{"_id":"61f014ac57edfb43d343f33d","slug":"amavasya-will-come-after-2-15-pm-on-31st-january-haridwar-news-drn402538389","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोमवती अमावस्या पर बन रहा सिद्धि योग, स्नान अश्वमेघ यज्ञ के तुल्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोमवती अमावस्या पर बन रहा सिद्धि योग, स्नान अश्वमेघ यज्ञ के तुल्य
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमवती अमावस्या एवं हरिद्वार तीर्थ का विशेष महत्व है। सोमवती अमावस्या का स्नान अश्वमेघ यज्ञ के समान होता है। इस बार दो दिनों तक अमावस्या का योग रहेगा। एक फरवरी को सुबह सवा 11 बजे के बाद मौनी अमावस्या भी शुरू हो जाएगी।
सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी कनखल के प्रतीक मिश्र पुरी के अनुसार हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या को बहुत शुभ माना गया है। सोमवती अमावस्या के दिन व्रत, पूजन और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए भी इस दिन कई तरह के उपाय किए जा सकते हैं। इस बार माघ माह की अमावस्या तिथि 31 जनवरी, सोमवार दोपहर 2.15 मिनट से शुरू होगी और एक फरवरी मंगलवार सुबह 11.15 मिनट तक रहेगी। माघ मास में पड़ने के कारण इसे माघी अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मौनी अमावस्या को काफी पुण्यदायी माना गया है। हालांकि, गंगा स्नान के लिए मंगलवार का दिन सबसे उत्तम रहेगा, लेकिन सोमवार के दिन पितरों के निमित कुछ जरूर कार्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
एक फरवरी को महोदय योग में मौनी अमावस्या होगी। यह दोनो ही दिन तीर्थ स्नान, दान के लिए बहुत ही शुभकारी होंगे। कहा जाता है की महोदय योग में यदि मौन रह कर किसी कलश में सोना, चांदी, मोती धन, इत्यादि यदि तीर्थ पर दान करते हे तो यह दान व्यक्ति को राजनीति में महोदय बना देता है। पहले राजा इस योग में गाय, सोना, चांदी दान किया करते थे। महोदय योग मोनी अमावस्या को एक फरवरी को सुबह 6.41 से 11.15 तक रहेगा।
विज्ञापन
इस साल कुल 13 अमावस्या
वर्ष 2022 में कुल 13 अमावस्या तिथि है। जिसमें से केवल दो ही सोमवती अमावस्या है। साल की पहली सोमवती अमावस्या 31 जनवरी को है, और दूसरी 30 मई को होगी। पंचांग गणना के अनुसार 31 जनवरी को दोपहर 2.15 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। इसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। शास्त्रों के अनुसार सोमवार को कुछ समय के लिए अमावस्या तिथि होने पर इसे बेढ़ी और सोमवती अमावस्या मानते हैं। एक फरवरी को अमावस्या तिथि सुबह 11.16 बजे तक है। इसलिए 31 जनवरी को भी पितृ कार्य के लिए अमावस्या मान्य है।
शिवरात्रि का भी बन रहा संयोग
सोमवती अमावस्या पर चतुर्दशी यानी मास शिवरात्रि का संयोग भी कुछ समय के लिए बनी हुआ है। इस दिन 10.25 बजे सिद्धि योग भी लग जाएगा। इसलिए इस दिन शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा।
विज्ञापन
सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी कनखल के प्रतीक मिश्र पुरी के अनुसार हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या को बहुत शुभ माना गया है। सोमवती अमावस्या के दिन व्रत, पूजन और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए भी इस दिन कई तरह के उपाय किए जा सकते हैं। इस बार माघ माह की अमावस्या तिथि 31 जनवरी, सोमवार दोपहर 2.15 मिनट से शुरू होगी और एक फरवरी मंगलवार सुबह 11.15 मिनट तक रहेगी। माघ मास में पड़ने के कारण इसे माघी अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मौनी अमावस्या को काफी पुण्यदायी माना गया है। हालांकि, गंगा स्नान के लिए मंगलवार का दिन सबसे उत्तम रहेगा, लेकिन सोमवार के दिन पितरों के निमित कुछ जरूर कार्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विज्ञापन
एक फरवरी को महोदय योग में मौनी अमावस्या होगी। यह दोनो ही दिन तीर्थ स्नान, दान के लिए बहुत ही शुभकारी होंगे। कहा जाता है की महोदय योग में यदि मौन रह कर किसी कलश में सोना, चांदी, मोती धन, इत्यादि यदि तीर्थ पर दान करते हे तो यह दान व्यक्ति को राजनीति में महोदय बना देता है। पहले राजा इस योग में गाय, सोना, चांदी दान किया करते थे। महोदय योग मोनी अमावस्या को एक फरवरी को सुबह 6.41 से 11.15 तक रहेगा।
विज्ञापन
इस साल कुल 13 अमावस्या
वर्ष 2022 में कुल 13 अमावस्या तिथि है। जिसमें से केवल दो ही सोमवती अमावस्या है। साल की पहली सोमवती अमावस्या 31 जनवरी को है, और दूसरी 30 मई को होगी। पंचांग गणना के अनुसार 31 जनवरी को दोपहर 2.15 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। इसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। शास्त्रों के अनुसार सोमवार को कुछ समय के लिए अमावस्या तिथि होने पर इसे बेढ़ी और सोमवती अमावस्या मानते हैं। एक फरवरी को अमावस्या तिथि सुबह 11.16 बजे तक है। इसलिए 31 जनवरी को भी पितृ कार्य के लिए अमावस्या मान्य है।
शिवरात्रि का भी बन रहा संयोग
सोमवती अमावस्या पर चतुर्दशी यानी मास शिवरात्रि का संयोग भी कुछ समय के लिए बनी हुआ है। इस दिन 10.25 बजे सिद्धि योग भी लग जाएगा। इसलिए इस दिन शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा।