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जगत के रचयिता हैं भगवान आदिनाथ : जैन
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
श्री अहिंसा दिगंबर जैन मंदिर ललतारौ पुल के प्रांगण में श्री 1008 भगवान आदिनाथ का निर्वाण महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर समस्त जैन मंदिरों को भव्य रूप से सजाया संवारा गया। प्रात:काल से ही मंदिरों में पूजन विधान व निर्वाण लाड़ू भगवान को समर्पित किए। साथ ही भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई।
मुख्य समारोह हरिद्वार स्थित जैन मंदिर में ध्वजारोहण के साथ प्रारंभ हुआ। चतुर्थ कालीन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 भगवान आदिनाथ सहित अन्य समस्त प्रतिभाओं का महामस्तिकाभिषेक विधिविधान से संपन्न हुआ। जैन समाज के अध्यक्ष विनय जैन ने कहा कि भगवान आदिनाथ सृष्टि के रचयिता थे। इसलिए इनको ब्रह्मा, विष्णु शंकर, ऋषभ देव, महादेव आदि 1008 नामों से पुकारा गया। इन्होंने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की और अपनी आत्मा के कल्याण में लगे रहे। इन्होंने जीवों को सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, प्रेम परोपकार का पाठ पढ़ाया। बालेश जैन ने कहा कि धर्म ही वह शक्ति है जो पशु को परमेश्वर बना सकता है। आप किसी भी धर्म का पालन करते हों पर अपने धर्म पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए उन महापुरुषों के बताए रास्ते पर चलो। भगवान आदिनाथ की शोभायात्रा नगर कोतवाली भोला गिरी रोड, संन्यास रोड, शिवमूर्ति, ललतारौ पुल होते हुए पुन: श्री मंदिर पहुंची। जहां भगवान का 1008 कलशों से अभिषेक किया गया। इस अवसर पर जेसी जैन, यूसी जैन, पीसी जैन, रतन प्रकाश, मनीष जैन, नितेश जैन, पंडित पंकज जैन, प्रियांशु, अशोक कुमार, धर्मेन्द्र जैन, अनिल जैन, संदीप जैन, आशीष जैन, रवि जैन, प्रकाश जैन, संजय जैन, अमित जैन, भावुक जैन, सतीश जैन, पदम जैन, सुरेन्द्र जैन, विजय जैन, वकील चंद जैन, आदेश जैन एड., सुभाष जैन, मयंक जैन, मनोज जैन, शशी जैन, आदेश जैन, संजय जैन, डॉ. नलिनी जैन, निशा जैन, सुधा जैन, अनिता जैन आदि हजारों महिला पुरुषों ने शोभायात्रा में शामिल होकर धर्मलाभ उठाया।
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श्री अहिंसा दिगंबर जैन मंदिर ललतारौ पुल के प्रांगण में श्री 1008 भगवान आदिनाथ का निर्वाण महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर समस्त जैन मंदिरों को भव्य रूप से सजाया संवारा गया। प्रात:काल से ही मंदिरों में पूजन विधान व निर्वाण लाड़ू भगवान को समर्पित किए। साथ ही भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई।
मुख्य समारोह हरिद्वार स्थित जैन मंदिर में ध्वजारोहण के साथ प्रारंभ हुआ। चतुर्थ कालीन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 भगवान आदिनाथ सहित अन्य समस्त प्रतिभाओं का महामस्तिकाभिषेक विधिविधान से संपन्न हुआ। जैन समाज के अध्यक्ष विनय जैन ने कहा कि भगवान आदिनाथ सृष्टि के रचयिता थे। इसलिए इनको ब्रह्मा, विष्णु शंकर, ऋषभ देव, महादेव आदि 1008 नामों से पुकारा गया। इन्होंने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की और अपनी आत्मा के कल्याण में लगे रहे। इन्होंने जीवों को सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, प्रेम परोपकार का पाठ पढ़ाया। बालेश जैन ने कहा कि धर्म ही वह शक्ति है जो पशु को परमेश्वर बना सकता है। आप किसी भी धर्म का पालन करते हों पर अपने धर्म पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए उन महापुरुषों के बताए रास्ते पर चलो। भगवान आदिनाथ की शोभायात्रा नगर कोतवाली भोला गिरी रोड, संन्यास रोड, शिवमूर्ति, ललतारौ पुल होते हुए पुन: श्री मंदिर पहुंची। जहां भगवान का 1008 कलशों से अभिषेक किया गया। इस अवसर पर जेसी जैन, यूसी जैन, पीसी जैन, रतन प्रकाश, मनीष जैन, नितेश जैन, पंडित पंकज जैन, प्रियांशु, अशोक कुमार, धर्मेन्द्र जैन, अनिल जैन, संदीप जैन, आशीष जैन, रवि जैन, प्रकाश जैन, संजय जैन, अमित जैन, भावुक जैन, सतीश जैन, पदम जैन, सुरेन्द्र जैन, विजय जैन, वकील चंद जैन, आदेश जैन एड., सुभाष जैन, मयंक जैन, मनोज जैन, शशी जैन, आदेश जैन, संजय जैन, डॉ. नलिनी जैन, निशा जैन, सुधा जैन, अनिता जैन आदि हजारों महिला पुरुषों ने शोभायात्रा में शामिल होकर धर्मलाभ उठाया।
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