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गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा का त्यागपत्र

Thu, 31 Jan 2019 11:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 31 Jan 2019 11:47 PM IST
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गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा का त्यागपत्र
इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने बृहस्पतिवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। मिश्रा ने कहा कि वह सदस्य बने रहेंगे और अगला चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र होंगे, लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि उन्होंने गंगा सभा का कार्यकाल 26 दिसंबर को समाप्त हो जाने से पहले त्यागपत्र क्यों नहीं दिया।
महामंत्री रामकुमार मिश्रा बृहस्पतिवार दोपहर गंगा सभा के सभापति कृष्ण कुमार शर्मा के निवास पर पहुंचे और उन्हें अपना त्यागपत्र सौंप दिया। त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि समय पर चुनाव न करा पाने के नैतिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए वह अपने पद से त्यागपत्र दे रहे हैं। उनका त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से प्रभावी माना जाए। उधर, गंगा सभा के पूर्व अशोक त्रिपाठी ने मिश्रा के त्यागपत्र को नाटक बताया है। उन्होंने कहा कि मिश्रा का कार्यकाल पूरी तरह विफल रहा। यहां तक कि अपनी जिद के चलते वह चार वर्षीय कार्यकाल भी समय पर समाप्त नहीं कर सके। इसके लिए मिश्रा पहले यह तर्क दे रहे थे कि चार साल पहले उन्हें आठ फरवरी को कार्यभार मिला था, अत: वह तब तक के लिए चुनाव कराने को स्वतंत्र हैं। इस समय त्यागपत्र देना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि कोरा नाटक है। गंगा सभा के पूर्व प्रचार मंत्री अखिलेश शर्मा ने कहा कि रामकुमार मिश्रा पहले भी कुंभ मेले को देखकर भाग गए थे। अब फिर दो वर्ष बाद कुंभ आते देख वह अपने दायित्वों से भाग रहे हैं। अब चुनाव कौन सी इकाई संपन्न कराएगी, यह भी साफ नहीं हो पा रहा है।
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पूर्व कोषाध्यक्ष वीरेंद्र कीर्तिपाल ने कहा कि जो व्यक्ति महामंत्री पद के लिए योग्य ही नहीं था, वह त्यागपत्र का नाटक कर रहा है। अपने कार्यकाल में यदि कोई काम किया होता तो आज इस तरह भागने की जरूरत नहीं पड़ती। कीर्तिपाल ने कहा कि इस तरह पलायन से पूरे ग्रुप को चुनावी दौर में भारी आघात लगा है। चुनाव की घोषणा अति विलंब से होने के कारण इस बात के कोई आसार नहीं है कि चुनाव फरवरी में हो पाएंगे। कीर्तिपाल ने कहा कि हर की पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था के सामने वैधानिक संकट खड़ा हो गया है।
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