में भेजने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए थे। शिक्षा मंत्री का रुख भी अटैचमेंट को लेकर साफ है। यदि कोई अधिकारी ही इसे बढ़ावा दे रहा है तो इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी।
- महावीर सिंह बिष्ट, अपर निदेशक, प्राइमरी शिक्षा उत्तराखंड
जनपद में शहर से लेकर देहात तक के तमाम स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। श्यामपुर क्षेत्र में ग्रामीण एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शिक्षक मनमाफिक नौकरी के लिए सारे नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। कोई अपने घर के नजदीक स्कूल में अटैच चला आ रहा है तो कोई दफ्तर में बाबूगिरी करने में मगन है। अमर उजाला ने बीते तीन मार्च के अंक में शिक्षकों के बाबूगिरी के शौक का खुलासा किया था। जिस पर संज्ञान लेते हुए शासन ने सात दिन के भीतर शिक्षकों को स्कूल वापस लौटने के निर्देश विभाग को दिए थे। प्रदेश के नए शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय ने भी संज्ञान लिया और पूरे प्रदेश में अटैचमेंट के खेल पर नकेल कसने के निर्देश दिए। जिसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों और दफ्तरों से अपने मूल स्कूलों में लौट आए, पर अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षक दफ्तरों व अन्य स्कूलों में चिपके हुए हैं।
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कोई दफ्तरों से स्कूल में चिट्ठी पहुंचाने तो कोई मिड-डे-मील का चावल बांटने की आड़ में दफ्तर व मर्जी के स्कूल छोड़ने को तैयार नहीं है। वहीं जनपद में कुछ उप शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों ने बाबूगिरी को बढ़ावा देने के लिए चोर तरीका ढूंढा है। योजना के तहत शिक्षकों से स्कूलों में हाजिरी लगवाकर उन्हें दफ्तरों में बुलवा लिया जाता है।
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अधिकारियों के इर्दगिर्द भी अटैचमेंट का खेल
शिक्षा विभाग और अधिकारियों के इर्द गिर्द के स्कूलों में ही अटैचमेंट का खेल खेला जा रहा है। जबकि हरिद्वार व रुड़की नगर क्षेत्र के तमाम स्कूल एक-एक शिक्षकों के भरोसे हैं। देहात में मिस्सरपुर, श्यामपुर, लालढांग जैसे प्राइमरी स्कूलों में 100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं अकेले शिक्षकों के भरोसे हैं। बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए यहां ग्रामीण दाखिला कराने से भी हिचकिचा रहे हैं।
शासन के निर्देशों पर सभी शिक्षकों को उनके मूल स्कूल भेज दिया गया है। सिर्फ ऐसे शिक्षकों को छोड़ा गया है, जो एकल स्कूल में अटैच हैं। उनको हटाने से स्कूल बंद हो जाएगा। यदि शिक्षकों को हाजिरी लगवाकर दफ्तरों में बुलाया जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। इस पर निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
- जगमोहन सोनी, डीईओ बेसिक हरिद्वार
सभी जनपदों में अटैचमेंट खत्म कर शिक्षकों को मूल स्कूलों में भेजने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए थे। शिक्षा मंत्री का रुख भी अटैचमेंट को लेकर साफ है। यदि कोई अधिकारी ही इसे बढ़ावा दे रहा है तो इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी।
- महावीर सिंह बिष्ट, अपर निदेशक, प्राइमरी शिक्षा उत्तराखंड